Bareilly News: सीओ-इंस्पेक्टर को गोवध की धारा की जानकारी नहीं..., अदालत ने दोनों से मांगा स्पष्टीकरण
बरेली में गोवध के मामले में पुलिस ने गाय के परिवहन आदि की धारा लगाकर आरोप पत्र अदालत में भेज दिया। इस पर अदालत ने इंस्पेक्टर व सीओ से स्पष्टीकरण मांगा है।
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संरक्षित पशु की हत्या के मामले में कौन सी धारा लगाई जाती है, सीओ और इंस्पेक्टर को इसकी जानकारी नहीं है। बरेली के अपर सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने ऐसा ही मामला पकड़ा है। जिम्मेदारों ने गोवध निवारण अधिनियम की धारा लगाने की जगह गाय के परिवहन आदि की धारा लगाकर आरोप पत्र अदालत में भेज दिया। अब अदालत ने इंस्पेक्टर व सीओ से जवाब तलब करते हुए पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए शासन को लिखा जाए?
मामला मीरगंज थाने का है। वर्ष 2018 में सात कुंतल मांस बरामद करते हुए पुलिस ने धारा 5क उप्र गोवध निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया था। यह धारा गोवंशीय पशुओं के परिवहन पर लगाई जाती है। अदालत का कहना है कि बड़े स्तर पर मांस की बरामदगी के मामले में गोवध निवारण अधिनियम की धारा 5 नहीं लगाई गई।
इससे ऐसा प्रतीत होता है कि मीरगंज सीओ डॉ. दीपशिखा अहिरवन सिंह ने यह कृत्य आरोपियों को बचाने के उद्देश्य से किया है। पेशी कार्यालय में लिपिक की ओर से जिस प्रकार से आरोप पत्र रखा गया, सीओ ने मात्र हस्ताक्षर कर उसे न्यायालय में भेज दिया। अदालत ने सीओ को 28 मई को कारण स्पष्ट करने का आदेश दिया है।
थानाध्यक्ष को कानून की जानकारी तक नहीं
मांस बरामदगी के मामले में आरोप पत्र मीरगंज थानाध्यक्ष कुंवर बहादुर सिंह द्वारा ही अग्रसारित किया गया। अपर सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने थानाध्यक्ष के लिए लिखा है कि 27 मई को वह अपना स्पष्टीकरण दें। क्यों न उनके विरुद्ध पुलिस अधिनियम 1861 की धारा 29 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया जाए? क्यों न कार्रवाई के लिए मामला डीजीपी को भेजा जाए।