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पुलिस ने कब्रिस्तान से मांझे के अ़ड्डे हटाए कारीगर कलक्ट्रेट पहुंचकर गिड़गिड़ाए
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बरेली। वक्फ कमेटी की शिकायत पर बृहस्पतिवार को पुलिस ने हुसैन बाग स्थित कल्लू शाह का तकिया कब्रिस्तान में लगे तीन सौ से ज्यादा मांझा अड्डों को हटा दिया। इसके बाद कलक्ट्रेट पहुंचे मांझा कारीगरों ने डीएम के नाम ज्ञापन देकर गुहार लगाई कि अगर उनके अड्डे न चलने दिए गए तो उनके परिवार भूखे मर जाएंगे।
कलक्ट्रेट पहुंचे कारीगरों ने डीएम को संबोधित ज्ञापन एडीएम प्रशासन को सौंपा जिसमें उन्होंने कहा है कि कब्रिस्तान में लगभग तीन सौ परिवार काम करते हैं जिन्हें उजाड़ा जा रहा है। यह उनके साथ अन्याय है। इन कारीगरों के साथ पहुंचे तंजीम उलमा इस्लाम के महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने एडीएम को बताया कि मांझा कारीगर पिछले 25 सालों से कब्रिस्तान में काम कर रहे हैं। असल में यह जगह वक्फ कमेटी अंजुमन इस्लामिया की जगह है जिसे खाली कराने के लिए कमेटी की ओर से पुलिस को प्रार्थना पत्र दिया गया था। इस पर कार्रवाई करते हुए बृहस्पतिवार को पुलिस ने कब्रिस्तान से अड्डे हटवा दिए। साथ ही कब्रिस्तान की दीवार पर नोटिस भी चस्पा कर दिया है। इसके खिलाफ ज्ञापन देने वालों में मुहम्मद तसलीम खां, हाफिज मुजाहिद हुसैन, मुश्ताक अहमद, मुनक्का उस्ताद, फहीम भूरा, रहीम खान, सलीम अंसारी, फाजिल, इरफान अहमद आदि रहे।
कब्रिस्तान में कारोबार करना ठीक नहीं
अंजुमन इस्लामिया के सचिव मुमताज अख्तर का कहना है कि अड्डे कब्रिस्तान में लगे थे, जो मुनासिब नहीं है। काब्रिस्तान अदब की जगह है, यहां पर कारोबार करना ठीक नहीं। यह बात यहां पर काम करने वालों को खुद सोचनी चाहिए। तमाम जगह हैं वह कहीं भी अपने अड्डे लगा सकते हैं। इसके लिए कब्रिस्तान जैसी जगह उचित नहीं।
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कलक्ट्रेट पहुंचे कारीगरों ने डीएम को संबोधित ज्ञापन एडीएम प्रशासन को सौंपा जिसमें उन्होंने कहा है कि कब्रिस्तान में लगभग तीन सौ परिवार काम करते हैं जिन्हें उजाड़ा जा रहा है। यह उनके साथ अन्याय है। इन कारीगरों के साथ पहुंचे तंजीम उलमा इस्लाम के महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने एडीएम को बताया कि मांझा कारीगर पिछले 25 सालों से कब्रिस्तान में काम कर रहे हैं। असल में यह जगह वक्फ कमेटी अंजुमन इस्लामिया की जगह है जिसे खाली कराने के लिए कमेटी की ओर से पुलिस को प्रार्थना पत्र दिया गया था। इस पर कार्रवाई करते हुए बृहस्पतिवार को पुलिस ने कब्रिस्तान से अड्डे हटवा दिए। साथ ही कब्रिस्तान की दीवार पर नोटिस भी चस्पा कर दिया है। इसके खिलाफ ज्ञापन देने वालों में मुहम्मद तसलीम खां, हाफिज मुजाहिद हुसैन, मुश्ताक अहमद, मुनक्का उस्ताद, फहीम भूरा, रहीम खान, सलीम अंसारी, फाजिल, इरफान अहमद आदि रहे।
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कब्रिस्तान में कारोबार करना ठीक नहीं
अंजुमन इस्लामिया के सचिव मुमताज अख्तर का कहना है कि अड्डे कब्रिस्तान में लगे थे, जो मुनासिब नहीं है। काब्रिस्तान अदब की जगह है, यहां पर कारोबार करना ठीक नहीं। यह बात यहां पर काम करने वालों को खुद सोचनी चाहिए। तमाम जगह हैं वह कहीं भी अपने अड्डे लगा सकते हैं। इसके लिए कब्रिस्तान जैसी जगह उचित नहीं।
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