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रबर फैक्टरी की बेशकीमती जमीन बेचने की केंद्रीय मंत्री ने शुरू की पहल
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बरेली। केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने रबर फैक्टरी की बेशकीमती जमीन बेचकर उसके 14 सौ कर्मचारियों के बकाया के भुगतान के साथ यहां उद्योग लगाने के लिए एक बार फिर पहल की है। उन्होंने इस संबंध में कमिश्नर को चिट्ठी लिखकर इस दिशा में आगे बढ़ने को कहा ताकि कर्मचारियों का वेतन के साथ उनके 250 करोड़ रुपये के बकाया का भुगतान हो जाए और फैक्टरी की निष्प्रयोज्य जमीन पर नए उद्योगों को भी विकसित किया जा सके।
केंद्रीय मंत्री ने कमिश्नर को लिखी चिट्ठी में कहा है कि रबर फैक्टरी के बंद होने के बाद डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल (डीआरटी) मुंबई की ओर से एक रिसीवर नियुक्त कर फैक्टरी की चल-अचल संपत्ति के मूल्यांकन और उसे बेचने के लिए विज्ञापन प्रकाशित कराया गया था। रिसीवर की ओर से मूल्यांकन कराया गया तो इसके खिलाफ मैसर्स अलेमिस्ट दिल्ली ने मुंबई हाईकोर्ट में ऑफिशियल लिक्वेडेटर (ओएल) की नियुक्ति की मांग करते हुए वाद दायर किया गया था। केंद्रीय मंत्री का कहना है कि उन्हें पता चला है कि मुंबई हाईकोर्ट ने ओएल नियुक्त कर रिसीवर को सहयोग करने और फैक्टरी की संपत्ति को बेचने के लिए अधिकृत कर दिया था। इस संपत्ति के 14-15 लेनदार हैं, जिनमें एआरसी, एनबीएफसी बीमा कंपनी और कई बैंकर्स शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्री ने चिट्ठी में लिखा है कि फैक्टरी के 1400 कर्मचारियों का करीब ढाई सौ करोड़ का भुगतान अटका हुआ है। कर्मचारियों के भविष्य निधि का भुगतान भी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन अपने पास से दो बार कर चुका है। इसे देखते हुए फैक्टरी की संपत्ति के कई पक्षकार सामने आए हैं जिनमें ईपीएफओ, सिथेंटिक एंड केमिकल्स कर्मचारी यूनियन, स्थानीय प्रशासन व राज्य सरकार, डीआरटी मुंबई से नियुक्त रिसीवर और एलओ भी शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री ने रबर फैक्टरी की जमीन और बकायों के निस्तारण के लिए कमिश्नर को सभी पक्षकारों के साथ दिल्ली या बरेली में बैठक करने का सुझाव दिया है ताकि फैक्टरी की निष्प्रयोज्य भूमि को विकसित कर नए उद्योगों को लगाने की पहल स्थानीय प्रशासन स्तर पर शुरू की जा सके।
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केंद्रीय मंत्री ने कमिश्नर को लिखी चिट्ठी में कहा है कि रबर फैक्टरी के बंद होने के बाद डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल (डीआरटी) मुंबई की ओर से एक रिसीवर नियुक्त कर फैक्टरी की चल-अचल संपत्ति के मूल्यांकन और उसे बेचने के लिए विज्ञापन प्रकाशित कराया गया था। रिसीवर की ओर से मूल्यांकन कराया गया तो इसके खिलाफ मैसर्स अलेमिस्ट दिल्ली ने मुंबई हाईकोर्ट में ऑफिशियल लिक्वेडेटर (ओएल) की नियुक्ति की मांग करते हुए वाद दायर किया गया था। केंद्रीय मंत्री का कहना है कि उन्हें पता चला है कि मुंबई हाईकोर्ट ने ओएल नियुक्त कर रिसीवर को सहयोग करने और फैक्टरी की संपत्ति को बेचने के लिए अधिकृत कर दिया था। इस संपत्ति के 14-15 लेनदार हैं, जिनमें एआरसी, एनबीएफसी बीमा कंपनी और कई बैंकर्स शामिल हैं।
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केंद्रीय मंत्री ने चिट्ठी में लिखा है कि फैक्टरी के 1400 कर्मचारियों का करीब ढाई सौ करोड़ का भुगतान अटका हुआ है। कर्मचारियों के भविष्य निधि का भुगतान भी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन अपने पास से दो बार कर चुका है। इसे देखते हुए फैक्टरी की संपत्ति के कई पक्षकार सामने आए हैं जिनमें ईपीएफओ, सिथेंटिक एंड केमिकल्स कर्मचारी यूनियन, स्थानीय प्रशासन व राज्य सरकार, डीआरटी मुंबई से नियुक्त रिसीवर और एलओ भी शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री ने रबर फैक्टरी की जमीन और बकायों के निस्तारण के लिए कमिश्नर को सभी पक्षकारों के साथ दिल्ली या बरेली में बैठक करने का सुझाव दिया है ताकि फैक्टरी की निष्प्रयोज्य भूमि को विकसित कर नए उद्योगों को लगाने की पहल स्थानीय प्रशासन स्तर पर शुरू की जा सके।
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