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भूमाफिया फिर हावी! कई गांवों के भू रिकॉर्ड में पकड़ी खराबी
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बरेली। कई गांवों के भूमि संबंधी मानचित्र नष्ट हो जाने की वजह वहां जमीनों का कोई अता-पता नहीं लग पा रहा है। जमीनों के मालिकों को काफी मशक्कत के बाद भी यह जानकारी नहीं मिल पा रही है कि उनकी जमीन का गाटा नंबर क्या है और उसका क्षेत्रफल कितना है। चूंकि पहले फतेहगंज पूर्वी और नवाबगंज समेत जिले के तमाम हिस्सों में भूमाफिया रिकार्ड रूम के स्टाफ की सांठगांठ से खतौनियों में जालसाजी कर तमाम जमीनों पर कब्जे कर चुके हैं, लिहाजा मानचित्रों के नष्ट होने में भी भूमाफिया का हाथ होने का शक जताया जा रहा है। शासन के पास कई शिकायतें पहुंचने के बाद जिला प्रशासन से भू रिकार्ड का ब्योरा मांगा गया है।
भू-मानचित्रों को लेकर शासन में शिकायतें पहुंची हैं कि दूसरे कई जिलों के साथ यहां भी राजस्व अभिलेखागार में विभिन्न गांवों के जमीन का रिकार्ड नष्ट हो गया है। इससे तमाम जमीनों का गाटा नंबर और सीमा रेखाओं की तक ठीक जानकारी नहीं मिल पा रही है। आम लोग तो अपनी जमीनों की जानकारी लेने के लिए तहसीलों के चक्कर काट ही रहे हैं, इस गड़बड़ी से सरकारी काम भी प्रभावित हो रहे हैं। शासन ने पहले यह निर्देश दिए थे कि ऐसे मानचित्रों का ब्योरा राजस्व परिषद को उपलब्ध करा दिए जाए ताकि उसके पास उपलब्ध मानचित्र के आधार पर नए रिकार्ड राजस्व अभिलेखागार को उपलब्ध कराया जा सके लेकिन इस पर अब तक अमल नहीं हुआ है। इसी वजह से इस मामले में भूमाफिया की सांठगांठ होने का अंदेशा जताया जा रहा है।
अक्तूबर में भी राजस्व परिषद के आयुक्त की तरफ से डीएम को निर्देश जारी किए गए थे कि जिला और तहसील स्तर पर रिकार्ड रूम की जांच कराकर यह ब्योरा तैयार करा लिया जाए कि ऐसे कितने गांव हैं जहां भू मानचित्रों के नष्ट होने की वजह से दिक्कत पैदा हो रही है ताकि इस समस्या का कोई निदान तलाश किया जा सके लेकिन इस पर अमल नहीं हुआ। बता दें कि जिले में कलक्ट्रेट और तहसीलों के रिकॉर्ड रूम में खतौनियों में जालसाजी कर तमाम जमीनों पर कब्जा करने के कई मामले पिछले सालों में सामने आए थे। जांच में इनकी पुष्टि भी हुई, लेकिन प्रशासन के अफसरों ने आधी-अधूरी कार्रवाई कर इन मामलों को बंद कर दिया।
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जमीन संबंधी रिकार्ड की जांच जल्द ही कराकर शीघ्र ही उसकी शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। इस संबंध मातहतों को निर्देश दिए जाएंगे। -नितीश कुमार, डीएम
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भू-मानचित्रों को लेकर शासन में शिकायतें पहुंची हैं कि दूसरे कई जिलों के साथ यहां भी राजस्व अभिलेखागार में विभिन्न गांवों के जमीन का रिकार्ड नष्ट हो गया है। इससे तमाम जमीनों का गाटा नंबर और सीमा रेखाओं की तक ठीक जानकारी नहीं मिल पा रही है। आम लोग तो अपनी जमीनों की जानकारी लेने के लिए तहसीलों के चक्कर काट ही रहे हैं, इस गड़बड़ी से सरकारी काम भी प्रभावित हो रहे हैं। शासन ने पहले यह निर्देश दिए थे कि ऐसे मानचित्रों का ब्योरा राजस्व परिषद को उपलब्ध करा दिए जाए ताकि उसके पास उपलब्ध मानचित्र के आधार पर नए रिकार्ड राजस्व अभिलेखागार को उपलब्ध कराया जा सके लेकिन इस पर अब तक अमल नहीं हुआ है। इसी वजह से इस मामले में भूमाफिया की सांठगांठ होने का अंदेशा जताया जा रहा है।
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अक्तूबर में भी राजस्व परिषद के आयुक्त की तरफ से डीएम को निर्देश जारी किए गए थे कि जिला और तहसील स्तर पर रिकार्ड रूम की जांच कराकर यह ब्योरा तैयार करा लिया जाए कि ऐसे कितने गांव हैं जहां भू मानचित्रों के नष्ट होने की वजह से दिक्कत पैदा हो रही है ताकि इस समस्या का कोई निदान तलाश किया जा सके लेकिन इस पर अमल नहीं हुआ। बता दें कि जिले में कलक्ट्रेट और तहसीलों के रिकॉर्ड रूम में खतौनियों में जालसाजी कर तमाम जमीनों पर कब्जा करने के कई मामले पिछले सालों में सामने आए थे। जांच में इनकी पुष्टि भी हुई, लेकिन प्रशासन के अफसरों ने आधी-अधूरी कार्रवाई कर इन मामलों को बंद कर दिया।
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जमीन संबंधी रिकार्ड की जांच जल्द ही कराकर शीघ्र ही उसकी शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। इस संबंध मातहतों को निर्देश दिए जाएंगे। -नितीश कुमार, डीएम