{"_id":"5df7d9388ebc3e88173720df","slug":"civcamenities-bareilly-news-bly388281719","type":"story","status":"publish","title_hn":"कानून बनते ही शरणार्थियों को नागरिकता देने की प्रक्रिया शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कानून बनते ही शरणार्थियों को नागरिकता देने की प्रक्रिया शुरू
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। नागरिकता संशोधन कानून बनने के तीन दिन के ही अंदर देश में मौजूद शरणार्थियों को नागरिकता देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार ने प्रशासन से पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए उन गैरमुस्लिम शरणार्थियों की सूची मांगी है जो देश में 31 दिसंबर 2014 से पहले से रह रहे हैं। इस सूची के साथ सरकार को यह जानकारी भी दी जानी है कि इन लोगों ने भारतीय नागरिकता के लिए कलक्टर के समक्ष कब आवेदन किया और उनमें से कितने लोगों को नागरिकता मिली और कितने आवेदन अब तक किस कारण से लंबित हैं। प्रशासन ने एसएसपी के साथ जिले के सभी एसडीएम से प्राथमिकता के आधार पर यह सूचना देने को कहा है।
प्रशासन के सूत्रों के मुताबिक नागरिकता कानून में देश में पांच साल से ज्यादा समय से रह रहे शरणार्थियों को नागरिकता देने के लिए पात्र माना गया है। इसी लिहाज से 31 दिसंबर 2014 के पहले यहां आए शरणार्थियों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। पहले यह सीमा 11 वर्ष थी। प्रशासन को यह रिपोर्ट भी देनी है कि जिले में रह रहे शरणार्थियों में से कितने शरणार्थी नागरिकता के लिए आवेदन कर चुके हैं और कितने लोगों ने आवेदन नहीं किया है। जिन शरणार्थियों ने नागरिकता के लिए आवेदन किया है, उनके आवेदन की स्थिति क्या है। उन्हें अगर नागरिकता नहीं दी गई है तो इसकी क्या वजह है। इसके साथ 15 साल से ज्यादा समय से देश में रह रहे शरणार्थियों के बारे में अलग रिपोर्ट तैयार की जानी है। एडीएम सिटी महेंद्र कुमार सिंह ने डीएम नितीश कुमार के आदेश के बाद एसएसपी और सभी एसडीएम को शरणार्थियों के बारे में सरकार की ओर से मांगी गई रिपोर्ट प्राथमिकता के आधार पर तैयार करने को लिखा है।
कानून बनने के बाद खुफिया विभाग को किया अलर्ट
नागरिकता संशोधन कानून बनने के बाद असम और दिल्ली में बवाल को देखते हुए पूरे प्रदेश के साथ बरेली में भी अलर्ट घोषित कर दिया गया है। खुफिया विभाग को सतर्क रहते हुए लगातार हालात पर अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है। यह भी सूचना मांगी गई है कि कहीं माहौल खराब होने जैसी स्थिति तो नहीं है।
विज्ञापन
पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्घों समेत कई समुदाय के शरणार्थियों के बारे में सर्वे रिपोर्ट मांगी गई है। इसकी सूचनाएं एसएसपी और एसडीएम से संग्रहीत कराई जा रही हैं। -महेंद्र कुमार सिंह, एडीएम सिटी
विज्ञापन
प्रशासन के सूत्रों के मुताबिक नागरिकता कानून में देश में पांच साल से ज्यादा समय से रह रहे शरणार्थियों को नागरिकता देने के लिए पात्र माना गया है। इसी लिहाज से 31 दिसंबर 2014 के पहले यहां आए शरणार्थियों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। पहले यह सीमा 11 वर्ष थी। प्रशासन को यह रिपोर्ट भी देनी है कि जिले में रह रहे शरणार्थियों में से कितने शरणार्थी नागरिकता के लिए आवेदन कर चुके हैं और कितने लोगों ने आवेदन नहीं किया है। जिन शरणार्थियों ने नागरिकता के लिए आवेदन किया है, उनके आवेदन की स्थिति क्या है। उन्हें अगर नागरिकता नहीं दी गई है तो इसकी क्या वजह है। इसके साथ 15 साल से ज्यादा समय से देश में रह रहे शरणार्थियों के बारे में अलग रिपोर्ट तैयार की जानी है। एडीएम सिटी महेंद्र कुमार सिंह ने डीएम नितीश कुमार के आदेश के बाद एसएसपी और सभी एसडीएम को शरणार्थियों के बारे में सरकार की ओर से मांगी गई रिपोर्ट प्राथमिकता के आधार पर तैयार करने को लिखा है।
विज्ञापन
कानून बनने के बाद खुफिया विभाग को किया अलर्ट
नागरिकता संशोधन कानून बनने के बाद असम और दिल्ली में बवाल को देखते हुए पूरे प्रदेश के साथ बरेली में भी अलर्ट घोषित कर दिया गया है। खुफिया विभाग को सतर्क रहते हुए लगातार हालात पर अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है। यह भी सूचना मांगी गई है कि कहीं माहौल खराब होने जैसी स्थिति तो नहीं है।
विज्ञापन
पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्घों समेत कई समुदाय के शरणार्थियों के बारे में सर्वे रिपोर्ट मांगी गई है। इसकी सूचनाएं एसएसपी और एसडीएम से संग्रहीत कराई जा रही हैं। -महेंद्र कुमार सिंह, एडीएम सिटी