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सेना पर टिप्पणी करने वाली कश्मीरी छात्राओं को पुलिस ने दिया क्षमादान
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बरेली। एक तरफ सेना के जवान देश की रक्षा के लिए सीमा पर अपना बलिदान देने से भी नहीं चूकते, दूसरी तरफ ऐसे पुलिसकर्मी भी हैं जो सेना के जवानों पर विवादित टिप्पणी करने वालों को आसानी से माफ कर देते हैं। इज्जतनगर इंस्पेक्टर ने आईवीआरआई की उन तीनों छात्राओं को क्षमादान दे दिया जिन्होंने पुलवामा कांड के बाद सेना के जवानों पर विवादित टिप्पणी की थी। इन टिप्पणियों के सामने आने के बाद पूरे देश के लोगों में इन छात्राओं के खिलाफ गुस्सा था। लेकिन पुलिस को न तो सैनिकों का सम्मान याद रहा और न देश के लोगों का गुस्सा। याद रहा तो कश्मीरी छात्राओं का कॅरियर। इसी कारण सारे आरोपों को दरकिनार कर एफआईआर में अंतिम रिपोर्ट लगाकर मामले को खत्म कर दिया।
मामला जनवरी 2019 का है। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) में पढ़ने वाली कश्मीर की तीन छात्राएं डॉ. उफक, डॉ. शामिया इरशाद और डॉ. हुमेरा फयाज ने पुलवामा हमले के बाद सोशल मीडिया पर सेना के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। पता लगने पर लोगों में आक्रोश फैल गया था। तत्कालीन भाजपा जिलाध्यक्ष रविंद्र सिंह राठौर, विधायक राजेश मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल, विहिप नेता पवन अरोरा आदि के साथ आईवीआरआई पहुंचे और निदेशक से विरोध जताते हुए कार्रवाई करने को कहा था। प्रबंधन ने भी जांच में छात्राओं को दोषी पाया। इनमें एक छात्रा का नाम संस्थान से काट दिया गया जबकि दो छात्राओं की फेलोशिप व स्कॉलरशिप रोक दी गई थी। एलआईयू की रिपोर्ट भी में विवादित टिप्पणी की बात सही पाई गई थी। इसके बाद तीनों छात्राओं के खिलाफ विहिप कार्यकर्ता अमित की तरफ से देशद्रोह के लिए भड़काने संबंधी टिप्पणी करने की रिपोर्ट दर्ज की गई। इज्जतनगर इंस्पेक्टर केके वर्मा ने विवेचना के दौरान तीनों कश्मीरी छात्राओं को क्लीन चिट दे दी। वह भी तब जब छात्राओं ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया था। उन्होंने माना था कि टिप्पणी उन्होंने ही की थी। इसके बावजदू पुलिस ने तीनों छात्राओं को क्षमादान दे दिया। मामले को खत्म करते समय पुलिस को सेना के जवानों की शहादत पल भर के लिए भी याद नहीं आई। पुलिस ने कश्मीरी छात्राओं से यह सवाल भी नहीं पूछा कि उनके दिल में अपने देश के सैनिकों के खिलाफ सम्मान का भाव क्यों नहीं है।
भाजपा व विहिप नेताओं में आक्रोश
सेना के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में आरोपियों को क्लीन चिट देने का पता चलने पर भाजपा व विश्व हिंदू परिषद के नेताओं में आक्रोश है। पूर्व जिलाध्यक्ष रविंद्र सिंह राठौर का कहना है कि देश के जवानों के खिलाफ टिप्पणी करने वालों को क्लीन चिट देना दुर्भाग्यपूर्ण है। वहीं बिथरी विधायक राजेश मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल का कहना है कि सेना के जवानों के खिलाफ टिप्पणी करने का अधिकार किसी को नहीं है। जिस किसी ने भी यह काम किया है उसे सजा मिलनी चाहिए थी। वहीं विहिप जिलाध्यक्ष पवन अरोरा का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस मामले की जांच कराई जाएगी।
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इस मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई है। छात्राओं ने लिखित में दिया था कि किसी को आघात पहुंचाने का उनका कोई उद्देश्य नहीं था। फिर भी अगर कोई आहत हुआ है तो उसके लिए वे दिल से लिखित माफी मांगती हैं। -केके वर्मा, इंस्पेक्टर, थाना इज्जतनगर
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मामला जनवरी 2019 का है। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) में पढ़ने वाली कश्मीर की तीन छात्राएं डॉ. उफक, डॉ. शामिया इरशाद और डॉ. हुमेरा फयाज ने पुलवामा हमले के बाद सोशल मीडिया पर सेना के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। पता लगने पर लोगों में आक्रोश फैल गया था। तत्कालीन भाजपा जिलाध्यक्ष रविंद्र सिंह राठौर, विधायक राजेश मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल, विहिप नेता पवन अरोरा आदि के साथ आईवीआरआई पहुंचे और निदेशक से विरोध जताते हुए कार्रवाई करने को कहा था। प्रबंधन ने भी जांच में छात्राओं को दोषी पाया। इनमें एक छात्रा का नाम संस्थान से काट दिया गया जबकि दो छात्राओं की फेलोशिप व स्कॉलरशिप रोक दी गई थी। एलआईयू की रिपोर्ट भी में विवादित टिप्पणी की बात सही पाई गई थी। इसके बाद तीनों छात्राओं के खिलाफ विहिप कार्यकर्ता अमित की तरफ से देशद्रोह के लिए भड़काने संबंधी टिप्पणी करने की रिपोर्ट दर्ज की गई। इज्जतनगर इंस्पेक्टर केके वर्मा ने विवेचना के दौरान तीनों कश्मीरी छात्राओं को क्लीन चिट दे दी। वह भी तब जब छात्राओं ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया था। उन्होंने माना था कि टिप्पणी उन्होंने ही की थी। इसके बावजदू पुलिस ने तीनों छात्राओं को क्षमादान दे दिया। मामले को खत्म करते समय पुलिस को सेना के जवानों की शहादत पल भर के लिए भी याद नहीं आई। पुलिस ने कश्मीरी छात्राओं से यह सवाल भी नहीं पूछा कि उनके दिल में अपने देश के सैनिकों के खिलाफ सम्मान का भाव क्यों नहीं है।
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भाजपा व विहिप नेताओं में आक्रोश
सेना के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में आरोपियों को क्लीन चिट देने का पता चलने पर भाजपा व विश्व हिंदू परिषद के नेताओं में आक्रोश है। पूर्व जिलाध्यक्ष रविंद्र सिंह राठौर का कहना है कि देश के जवानों के खिलाफ टिप्पणी करने वालों को क्लीन चिट देना दुर्भाग्यपूर्ण है। वहीं बिथरी विधायक राजेश मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल का कहना है कि सेना के जवानों के खिलाफ टिप्पणी करने का अधिकार किसी को नहीं है। जिस किसी ने भी यह काम किया है उसे सजा मिलनी चाहिए थी। वहीं विहिप जिलाध्यक्ष पवन अरोरा का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस मामले की जांच कराई जाएगी।
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इस मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई है। छात्राओं ने लिखित में दिया था कि किसी को आघात पहुंचाने का उनका कोई उद्देश्य नहीं था। फिर भी अगर कोई आहत हुआ है तो उसके लिए वे दिल से लिखित माफी मांगती हैं। -केके वर्मा, इंस्पेक्टर, थाना इज्जतनगर