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कम्यूनल और क्रिमनल समस्याओं के खात्मे का दावा
बरेली।
Updated Tue, 16 May 2017 01:52 AM IST
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Claims of the end of Communal and Criminal Problems
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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बरेली रेंज के नये आईजी एसके भगत ने सोमवार शाम पहुंचकर बागडोर संभाल ली। डीआईजी आशुतोष कुमार अब डीआईजी सीबीसीआईडी लखनऊ का पदभार संभालेंगे। वर्ष 1998 बैच के आईपीएस एसके भगत को 2005 में लखनऊ के नेहा भार्गव हत्याकांड में कुख्यात शूटर सचिन पहाड़ी के एनकाउंटर के लिए राष्ट्रपति वीरता पुरस्कार से 2014 में सम्मानित किया गया था।
झारखंड के धनबाद के मूल निवासी एसके भगत ने बतौर ट्रेनी आईपीएस वाराणसी से शुरुआत की थी। इसके बाद बुलंदशहर, झांसी, गोंडा, मऊ, बलिया, जौनपुर, गाजियाबाद सहित 18 से ज्यादा जिलों में कमान संभाली। सीबीआई में पौने तीन साल बिताने के बाद वह डीआईजी बनारस बने। वहीं आईजी के पद पर पदोन्नत होकर तीन साल तैनात रहे। विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें हटाया गया था। अब उन्हें बरेली रेंज की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सांप्रदायिक रेंज बरेली में बेसिक पुलिसिंग को अपना हथियार बताने वाले एसके भगत ने कम्यूनल और क्रिमनल समस्याओं के खात्मे का दावा किया। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल के बदमाशों से लोहा लेते हुए पुलिसिंग का अच्छा अनुभव है। शासन की प्राथमिकता के मुताबिक दागी पुलिसकर्मियों को हटाया जाएगा और अवैध वसूली नहीं होने दी जाएगी। कप्तान बदले हैं लेकिन मैं उनकी उम्मीदोें पर खरा उतरूंगा।
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झारखंड के धनबाद के मूल निवासी एसके भगत ने बतौर ट्रेनी आईपीएस वाराणसी से शुरुआत की थी। इसके बाद बुलंदशहर, झांसी, गोंडा, मऊ, बलिया, जौनपुर, गाजियाबाद सहित 18 से ज्यादा जिलों में कमान संभाली। सीबीआई में पौने तीन साल बिताने के बाद वह डीआईजी बनारस बने। वहीं आईजी के पद पर पदोन्नत होकर तीन साल तैनात रहे। विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें हटाया गया था। अब उन्हें बरेली रेंज की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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सांप्रदायिक रेंज बरेली में बेसिक पुलिसिंग को अपना हथियार बताने वाले एसके भगत ने कम्यूनल और क्रिमनल समस्याओं के खात्मे का दावा किया। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल के बदमाशों से लोहा लेते हुए पुलिसिंग का अच्छा अनुभव है। शासन की प्राथमिकता के मुताबिक दागी पुलिसकर्मियों को हटाया जाएगा और अवैध वसूली नहीं होने दी जाएगी। कप्तान बदले हैं लेकिन मैं उनकी उम्मीदोें पर खरा उतरूंगा।
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