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सीएमओ ने प्रभारी से पूछा, आखिर क्यों नहीं हुआ इलाज
बरेली
Updated Tue, 10 Oct 2017 01:38 AM IST
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फरीदपुर सीएचसी स्टाफ की संवेदनहीनता से गैंगरीन पीड़ित राजपाल की इलाज के अभाव में मौत के मामले की जांच के लिए सीएमओ ने चिकित्साधिकारियों की दो सदस्यीय टीम गठित कर दी है। सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ला ने सीएचसी प्रभारी से पूछा भी है कि आखिर राजपाल को अस्पताल में इलाज क्यों नहीं मिला? गैंगरीन पीड़ित राजपाल को 108 एंबुलेंस से फरीदपुर पीएचसी लाया गया था। स्टाफ ने राजपाल के पैर के जख्म पर पट्टी तो बांध दी लेकिन उसे भर्ती नहीं किया। दो दिन बाद राजपाल का शव अस्पताल से आधा किलोमीटर दूर पितांबरपुर रेलवे स्टेशन के पास पड़ा मिला था। अमर उजाला ने स्वास्थ्य विभाग की इस संवेदनहीनता को उजागर किया तो अब सीएमओ मामले की जांच करा रहे हैं।
चार अक्तूबर को फरीदपुर कोतवाली पुलिस नेे सड़क किनारे घायल अवस्था में पड़े राजपाल को 108 एंबुलेंस से सीएचसी भेजा था। राजपाल का पैर सड़ चुका था और उसमें से दुर्गंध आ रही थी। उसने खुद को अलवर, राजस्थान का निवासी बताया था। फरीदपुर सीएचसी स्टाफ ने न तो राजपाल को अपने यहां भर्ती किया और न ही गंभीर हालत के बावजूद उसे जिला अस्पताल भेजा। सीएचसी स्टाफ की इस संवेदनहीनता ने ही राजपाल की जान ले ली लेकिन सीएमओ इसे सीएचसी स्टाफ की संवेदनहीनता मानने को तैयार नहीं हैं।
बकौल सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ला, मामला संज्ञान में आने के बाद उन्होंने सीएचसी प्रभारी से इस संबंध में जानकारी ली थी। प्रभारी ने बताया है कि राजपाल की पट्टी करने के बाद अस्पताल कर्मियों ने उसे भोजन भी कराया था, लेकिन ओपीडी में भीड़ होने के चलते वह खुद गायब हो गया। इसकी सूचना एसडीएम को भी दे दी गई थी। सीएमओ का कहना है कि सीएचसी से मरीज को जिला अस्पताल भेजना चाहिए था। इस संबंध में जवाब मांगा गया है। मामले की जांच के लिए दो चिकित्सा अधिकारियों को नियुक्त किया गया है।
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चार अक्तूबर को फरीदपुर कोतवाली पुलिस नेे सड़क किनारे घायल अवस्था में पड़े राजपाल को 108 एंबुलेंस से सीएचसी भेजा था। राजपाल का पैर सड़ चुका था और उसमें से दुर्गंध आ रही थी। उसने खुद को अलवर, राजस्थान का निवासी बताया था। फरीदपुर सीएचसी स्टाफ ने न तो राजपाल को अपने यहां भर्ती किया और न ही गंभीर हालत के बावजूद उसे जिला अस्पताल भेजा। सीएचसी स्टाफ की इस संवेदनहीनता ने ही राजपाल की जान ले ली लेकिन सीएमओ इसे सीएचसी स्टाफ की संवेदनहीनता मानने को तैयार नहीं हैं।
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बकौल सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ला, मामला संज्ञान में आने के बाद उन्होंने सीएचसी प्रभारी से इस संबंध में जानकारी ली थी। प्रभारी ने बताया है कि राजपाल की पट्टी करने के बाद अस्पताल कर्मियों ने उसे भोजन भी कराया था, लेकिन ओपीडी में भीड़ होने के चलते वह खुद गायब हो गया। इसकी सूचना एसडीएम को भी दे दी गई थी। सीएमओ का कहना है कि सीएचसी से मरीज को जिला अस्पताल भेजना चाहिए था। इस संबंध में जवाब मांगा गया है। मामले की जांच के लिए दो चिकित्सा अधिकारियों को नियुक्त किया गया है।
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