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बेटियों की सुरक्षा को ढाल बन सकते हैं संस्कारित बेटे

Wed, 11 Dec 2019 02:12 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 11 Dec 2019 02:12 AM IST
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Civic Amenities
लखीमपुर खीरी। हैदराबाद और उन्नाव की घटनाओं के बाद समाज मे अपने को असुरक्षित महसूस कर रहीं बेटियों की ढाल बन सकते हैं संस्कारित बेटे। यह मत शहर के प्रबुद्ध वर्ग का है। उनका कहना है कि बेटा और बेटी एक समान का नारा दिया जाता है। मगर, बेटियों पर तमाम बंदिशें रहती हैं और बेटों को खुली छूट। छोटी उम्र में बेटे तमाम ऐसी गल्तियां करते हैं, यदि वह उनके बड़े होने पर हो जाएं तो घरवालों के लिए मुसीबत हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि बच्चों का अनुशासन में रखें। शिक्षकों का कहना है कि यदि बचपन से ही बच्चे को अच्छे संस्कार दिए जाएं तो वह बड़ा होकर देश और समाज के लिए उपयोगी साबित होगा।
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मां भी कभी बेटी होती है। इसलिए मां को चाहिए कि बेटों को ऐसे संस्कार दे कि वह बहन बेटियों का सम्मान करना सीखें। मां-बाप बेटों को अनुशासन में रखकर उनकी मॉनिटरिंग अवश्य करें।
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-लेखनी सेठ, प्रधानाचार्य
सिटी मांटेसरी इंटर कॉलेज

बच्चेे की पहली पाठशाला उसका घर है। मां बाप को चाहिए कि छोटे पर से ही बच्चों में बड़ो के साथ बहन बेटियों का सम्मान करना सिखाएं, जिससे बड़ा होकर वह उसका पालन करें। बच्चे को अकेला न छोड़ें और उसकी पढ़ाई के संबंध में कॉलेज टीचर से जानकारी लेते रहें।
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-डॉ. अखिलेश शुक्ला
मनोरोग चिकित्सक, जिला अस्पताल

छोटे पर ही बच्चों को अच्छे बुरे के बारे में सिखाएं। माता पिता को चाहिए कि घर का माहौल बेहतर रखें और अपने व्यवहार में संस्कार लाकर बच्चों को संस्कारी बनाएं।

-डॉ. मीनाक्षी, महिला अस्पताल

जिस तरह माता पिता बेटियों पर नजर रखते हैं। उसी तरह से बेटों की भी निगरानी करें तो बेटियों के साथ होने वाली घटनाएं रुक सकती हैं।
-कुमकुम सूर्यवंशी, छात्रा

सरकार को चाहिए कि बेटियों के साथ होने वाले अत्याचार के खिलाफ सख्त कानून बनाए, जिससे अपराधियों में खौफ हो और बेटियां सुरक्षित रह सकें।
-आम्रपाली शुक्ला, छात्रा

बेटियों तभी सुरक्षित होंगी। जब उनके गुनहगारों के लिए कठोर सजा का प्रावधान होगा। इसके लिए सरकार को सख्त कानून बनाना चाहिए
-अंजलि वर्मा, छात्रा

घरवालों को चाहिए कि बेटों को अच्छे संस्कार देकर महिलाओं का सम्मान करना सिखाएं। जिससे वह अपनी मां बहन की तरह दूसरी की भी इज्जत करें।
-निकिता सिंह राठौर, छात्रा

माता पिता को चाहिए कि घर में अनुशासन रखें। बेटी हो या बेटा इनकी मॉनिटरिंग अवश्य करें। बच्चों को क्या अच्छा है और क्या बुरा इसका ज्ञान जरूर कराएं।
-डॉ. सुुभाष चंद्रा
चीफ प्रॉक्टर, वाईडी कॉलेज

माताओं को चाहिए कि बेटों को ऐसी शिक्षा दें कि वह बहन बेटियों की इज्जत करें। पारिवारिक जीवन मूल्यों के विकास से ही घरेलू हिंसा, छेड़छाड, बलात्कार एवं प्रतिहिंसा को रोका जा सकता है।
-बीनारानी गुप्ता
प्रोफेसर आर्यकन्या डिग्री कॉलेज
 
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