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रुहलेखंड यूनिवर्सिटी जमीन के बैनामे फर्जी, रद्द होंगे
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बरेली। रुहेलखंड यूनिवर्सिटी की जमीन को जालसाजी कर अपने नाम कराने वाले सात खातेदारों के बैनामा निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एसडीएम ने गैरकृषि घोषित इस भूमि को फिर से खेतिहर भूमि में परिवर्तित कर दिया है। साथ ही सातों खातेदारों के साथ यूनिवर्सिटी प्रशासन को फिर से नोटिस दिया है कि इस भूमि को किस आधार पर गैरकृषि घोषित कराया गया। एसडीएम का कहना है कि विवादित जमीन के कृषि भूमि हो जाने से अब इस प्रकरण की सुनवाई उनके कोर्ट में हो सकती है।
यूनिवर्सिटी की हरूनगला स्थित जमीन पर कब्जा कर सात लोगों ने राजस्व कर्मियों से सांठगांठ से उसकी मिल्कियत अपने नाम दर्ज करा ली। बाद में फर्जी कागजों से बैंक से इस जमीन पर लोन भी ले लिया। इस प्रकरण की जांच में तहसीलदार सदर को पता चला था कि खसरा नंबर-32 पर करीब दो बीघा जमीन 1377-1379 फसली के खाता नंबर 158 पर खातेदार बिहारी और उनके दो बेटों के नाम दर्ज थी। इसके बाद यह जमीन रुहेलखंड यूनिवर्सिटी के नाम दर्ज हो गई। हाल ही में जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत की गई कि जिस जमीन को यूनिवर्सिटी के लिए अधिग्रहीत किया गया था, उसे अब कुछ और लोगों ने अपने नाम दर्ज कराकर उस पर कब्जा भी कर लिया है। जांच अधिकारी तहसीलदार आशुतोष गुप्ता ने विश्वविद्यालय प्रशासन को नोटिस दिया था लेकिन उसका पक्ष नहीं आया। खातेदारों ने भी स्थिति स्पष्ट नहीं की है। इस पर एसडीएम सदर ईशान प्रताप सिंह ने इस गैरकृषि भूमि को फिर से कृषि भूमि घोषित कर दिया है। इससे इस भूमि के बैनामा निरस्त हो जाएंगे। साथ ही एसडीएम की तरफ से सातों खातेदारों और विश्वविद्यालय प्रशासन को फिर से नोटिस देते हुए यह रिकॉर्ड मांगा गया है कि इस कृषि भूमि को किस आधार पर गैरकृषि भूमि में परिवर्तित कराया गया था।
विश्वविद्यालय की विवादित जमीन को गैरकृषि से फिर कृषि भूमि घोषित कर दिया गया है। इससे इस प्रकरण की सुनवाई मेरे कोर्ट में हो सकेगी। साथ ही इस जमीन का बैनामा कराने वाले सभी खातेदारों और विश्वविद्यालय प्रशासन को भी नोटिस दिया गया है। -ईशान प्रताप सिंह, उपजिलाधिकारी सदर
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यूनिवर्सिटी की हरूनगला स्थित जमीन पर कब्जा कर सात लोगों ने राजस्व कर्मियों से सांठगांठ से उसकी मिल्कियत अपने नाम दर्ज करा ली। बाद में फर्जी कागजों से बैंक से इस जमीन पर लोन भी ले लिया। इस प्रकरण की जांच में तहसीलदार सदर को पता चला था कि खसरा नंबर-32 पर करीब दो बीघा जमीन 1377-1379 फसली के खाता नंबर 158 पर खातेदार बिहारी और उनके दो बेटों के नाम दर्ज थी। इसके बाद यह जमीन रुहेलखंड यूनिवर्सिटी के नाम दर्ज हो गई। हाल ही में जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत की गई कि जिस जमीन को यूनिवर्सिटी के लिए अधिग्रहीत किया गया था, उसे अब कुछ और लोगों ने अपने नाम दर्ज कराकर उस पर कब्जा भी कर लिया है। जांच अधिकारी तहसीलदार आशुतोष गुप्ता ने विश्वविद्यालय प्रशासन को नोटिस दिया था लेकिन उसका पक्ष नहीं आया। खातेदारों ने भी स्थिति स्पष्ट नहीं की है। इस पर एसडीएम सदर ईशान प्रताप सिंह ने इस गैरकृषि भूमि को फिर से कृषि भूमि घोषित कर दिया है। इससे इस भूमि के बैनामा निरस्त हो जाएंगे। साथ ही एसडीएम की तरफ से सातों खातेदारों और विश्वविद्यालय प्रशासन को फिर से नोटिस देते हुए यह रिकॉर्ड मांगा गया है कि इस कृषि भूमि को किस आधार पर गैरकृषि भूमि में परिवर्तित कराया गया था।
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विश्वविद्यालय की विवादित जमीन को गैरकृषि से फिर कृषि भूमि घोषित कर दिया गया है। इससे इस प्रकरण की सुनवाई मेरे कोर्ट में हो सकेगी। साथ ही इस जमीन का बैनामा कराने वाले सभी खातेदारों और विश्वविद्यालय प्रशासन को भी नोटिस दिया गया है। -ईशान प्रताप सिंह, उपजिलाधिकारी सदर
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