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सरकार कहती है सड़क बनाओ...126 करोड़ मांगे पर अब तक कुछ न दिया
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बदायूं का विकास भवन। फाइल फोटो
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। जिला योजना 2021-22 में शासन ने जिले को बजट देने में जमकर कंजूसी की। 452.95 करोड़ की जिला योजना के सापेक्ष बदायूं को 161.42 करोड़ ही मिल सके। सड़कों और पुलों के लिए 126.94 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए लेकिन लोक निर्माण विभाग बजट का इंतजार ही करता रहा। अभी तक एक पैसा न मिला। यही हाल प्राविधिक और माध्यमिक शिक्षा का रहा।
जिला योजना 2021-22 की प्रगति रिपोर्ट पर गौर करें तो करीब 20 ऐसे विभाग हैं, जो पूरे वित्तीय वर्ष बजट का इंतजार करते रहे। जिला योजना में लघु एवं सीमांत किसानों के कल्याण को 4.57 करोड़, निजी लघु सिंचाई के लिए 13.83 करोड़, राजकीय नलकूपों को 5.61 करोड़, अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत के लिए 50 लाख, खादी ग्रामोद्योग के लिए 2.50 लाख, समाज कल्याण सामान्य जाति के लिए 3.53 करोड़ और अल्पसंख्यक कल्याण के लिए 11 लाख के बजट का अनुमोदन किया गया था लेकिन इन विभागों को बजट मिला ही नहीं। ऐसे में काम भी लटक गए।
कई ऐसे विभाग भी रहे जिनको बजट जारी करने में कोई कोताही नहीं हुई। इन विभागों ने कोरोनाकाल में भी शत प्रतिशत बजट खर्च कर दिया। खर्च में अव्वल विभागों की बात करें तो ज्यादातर ग्रामीण विकास से जुड़े हैं। वित्तीय वर्ष 2021-22 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका अभियान के लिए 52.27 करोड़ अनुमोदन के सापेक्ष 25.51 करोड़ जारी किए गए। यहां शत प्रतिशत बजट खर्च कर लिया गया। पंचायती राज विभाग को 2.14 करोड़ के सापेक्ष 34.92 लाख मिले। यहां भी शत प्रतिशत बजट खर्च हो गया। ग्रामीण स्वच्छता अभियान पर 14.36 करोड़ के सापेक्ष 10.77 करोड़, ग्रामीण आवास पर 63.60 लाख के सापेक्ष 63.20 लाख का बजट खर्च किया गया।
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नगरीय पेयजल विभाग में सूखा
जिला योजना में नगरीय पेयजल के लिए 2.26 करोड़ और पर्यावरण संरक्षण के लिए जिला योजना में चार लाख का बजट स्वीकृत किया गया था। वर्ष 2021-22 में जिला योजना के तहत इन मदों में बजट ही नहीं मिला। खेल-कूद विभाग ने 31 लाख, सहकारिता ने 2.93 करोड़ की मांग की थी, जो नहीं मिला। इसके अलावा सेवायोजन, शिल्पकार प्रशिक्षण, प्राविधिक शिक्षा के लिए भी इस बार जिला योजना के तहत बजट जारी नहीं हो सका। पर्यटन विकास के लिए जिला योजना के तहत 50 लाख स्वीकृत किए गए थे लेकिन इस मद में भी बजट जारी नहीं हो सका।
कोरोनाकाल में मनरेगा खर्च में सबसे आगे
जिला योजना में मनरेगा की बात करें तो इस पर कोराना काल का कोई असर दिखा ही नहीं। मनरेगा के तहत 2020-21 में 127.46 और 2021-22 में 28.17 करोड़ खर्च किए गए। यह दोनों वित्तीय वर्ष कोरोना संक्रमण के रहे। 2020-21 में पहली और 2021-22 में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान भी गांवों में मनरेगा के तहत जॉब कार्ड धारकों को खूब रोजगार दिया गया।
