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सलामत रहें बच्चे और परिवार, हम यहीं पर खुश

Tue, 22 Oct 2019 02:02 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 22 Oct 2019 02:02 AM IST
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Civic Amenities
बरेली। मां-बाप का दिल बच्चों के लिए कभी बद्दुआ नहीं देता, चाहे वे उन्हें कितने ही कष्ट क्यों न दें। यही वजह है कि परिवार में बच्चों से जब टकराव के हालात बने तो तमाम बुजुर्ग बेटे-बेटियों को छोड़कर वृद्धाश्रम में जा बसे। दिवाली का त्योहार नजदीक है और अब उन्हें भी अपनों की याद आ रही है। मगर तिरस्कार के डर से यहां वे खुशहाली से अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं और बच्चों को सलामती की दुआ दे रहे हैं।
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कांधरपुर स्थित वृद्धाश्रम में इस समय करीब सौ बुजुर्ग महिला-पुरुष रहते हैं। यहां भी इस समय दिवाली की तैयारी चल रही है और सब त्योहार की चर्चा कर अपनों को याद कर रहे हैं। कांधरपुर निवासी एक बुजुर्ग के पांच बेटे हैं और वह सबकुछ उनके नाम कर चुके हैं। बेटे उन्हें बोझ समझने लगे तो उन्होंने वृद्धाश्रम को अपना ठिकाना बना लिया। फालिज की बीमारी से पीड़ित गोविंद राम सहगल की एक बेटी है लेकिन वह करीब साल भर से वृद्धाश्रम में ही रहते हैं। तीन बेटियां होने के बावजूद नरेश चंद्र गुप्ता अपनी पत्नी के साथ वृद्धाश्रम में रहते हैं। यहां इस समय 56 महिलाएं और 64 पुरुष हैं। घरों में दिवाली की तैयारियां चल रही हैं लेकिन अपने से उपेक्षित इन बुजुर्ग के लिए अब वृद्धाश्रम ही उनका घर है और यहां रहने वाले लोग ही उनका परिवार हैं। सभी अपने बच्चों को याद कर रहे हैं लेकिन उनके दिए कष्ट भी याद हैं लेकिन उनका कहना है कि बच्चे खुश रहें। वे अपनी जिंदगी जी लेंगे। कांता गंगवार और रचना चौहान की टीम इनकी देखभाल में लगी है, जिन्हें यह बुुजुर्ग हर समय दुआ देते हैं।
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महिला जागृति मंच ने साझा की खुशियां
सोमवार को महिला जागृति मंच की अध्यक्ष डॉ. मनु नीरज अपनी टीम के साथ कांधरपुर स्थित इस वृद्धाश्रम पहुंचीं। उन्होंने बुजुर्गों से बातचीत की तो अपनों की याद में तमाम लोगों की आंखें छलक आईं। मगर किसी के मुंह से अपने बच्चों के लिए बद्दुआ नहीं निकला। डॉ. मनु नीरज ने बताया कि सबका यही कहना था कि बच्चे खुश रहें। वे नहीं चाहते कि उनकी वजह से परिवार में टकराव के हालात बनें, इसलिए वृद्धाश्रम को ही अपना ठिकाना बना लिया।
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