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मां की याद में कार बेचकर कान्वेंट सरीखा बना दिया सरकारी स्कूल
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शाहजहांपुर। शिक्षक मां के निधन के बाद बेटे ने उनका ख्वाब पूरा किया। निजी खर्च से सरकारी स्कूल का जीर्णोद्धार कराने के साथ ही शिक्षा का स्तर इतना ऊंचा किया कि लोग निजी स्कूलों से नाम कटवाकर अपने बच्चों को इस स्कूल में भेजने लगे।
बेसिक शिक्षा विभाग में हेडमास्टर अभिषेक दीक्षित की मां सर्वेश कुमारी जूनियर हाईस्कूल में साइंस टीचर थीं। अभिषेक बताते हैं कि जब वह हाईस्कूल में पढ़ते थे तो मां सर्वेश कुमारी का निधन हो गया था। मां स्कूल की अच्छी व्यवस्था को लेकर बहुत जागरूक रहतीं थीं। 2006 में जब वह मां के स्थान पर बेसिक विभाग में अध्यापक बने तो मां की सीख और सपना उनकी आंखों में भी था। मां की स्मृति में जिन स्कूलों में वह रहे, वहां बेहतर व्यवस्थाओं के लिए समर्पित रहे।
2015 में बतौर हेडमास्टर जब उनकी तैनाती मिर्जापुर के हरियानगला गांव में हुई तो उन्होंने गहराई में बने विद्यालय में कई ट्रॉली मिट्टी डलवाकर उसे लेवल में लाए। इसके बाद 2016 को उनकी नियुक्ति भावलखेड़ा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय जमालपुर में हो गई। नियुक्ति के वक्त स्कूल में सिर्फ एक शिक्षामित्र और 25-30 बच्चे थे। स्कूल जर्जर हालत में था। बेसिक विभाग के कागजों में स्कूल सबसे खराब स्कूलों में दर्ज था। उन्होंने स्कूल के जीर्णोद्धार के लिए अपनी वैगन-आर कार भी बेच दी और मां के ख्वाब को पूरा करने के लिए जुट गए।
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हर कक्षा में दो-दो पंखे, सीएफएल लगवाने के साथ ही पूरे स्कूल का विद्युतीकरण कराया। स्कूल के बच्चों के लिए फर्नीचर की व्यवस्था कराई। बच्चों के लिए कॉपी-किताब के अलावा अन्य क्रिया-कलापों के लिए जरूरी संसाधन भी जुटाए। एक साल की मेहनत का सिला मिला कि सबसे खराब स्कूलों में शुमार स्कूल सबसे अच्छे स्कूलों में गिना जाने लगा। आज इस स्कूल में दो सौ से ज्यादा बच्चे हैं। हेडमास्टर के अलावा तीन शिक्षक और एक शिक्षामित्र कार्यरत हैं। अभिषेक कहते हैं कि शिक्षा के प्रति मां की प्रेरणा से ही वह यह सब करने में सक्षम हो पाए। जब अपने स्कूल को बेहतर हालत में देखते हैं तो लगता है कि स्कूल मां का स्मृतिखंड है। यही मेरी मां के लिए मेरी ओर से श्रद्धांजलि है।
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स्टाफ के प्रयास से प्राथमिक विद्यालय जमालपुर का कायाकल्प हुआ है। ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान भी स्कूल के बच्चों ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया है। स्कूल के हेडमास्टर अभिषेक दीक्षित का विशेष योगदान है जिन्होंने स्कूल के नवीनीकरण और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने का काफी प्रयास किया है। स्कूल की जितनी तारीफ की जाए कम है।
-ईश्वरकांत मिश्रा, खंड शिक्षा अधिकारी, भावलखेड़ा
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बेसिक शिक्षा विभाग में हेडमास्टर अभिषेक दीक्षित की मां सर्वेश कुमारी जूनियर हाईस्कूल में साइंस टीचर थीं। अभिषेक बताते हैं कि जब वह हाईस्कूल में पढ़ते थे तो मां सर्वेश कुमारी का निधन हो गया था। मां स्कूल की अच्छी व्यवस्था को लेकर बहुत जागरूक रहतीं थीं। 2006 में जब वह मां के स्थान पर बेसिक विभाग में अध्यापक बने तो मां की सीख और सपना उनकी आंखों में भी था। मां की स्मृति में जिन स्कूलों में वह रहे, वहां बेहतर व्यवस्थाओं के लिए समर्पित रहे।
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2015 में बतौर हेडमास्टर जब उनकी तैनाती मिर्जापुर के हरियानगला गांव में हुई तो उन्होंने गहराई में बने विद्यालय में कई ट्रॉली मिट्टी डलवाकर उसे लेवल में लाए। इसके बाद 2016 को उनकी नियुक्ति भावलखेड़ा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय जमालपुर में हो गई। नियुक्ति के वक्त स्कूल में सिर्फ एक शिक्षामित्र और 25-30 बच्चे थे। स्कूल जर्जर हालत में था। बेसिक विभाग के कागजों में स्कूल सबसे खराब स्कूलों में दर्ज था। उन्होंने स्कूल के जीर्णोद्धार के लिए अपनी वैगन-आर कार भी बेच दी और मां के ख्वाब को पूरा करने के लिए जुट गए।
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हर कक्षा में दो-दो पंखे, सीएफएल लगवाने के साथ ही पूरे स्कूल का विद्युतीकरण कराया। स्कूल के बच्चों के लिए फर्नीचर की व्यवस्था कराई। बच्चों के लिए कॉपी-किताब के अलावा अन्य क्रिया-कलापों के लिए जरूरी संसाधन भी जुटाए। एक साल की मेहनत का सिला मिला कि सबसे खराब स्कूलों में शुमार स्कूल सबसे अच्छे स्कूलों में गिना जाने लगा। आज इस स्कूल में दो सौ से ज्यादा बच्चे हैं। हेडमास्टर के अलावा तीन शिक्षक और एक शिक्षामित्र कार्यरत हैं। अभिषेक कहते हैं कि शिक्षा के प्रति मां की प्रेरणा से ही वह यह सब करने में सक्षम हो पाए। जब अपने स्कूल को बेहतर हालत में देखते हैं तो लगता है कि स्कूल मां का स्मृतिखंड है। यही मेरी मां के लिए मेरी ओर से श्रद्धांजलि है।
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स्टाफ के प्रयास से प्राथमिक विद्यालय जमालपुर का कायाकल्प हुआ है। ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान भी स्कूल के बच्चों ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया है। स्कूल के हेडमास्टर अभिषेक दीक्षित का विशेष योगदान है जिन्होंने स्कूल के नवीनीकरण और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने का काफी प्रयास किया है। स्कूल की जितनी तारीफ की जाए कम है।
-ईश्वरकांत मिश्रा, खंड शिक्षा अधिकारी, भावलखेड़ा