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Bareilly News: उद्यमों की राह में रोड़ा बने पेचीदे नियम, कहीं एनओसी की अड़चन

Wed, 21 Feb 2024 03:16 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Updated Wed, 21 Feb 2024 03:16 AM IST
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Complicated rules become a hindrance in the way of enterprises, NOC is a hindrance somewhere
बरेली। सालभर में 274 निवेश करार धरातल पर उतर गए, लेकिन 200 उद्यम पेचीदे नियम, अप्रासंगिक मानक और भूमि की अनुपलब्धता से जूझ रहे हैं। उद्यमियों का तर्क है कि अड़चनें नहीं आतीं तो भूमि पूजन समारोह में धरातल पर उतरने वाले उद्यमों की संख्या दोगुनी हो सकती थी।
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लघु उद्योग भारती के संभाग अध्यक्ष एसके सिंह के मुताबिक औद्योगिक भूमि न मिलने से कई प्रोजेक्ट अभी तक कागजों तक ही सीमित हैं। जिनके पास भूमि है, वे बीडीए का विकास शुल्क भरने में असमर्थ हैं। कई उद्योगों की जमीन पारिवारिक विवाद व भू उपयोग परिवर्तन में फंसी हुई है। जिनके पास सब कुछ मौजूद हैं, वे अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) के लिए विभागों के चक्कर लगा रहे हैं। हालांकि, अब एनओसी प्रक्रिया सीधे निगरानी में होने से उद्यमियों को थोड़ी राहत जरूर मिली है।
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फूड पार्क में एमएसएमई को मिले भूखंड
बहेड़ी में स्थापित मेगा फूड पार्क में खाद्य सामग्री निर्माण इकाई के अलावा एमएसएमई सेक्टर के उद्योगों को भी भूखंड आवंटित करने की मांग उद्यमी कर रहे हैं पर अब तक इस पर कोई सुनवाई नहीं हो सकी है। जमीन के अभाव में अटके प्रोजेक्ट में सर्वाधिक 51 प्रोजेक्ट इसी सेक्टर से हैं। अगर इन्हें भूमि उपलब्ध होती तो निवेश करार के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ते।
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वन विभाग का एक भी प्रोजेक्ट शुरू नहीं
उद्योग विभाग से प्राप्त जानकारी के मुताबिक वन विभाग से जुड़े 47 निवेश प्रस्तावों में से एक भी शुरू नहीं हुआ। इनमें से ज्यादातर आरा मशीन, वुड एंड क्राफ्ट, फर्नीचर निर्माण से जुड़े हैं। सहायक आयुक्त उद्योग कामिनी यादव के मुताबिक हाईकोर्ट से लाइसेंस जारी करने पर पाबंदी के चलते ये प्रोजेक्ट अटके रहे। हालांकि, दो माह पहले बंदिशें हट गई हैं, आवेदन करने वालों को लाइसेंस मिलने लगे हैं।

पर्यटन के 23 प्रोजेक्ट को स्वीकृति का इंतजार
पर्यटन विभाग के तहत निर्माण संबंधी 38 करार थे। इनमें से 23 अभी अधर में हैं। इसमें बीडीए से नक्शा पास होने, अग्निशमन विभाग की एनओसी मिलने, बीडीए को चार गुना विकास शुल्क देने, नौ मीटर चौड़ी सड़क की बाध्यता आदि की अड़चनें हैं। सेंट्रल यूपी चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष राजेश गुप्ता ने बताया कि पर्यटन विभाग को अब उद्योग का दर्जा मिला है। उम्मीद है कि अड़चनें दूर होंगी।


किस विभाग के कितने प्रोजेक्ट पाइप लाइन में
अर्बन डेवलपमेंट के पांच, यूपीसीडा के तीन, पर्यटन के 23, तकनीकी शिक्षा के तीन, सेकंडरी एजुकेशन के दो, स्वास्थ्य विभाग के तीन, आईटी एंड इलेक्ट्रॉनिक्स का एक, इंफ्रास्ट्रक्चर एवं औद्योगिक विभाग का एक, हाउसिंग के 16, पशुपालन के 11, कोऑपरेटिव के दो, डेयरी विकास के पांच, अतिरिक्त ऊर्जा के सात, एक्साइज का एक, एमएसएमई के 51, वोकेशनल एजुकेशन का एक, वन विभाग के 47, टेक्सटाइल के आठ, हॉर्टीकल्चर के 12 प्रोजेक्ट अभी धरातल पर नहीं उतर सके हैं।
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