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Bareilly News: क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम बैक्टीरिया घोंट रहा प्रवासी पक्षियों का दम
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बरेली। सांभर झील में प्रवासी पक्षियों की मौतों की वजह विषाक्त क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम बैक्टीरिया है। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान इज्जतनगर के वैज्ञानिकों ने जांच के बाद इसकी पुष्टि की है। आईवीआरआई कैडराड की संयुक्त निदेशक डॉ. सोहिनी डे की ओर से अजमेर के मुख्य वन संरक्षक एसपी सिंह को जांच रिपोर्ट के साथ बचाव संबंधी एडवाइजरी भेजी है।
बताया कि अक्तूबर में सांभर झील में प्रवासी पक्षियों की मौत के बाद उनके नमूने जांच के लिए प्राप्त हुए थे। जांच में मौत की वजह क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम बैक्टीरिया मिला। इस बैक्टीरिया की विषाक्तता का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि जब इसे चूहों में इंजेक्ट किया गया तो वे भी मर गए। इससे पूर्व वर्ष 2019 में भी सांभर झील में इसी बैक्टीरिया की वजह से पक्षियों की मौत हुई थी।
मुख्य वन संरक्षक ने पक्षियों की मौत पर अंकुश लगाने के लिए उचित परामर्श मांगा था। आईवीआरआई के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. प्रसाद थॉमस, वैज्ञानिक डॉ. एम करिकलन, विकृति विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार, प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अभिजीत पावड़े ने सुझाव दिए हैं।
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ये है एडवाइजरी
- मृत पक्षियों को दफनाएं नहीं, झील से कहीं दूर जलाकर नष्ट करें।
- झील की डीसिल्टिंग (आसवन) कराएं। प्रवासी पक्षी का स्थानीय पक्षी से संपर्क न हो।
- बीमार पक्षियों का रेस्क्यू और लक्षण आधारित इलाज होना चाहिए।
- मृत, जीवित पक्षियों के नमूने जांच के लिए आईवीआरआई इज्जतनगर समेत भोपाल के उच्च सुरक्षा पशु रोग के राष्ट्रीय संस्थान को भी भेजें।
- झील की स्वच्छता, तापमान, पीएच, घुलित ऑक्सीजन आदि की नियमित जांच जरूर कराएं।
अमर उजाला ब्यूरो
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बताया कि अक्तूबर में सांभर झील में प्रवासी पक्षियों की मौत के बाद उनके नमूने जांच के लिए प्राप्त हुए थे। जांच में मौत की वजह क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम बैक्टीरिया मिला। इस बैक्टीरिया की विषाक्तता का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि जब इसे चूहों में इंजेक्ट किया गया तो वे भी मर गए। इससे पूर्व वर्ष 2019 में भी सांभर झील में इसी बैक्टीरिया की वजह से पक्षियों की मौत हुई थी।
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मुख्य वन संरक्षक ने पक्षियों की मौत पर अंकुश लगाने के लिए उचित परामर्श मांगा था। आईवीआरआई के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. प्रसाद थॉमस, वैज्ञानिक डॉ. एम करिकलन, विकृति विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार, प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अभिजीत पावड़े ने सुझाव दिए हैं।
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ये है एडवाइजरी
- मृत पक्षियों को दफनाएं नहीं, झील से कहीं दूर जलाकर नष्ट करें।
- झील की डीसिल्टिंग (आसवन) कराएं। प्रवासी पक्षी का स्थानीय पक्षी से संपर्क न हो।
- बीमार पक्षियों का रेस्क्यू और लक्षण आधारित इलाज होना चाहिए।
- मृत, जीवित पक्षियों के नमूने जांच के लिए आईवीआरआई इज्जतनगर समेत भोपाल के उच्च सुरक्षा पशु रोग के राष्ट्रीय संस्थान को भी भेजें।
- झील की स्वच्छता, तापमान, पीएच, घुलित ऑक्सीजन आदि की नियमित जांच जरूर कराएं।
अमर उजाला ब्यूरो