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मोदी जी! गरीबों को आवास देने के नाम पर जेबें गर्म कर रहा सिस्टम
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बरेली। पीएम मोदी का सपना है कि 2022 तक सभी गरीबों के सिर पर पक्की छत हो, लेकिन सरकारी सिस्टम इसे पूरा कराने के बजाय अपनी जेबें गर्म करने में जुटा है। गरीबों को प्रधानमंत्री आवास देने के लिए सरकारी कर्मचारियों के साथ ही एक निजी कंपनी के स्टाफ को भी लगाया गया है, जबकि शिकायतें पहुंच रही हैं कि सर्वे और सूची में नाम दर्ज करने के लिए सुविधा शुल्क मांगा जा रहा है। लाभार्थियों की शिकायतों को दबाने की शिकायत की जा रही है। अब सीएम पोर्टल पर भी ऐसे मामलों की शिकायतें होनी शुरू हो गई हैं।
इस आवास योजना में तीन लाख रुपये से कम वार्षिक आय वाले ऐसे परिवारों को आवास की 2.50 लाख रुपये की धनराशि दी जानी है जिनके पास कम से कम 25 वर्गमीटर तक अपनी जमीन है। इसके लिए डूडा दफ्तर में फार्म जमा हो रहे हैं। इनका तहसीलों के माध्यम से सत्यापन कराया जा रहा है। सरकार की तरफ से एक निजी कंपनी के कर्मचारियों को भी इस काम में मदद के लिए रखा गया है। यहां डूडा में करीब इस कंपनी के 15 कर्मचारी हैं। लाभार्थियों के सर्वे और उनके फार्म के सत्यापन के साथ उसकी लिस्ट तैयार करके जियो टैगिंग के लिए लेखपालों के साथ निजी कंपनी के कर्मचारी भी साथ जा रहे हैं। ऐसी शिकायतें हो रही हैं कि आवास दिलाने के नाम पर कई लाभार्थियों के पांच से लेकर दस हजार रुपये तक सुविधा शुल्क मांगा जा रहा है। बताते हैं कि कई लोगों ने यह रकम दे भी दी है, लेकिन यह डिमांड पूरी न करने वाले कई लोग अफसरों से शिकायत भी कर रहे हैं, लेकिन इसकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। अफसर सिरे से नकार रहे हैं कि उनके पास ऐसे कोई मामले ही नहीं आ रहे हैं। इससे परेशान होकर लाभार्थियों ने सीएम पोर्टल पर शिकायतें करनी शुरू कर दी हैं। तहसील मीरगंज के शरीफनगर की रहने वाली हीना नाज ने यह शिकायत दर्ज कराई है कि प्रधानमंत्री आवास दिलाने के लिए उसने पैसा मांगा जा रहा है। डूडा पीडी शैलेंद्र भूषण का कहना है कि उनके पास ऐसी शिकायत नहीं आ रही है कि आवास के लिए किसी से पैसा मांगा जा रहा है। सीएम पोर्टल पर ऐसे मामले दर्ज हो रहे हैं तो उनका संज्ञान लिया जाएगा।
प्रधानमंत्री आवास पात्र गरीबों को दिया जाना है। अगर किसी से सुविधा शुल्क मांगा जा रहा है तो इस पर शिकंजा कसा जाएगा। सीएम पोर्टल पर आई शिकायत की जांच भी होगी।
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-वीरेंद्र कुमार सिंह, डीएम
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इस आवास योजना में तीन लाख रुपये से कम वार्षिक आय वाले ऐसे परिवारों को आवास की 2.50 लाख रुपये की धनराशि दी जानी है जिनके पास कम से कम 25 वर्गमीटर तक अपनी जमीन है। इसके लिए डूडा दफ्तर में फार्म जमा हो रहे हैं। इनका तहसीलों के माध्यम से सत्यापन कराया जा रहा है। सरकार की तरफ से एक निजी कंपनी के कर्मचारियों को भी इस काम में मदद के लिए रखा गया है। यहां डूडा में करीब इस कंपनी के 15 कर्मचारी हैं। लाभार्थियों के सर्वे और उनके फार्म के सत्यापन के साथ उसकी लिस्ट तैयार करके जियो टैगिंग के लिए लेखपालों के साथ निजी कंपनी के कर्मचारी भी साथ जा रहे हैं। ऐसी शिकायतें हो रही हैं कि आवास दिलाने के नाम पर कई लाभार्थियों के पांच से लेकर दस हजार रुपये तक सुविधा शुल्क मांगा जा रहा है। बताते हैं कि कई लोगों ने यह रकम दे भी दी है, लेकिन यह डिमांड पूरी न करने वाले कई लोग अफसरों से शिकायत भी कर रहे हैं, लेकिन इसकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। अफसर सिरे से नकार रहे हैं कि उनके पास ऐसे कोई मामले ही नहीं आ रहे हैं। इससे परेशान होकर लाभार्थियों ने सीएम पोर्टल पर शिकायतें करनी शुरू कर दी हैं। तहसील मीरगंज के शरीफनगर की रहने वाली हीना नाज ने यह शिकायत दर्ज कराई है कि प्रधानमंत्री आवास दिलाने के लिए उसने पैसा मांगा जा रहा है। डूडा पीडी शैलेंद्र भूषण का कहना है कि उनके पास ऐसी शिकायत नहीं आ रही है कि आवास के लिए किसी से पैसा मांगा जा रहा है। सीएम पोर्टल पर ऐसे मामले दर्ज हो रहे हैं तो उनका संज्ञान लिया जाएगा।
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प्रधानमंत्री आवास पात्र गरीबों को दिया जाना है। अगर किसी से सुविधा शुल्क मांगा जा रहा है तो इस पर शिकंजा कसा जाएगा। सीएम पोर्टल पर आई शिकायत की जांच भी होगी।
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-वीरेंद्र कुमार सिंह, डीएम