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जिला योजना के तहत जिन विभागों ने धनराशि की मांग की थी, उनमें से किन विभागों को धनराशि नहीं मिली है, इसको दिखवाते हैं। इसे भी पता कराएंगे कि क्या वजह रही कि इन विभागों को धनराशि नहीं मिल सकी।
-ऋषिराज, सीडीओ
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जिला योजना 2021-22 की प्रगति रिपोर्ट पर गौर करें तो करीब 20 ऐसे विभाग हैं, जो पूरे वित्तीय वर्ष बजट का इंतजार करते रहे। जिला योजना में लघु एवं सीमांत किसानों के कल्याण को 4.57 करोड़, निजी लघु सिंचाई के लिए 13.83 करोड़, राजकीय नलकूपों को 5.61 करोड़, अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत के लिए 50 लाख, खादी ग्रामोद्योग के लिए 2.50 लाख, समाज कल्याण सामान्य जाति के लिए 3.53 करोड़ और अल्पसंख्यक कल्याण के लिए 11 लाख के बजट का अनुमोदन किया गया था लेकिन इन विभागों को बजट मिला ही नहीं। ऐसे में काम भी लटक गए।
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कई ऐसे विभाग भी रहे जिनको बजट जारी करने में कोई कोताही नहीं हुई। इन विभागों ने कोरोनाकाल में भी शत प्रतिशत बजट खर्च कर दिया। खर्च में अव्वल विभागों की बात करें तो ज्यादातर ग्रामीण विकास से जुड़े हैं। वित्तीय वर्ष 2021-22 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका अभियान के लिए 52.27 करोड़ अनुमोदन के सापेक्ष 25.51 करोड़ जारी किए गए। यहां शत प्रतिशत बजट खर्च कर लिया गया। पंचायती राज विभाग को 2.14 करोड़ के सापेक्ष 34.92 लाख मिले। यहां भी शत प्रतिशत बजट खर्च हो गया। ग्रामीण स्वच्छता अभियान पर 14.36 करोड़ के सापेक्ष 10.77 करोड़, ग्रामीण आवास पर 63.60 लाख के सापेक्ष 63.20 लाख का बजट खर्च किया गया।
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नगरीय पेयजल विभाग में सूखा
जिला योजना में नगरीय पेयजल के लिए 2.26 करोड़ और पर्यावरण संरक्षण के लिए जिला योजना में चार लाख का बजट स्वीकृत किया गया था। वर्ष 2021-22 में जिला योजना के तहत इन मदों में बजट ही नहीं मिला। खेल-कूद विभाग ने 31 लाख, सहकारिता ने 2.93 करोड़ की मांग की थी, जो नहीं मिला। इसके अलावा सेवायोजन, शिल्पकार प्रशिक्षण, प्राविधिक शिक्षा के लिए भी इस बार जिला योजना के तहत बजट जारी नहीं हो सका। पर्यटन विकास के लिए जिला योजना के तहत 50 लाख स्वीकृत किए गए थे लेकिन इस मद में भी बजट जारी नहीं हो सका।
कोरोनाकाल में मनरेगा खर्च में सबसे आगे
जिला योजना में मनरेगा की बात करें तो इस पर कोराना काल का कोई असर दिखा ही नहीं। मनरेगा के तहत 2020-21 में 127.46 और 2021-22 में 28.17 करोड़ खर्च किए गए। यह दोनों वित्तीय वर्ष कोरोना संक्रमण के रहे। 2020-21 में पहली और 2021-22 में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान भी गांवों में मनरेगा के तहत जॉब कार्ड धारकों को खूब रोजगार दिया गया।
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जिला योजना के तहत जिन विभागों ने धनराशि की मांग की थी, उनमें से किन विभागों को धनराशि नहीं मिली है, इसको दिखवाते हैं। इसे भी पता कराएंगे कि क्या वजह रही कि इन विभागों को धनराशि नहीं मिल सकी।
-ऋषिराज, सीडीओ