उलझन.. मुर्गे में प्याज डालें या प्याज में मुर्गा
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जायके की लत छोड़ने के बाद घरों की रसोई में तो बगैर प्याज भी काम चल जा रहा है लेकिन होटल चलाने वालों प्याज पर बढ़ी महंगाई से बचने का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है। वेज खाना खिलाने वाले होटलों ने तो सलाद में प्याज हटाने के साथ कुछ सब्जियां कम करके इससे मुक्ति पा ली है लेकिन नॉनवेज वाले होटल बुरी तरह फंस गए हैं। इन होटल वालों का कहना है कि प्याज का भाव मुर्गे से कुछ ही पीछे रह गया है। चिकन की डिश हो या मटन की, उनकी लागत डेढ़ गुना तक बढ़ गई है। लिहाजा समझ नहीं आ रहा कि कैसे काम चलाएं।
होटल वालों का कहना है कि चिकन और मटन की ग्रेवी प्याज पर निर्भर करती है। एक कुंतल प्याज भुनकर बमुश्किल सात किलो रह जाता है। जब तक प्याज को डिश में भरपूर मात्रा में न मिलाया जाए, उसका स्वाद नहीं उभरता। डिश जब ग्राहक के पास जाती है तो वह भी प्याज की मांग करता है। अगर न दो तो कारोबार प्रभावित होता है। इसके अलावा चिकन में इस्तेमाल की जाने वाली सफेद इलायची साल भर पहले 800 रुपये किलो थी, वह भी अब चार हजार रुपये किलो हो गई है।
सर्दी का मौसम और प्याज की पकौड़ी के लाले
पकौड़ियों से भी प्याज गायब हो चुकी है। बाजार जाएं तो ज्यादातर दुकानों पर आलू, गोभी या मिर्च की ही पकौड़ी मिलेगी। प्याज की पकौड़ी बहुत कम दुकानदार ही बना रहे हैं जबकि अधिकांश लोग प्याज की पकौड़ियां ही पसंद करते हैं। इन दुकानदारों का भी कहना है कि प्याज की पकौड़ी में मुनाफा नहीं आ रहा है। सस्ता प्याज लगाने से दुकानदारी खतरे में पड़ती है।
जितना कारोबार होता है, उसका आधा पैसा तो प्याज में चला जाता है। चिकन की डिश में इस्तेमाल होने वाली सफेद इलायची भी साल भर में चार गुना महंगी हो चुकी है। लिहाजा मुनाफा आधा भी नहीं रह गया है। - मोहम्मद शादाब, होटल मालिक
महंगाई की वजह से प्याज कम ला रहे थे लेकिन इससे खानेे की लज्जत गायब हो गई। मुर्गा हो या मछली, ग्राहक को खाने में सलाद के तौर पर भी प्याज जरूर चाहिए। फिलहाल कुछ दिनों के लिए होटल बंद कर दिया है। - सिरोज सैफ कुरैशी, होटल मालिक