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मुस्लिमों की चिंता बढ़ी, ढूंढ रहे पैतृक संपत्तियों के दस्तावेज
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बरेली। नागरिकता संशोधन कानून बनने के बाद मुस्लिम समाज में एक बेचैनी का माहौल है। सभी जल्द से जल्द अपने प्रमाण बनवाने और दुरुस्त कराने में जुटे हैं। अपना शहर छोड़कर बाहर बस चुके लोगों में ज्यादा चिंता है। ऐसे ही कुछ लोग पैतृक शहर बरेली आकर अपनी कदीमी रिहाइश के कागज पूरे कराने में जुटे हैं। वहीं, वोटर कार्ड और आधार कार्ड में गड़बड़ी वाले लोग भी चिंता में हैं और इन्हें दुरुस्त कराने में लगे हैं।
नागरिकता संशोधन कानून के लगातार विरोध के बीच भले ही कुछ लोग अभी असमंजस में हों लेकिन तमाम लोग पूरी शिद्दत से अपने निवास और नागरिकता संबंधी सारे प्रमाण पत्र जुटाने में लगे हैं। पुराना शहर और किला क्षेत्र के मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में यह मुद्दा लगभग हर घर में चर्चा का विषय बना हुआ है। पुराना शहर के तो दो ऐसे भी मामले भी सामने आएं हैं, जिनमें बाहर रहने वाले लोग अपने पिता से पुश्तैनी रिहाइश के कागजात लेने पहुंचे हैं।
पुराना शहर के सूफी टोला निवासी मोहम्मद शाहिद आगरा जाकर बस चुके हैं और वहां कारोबार भी जमा लिया। यहां उनके 92 वर्षीय पिता मोहम्मद गालिब रहते हैं। मोहम्मद शाहिद भी पुश्तैनी रिहाइश का प्रमाण पत्र लेने शहर पहुंचे हैं। पिता ने उन्होंने बतौर प्रमाण उनका सर्विस रिकार्ड और पैतृक मकान के कागज लिए हैं। इसी तरह शाहजहांपुर की जीशान अंजुम भी अपने प्रमाण पत्र के लिए बरेली आईं। जीशान की शाहजहांपुर के सलीम खान से शादी हुई और वह अब वहीं रहती हैं। वह अपने सैलानी स्थित पैतृक निवास पर कदीमी रिहाइश के कागजात लेने पहुंची थीं।
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वोटर आईडी में गड़बड़ी ने बढ़ाई चिंता
शहर के तमाम इलाकों में लोग आधार कार्ड या वोटर आईडी की गड़बड़ियों को लेकर भी चिंतित हैं। किसी का नाम गलत है तो किसी के पिता का नाम गलत या पते में गड़बड़ी है। इसमें स्वालेह नगर की राबिया खान भी हैं, जिनके आधार कार्ड और पहचान पत्र दोनों में पता गलत है। जखीरा की रहीमा जहीर के पहचान पत्र में नाम गलत है। आजमनगर की कहकशां के आधार कार्ड में नाम गलत है और कोहाड़ापीर के वसी अहमद के आधार कार्ड में भी नाम गलत है। यह सभी लोग भागदौड़ कर जल्द से जल्द इन्हें दुरुस्त कराने के प्रयास में हैं।
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नागरिकता संशोधन कानून के लगातार विरोध के बीच भले ही कुछ लोग अभी असमंजस में हों लेकिन तमाम लोग पूरी शिद्दत से अपने निवास और नागरिकता संबंधी सारे प्रमाण पत्र जुटाने में लगे हैं। पुराना शहर और किला क्षेत्र के मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में यह मुद्दा लगभग हर घर में चर्चा का विषय बना हुआ है। पुराना शहर के तो दो ऐसे भी मामले भी सामने आएं हैं, जिनमें बाहर रहने वाले लोग अपने पिता से पुश्तैनी रिहाइश के कागजात लेने पहुंचे हैं।
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पुराना शहर के सूफी टोला निवासी मोहम्मद शाहिद आगरा जाकर बस चुके हैं और वहां कारोबार भी जमा लिया। यहां उनके 92 वर्षीय पिता मोहम्मद गालिब रहते हैं। मोहम्मद शाहिद भी पुश्तैनी रिहाइश का प्रमाण पत्र लेने शहर पहुंचे हैं। पिता ने उन्होंने बतौर प्रमाण उनका सर्विस रिकार्ड और पैतृक मकान के कागज लिए हैं। इसी तरह शाहजहांपुर की जीशान अंजुम भी अपने प्रमाण पत्र के लिए बरेली आईं। जीशान की शाहजहांपुर के सलीम खान से शादी हुई और वह अब वहीं रहती हैं। वह अपने सैलानी स्थित पैतृक निवास पर कदीमी रिहाइश के कागजात लेने पहुंची थीं।
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वोटर आईडी में गड़बड़ी ने बढ़ाई चिंता
शहर के तमाम इलाकों में लोग आधार कार्ड या वोटर आईडी की गड़बड़ियों को लेकर भी चिंतित हैं। किसी का नाम गलत है तो किसी के पिता का नाम गलत या पते में गड़बड़ी है। इसमें स्वालेह नगर की राबिया खान भी हैं, जिनके आधार कार्ड और पहचान पत्र दोनों में पता गलत है। जखीरा की रहीमा जहीर के पहचान पत्र में नाम गलत है। आजमनगर की कहकशां के आधार कार्ड में नाम गलत है और कोहाड़ापीर के वसी अहमद के आधार कार्ड में भी नाम गलत है। यह सभी लोग भागदौड़ कर जल्द से जल्द इन्हें दुरुस्त कराने के प्रयास में हैं।