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दावे फेल: सरकारी दुकानों पर नहीं मिल रही डीएपी, किसान परेशान
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बरेली। जिले में डीएपी की किल्लत लगातार बनी हुई है। किसान गेहूं बोने के लिए तैयार बैठा है, लेकिन उसे सरकारी दुकानों पर डीएपी खाद नहीं मिल रही है। वह सरकारी दुकानों पर लगातार चक्कर काट रहा है।
पिछले दिनों अधिकारियों ने दावा किया था कि 25 से 30 अक्तूबर तक डीएपी उपलब्ध हो जाएगी, लेकिन अभी तक सरकारी दुकानों पर डीएपी नहीं पहुंची है। इससे किसान बेहद परेशान हैं। निजी दुकानों से डीएपी खरीदने के लिए मजबूर हैं। जिले के अधिकतर किसान गेहूं बुवाई के दौरान डीएपी खाद प्रयोग करते हैं।
उनका मानना है कि इससे फसल अच्छी होती है, लेकिन जिले की सरकारी दुकानों पर डीएपी खाद ही उपलब्ध नहीं है। पिछले डेढ़ माह से लगातार डीएपी की किल्लत बनी हुई है। तब से किसान धान की कटाई के साथ-साथ गेहूं की बुवाई की तैयारियों भी जुटे थे। वह डीएपी के लिए सरकारी दुकानों पर चक्कर भी लगा रहे थे। उन्हें आश्वासन दिया जा रहा था कि दो-चार दिनों में डीएपी आ जाएगी, लेकिन अभी तक सरकारी दुकानों पर डीएपी नहीं पहुंची है।
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क्या कहते हैं किसान
सीहोर गांव के किसान नुक्ता प्रसाद, मल्साखेड़ा के किसान चरन सिंह, हल्दी कला के किसान इकबाल ने बताया कि वह सोमवार को डीएपी लेने आए थे लेकिन उन्हें डीएपी नहीं मिली।
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किसान बोले- डीएपी नहीं मिली तो पिछैती हो जाएगी फसल
सिरौली। क्षेत्र में डीएपी की किल्लत किसानों के लिए मुसीबत बन गई है। नगर के इफको खाद सेंटर पर पिछले डेढ़ माह से डीएपी नहीं है। साधन सहकारी समिति पर भी डीएपी नहीं है। इफको सेंटर प्रभारी जोगेंद्र सिंह ने बताया कि डेढ़ माह से डीएपी नहीं आई है। इससे किसान वापस लौट रहे हैं। समिति चेयरमैन पुनीत गुप्ता ने बताया कि डीएपी तो नहीं है, लेकिन जल्द आ जाएगी। अंजनी के किसान प्रमोद पांडेय, प्यास के आलम खां, सिरौली के राजेंद्र सिंह चौहान, सोहनलाल लोधी, रामेश्वर वर्मा आदि ने बताया कि सरसों, बरसीम, गेंहू बुवाई का समय है। डीएपी की जरूरत है। अगर डीएपी नहीं मिली तो उनकी फसलें पिछैती हो जाएंगी।
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एक खतौनी पर दिया जा रहा एनपीके का कट्टा
मीरगंज। बहुउद्देशीय साधन सहकारी समिति सहोड़ा पर डीएपी नहीं है। यहां केवल एनपीके और यूरिया है। यहां जो किसान सदस्य नहीं है। उनसे खतौनी की नकल लेकर प्रति एकड़ के हिसाब से एक कट्टा एनपीके खाद दी जा रही है।
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- जिले में आलू की बुवाई हो चुकी है। उसी में डीएपी की ज्यादा मांग रहती है। अब गेहूं की बुवाई शुरू हो चुकी है। इसमें किसान एनपीके ज्यादा लगाता है। मंगलवार तक इसकी भी रैक पहुंच जाएगी। डीएपी भी उपलब्ध कराई जा रही है।
- ऋतृषा तिवारी, जिला कृषि अधिकारी
संवाद
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पिछले दिनों अधिकारियों ने दावा किया था कि 25 से 30 अक्तूबर तक डीएपी उपलब्ध हो जाएगी, लेकिन अभी तक सरकारी दुकानों पर डीएपी नहीं पहुंची है। इससे किसान बेहद परेशान हैं। निजी दुकानों से डीएपी खरीदने के लिए मजबूर हैं। जिले के अधिकतर किसान गेहूं बुवाई के दौरान डीएपी खाद प्रयोग करते हैं।
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उनका मानना है कि इससे फसल अच्छी होती है, लेकिन जिले की सरकारी दुकानों पर डीएपी खाद ही उपलब्ध नहीं है। पिछले डेढ़ माह से लगातार डीएपी की किल्लत बनी हुई है। तब से किसान धान की कटाई के साथ-साथ गेहूं की बुवाई की तैयारियों भी जुटे थे। वह डीएपी के लिए सरकारी दुकानों पर चक्कर भी लगा रहे थे। उन्हें आश्वासन दिया जा रहा था कि दो-चार दिनों में डीएपी आ जाएगी, लेकिन अभी तक सरकारी दुकानों पर डीएपी नहीं पहुंची है।
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क्या कहते हैं किसान
सीहोर गांव के किसान नुक्ता प्रसाद, मल्साखेड़ा के किसान चरन सिंह, हल्दी कला के किसान इकबाल ने बताया कि वह सोमवार को डीएपी लेने आए थे लेकिन उन्हें डीएपी नहीं मिली।
किसान बोले- डीएपी नहीं मिली तो पिछैती हो जाएगी फसल
सिरौली। क्षेत्र में डीएपी की किल्लत किसानों के लिए मुसीबत बन गई है। नगर के इफको खाद सेंटर पर पिछले डेढ़ माह से डीएपी नहीं है। साधन सहकारी समिति पर भी डीएपी नहीं है। इफको सेंटर प्रभारी जोगेंद्र सिंह ने बताया कि डेढ़ माह से डीएपी नहीं आई है। इससे किसान वापस लौट रहे हैं। समिति चेयरमैन पुनीत गुप्ता ने बताया कि डीएपी तो नहीं है, लेकिन जल्द आ जाएगी। अंजनी के किसान प्रमोद पांडेय, प्यास के आलम खां, सिरौली के राजेंद्र सिंह चौहान, सोहनलाल लोधी, रामेश्वर वर्मा आदि ने बताया कि सरसों, बरसीम, गेंहू बुवाई का समय है। डीएपी की जरूरत है। अगर डीएपी नहीं मिली तो उनकी फसलें पिछैती हो जाएंगी।
एक खतौनी पर दिया जा रहा एनपीके का कट्टा
मीरगंज। बहुउद्देशीय साधन सहकारी समिति सहोड़ा पर डीएपी नहीं है। यहां केवल एनपीके और यूरिया है। यहां जो किसान सदस्य नहीं है। उनसे खतौनी की नकल लेकर प्रति एकड़ के हिसाब से एक कट्टा एनपीके खाद दी जा रही है।
- जिले में आलू की बुवाई हो चुकी है। उसी में डीएपी की ज्यादा मांग रहती है। अब गेहूं की बुवाई शुरू हो चुकी है। इसमें किसान एनपीके ज्यादा लगाता है। मंगलवार तक इसकी भी रैक पहुंच जाएगी। डीएपी भी उपलब्ध कराई जा रही है।
- ऋतृषा तिवारी, जिला कृषि अधिकारी
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