बच्चों का रखें विशेष ख्याल: जुकाम न बुखार... टायफाइड की चपेट में आ रहे मासूम; आईफ्लू का भी बढ़ रहा प्रकोप
जिला अस्पताल की ओपीडी में बुखार की चपेट में आने वाले बच्चों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। दस दिनों में बुखार से पीड़ित 145 बच्चों का इलाज किया जा चुका है। इसमें 55 बच्चे ऐसे रहे जिनमें बुखार के लक्षण नहीं थे।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
तापमान में उतार-चढ़ाव के चलते अब बच्चे टायफाइड की चपेट में आ रहे हैं। बगैर बुखार के ही टायफाइड की विडाल टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आने से डॉक्टर भी हैरान हैं। उन्होंने साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया के म्यूटेशन की आशंका जताई है। अभिभावकों को मेडिकल स्टोर से दवा लेने के बजाय विशेषज्ञ चिकित्सकों से इलाज का सुझाव दिया है। लापरवाही से हालत बिगड़ने की आशंका जताई है।
बरेली के जिला अस्पताल की ओपीडी में बुखार की चपेट में आने वाले बच्चों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। दस दिनों में बुखार से पीड़ित 145 बच्चों का इलाज किया जा चुका है। इसमें 55 बच्चे ऐसे रहे जिनमें बुखार के लक्षण नहीं थे। वे उल्टी, जी मिचलाने, पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द और भूख न लगने की समस्या से ग्रसित थे। पेट संबंधी इंफेक्शन की आशंका में विडाल टेस्ट कराया गया तो रिपोर्ट पॉजिटिव मिली।
ये भी पढ़ें- धागे से गला घोंटकर बच्ची की हत्या: घरेलू झगड़े ने ली चार साल की मासूम की जान, मां के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज
एडी एसआईसी डॉ. अलका शर्मा के मुताबिक बगैर बुखार विडाल टेस्ट रिपोर्ट तीन वजह से पॉजिटिव होती है। पहला, पूर्व में टायफाइड की चपेट में रहने, दूसरा टीकाकरण और तीसरा टायफाइड होने की स्थिति है। साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया के म्यूटेशन की पुष्टि नहीं है, लेकिन आशंका से इनकार नहीं कर सकते।
ओपीडी में बुखार, आईफ्लू के मरीजों की संख्या दोगुनी
इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. राजेश अग्रवाल के मुताबिक बदलते मौसम की वजह से ओपीडी में बुखार, डायरिया, आईफ्लू के मरीजों की तादाद दोगुनी हो गई है। ज्यादातर मामले वायरल बुखार के हैं। कुछ में टायफाइड की भी पुष्टि हो रही है। मरीजों को दवाओं के साथ खानपान और साफ-सफाई का भी सुझाव दिया जा रहा है।
संक्रामक हैं ज्यादातर बीमारियां
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. सुदीप सरन के मुताबिक बारिश के मौसम में होने वाली ज्यादातर बीमारियां संक्रामक होती हैं। आईफ्लू, बुखार, डायरिया की चपेट में अगर कोई है तो उनके आसपास रहने या प्रयोग की गई सामग्री को छूने से अन्य सदस्य के भी संक्रमित होने की आशंका रहती है। अगर समय से इलाज मिले तो संक्रामक बीमारियों से तीन से पांच दिन में ही राहत मिल जाती है।
नेत्र रोग की ओपीडी में लगी कतार
बुधवार को तीन सौ बेड अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ की ओपीडी के बाहर मरीजों की कतार लगी रही। 87 मरीज आंख संबंधी बीमारियों के इलाज के लिए पहुंचे थे। इसमें से 37 मरीज आईफ्लू की चपेट में रहे। सीएमओ डॉ. बलवीर सिंह ने बताया कि आईफ्लू के मरीजों के लिए आईड्रॉप मेडिकल काॅर्पोरेशन से मिल गई हैं। उसे स्वास्थ्य केेंद्रों व अस्पतालों में भिजवा दिया गया है।
ये बरतें सावधानी
- शरीर समेत घर को भी साफ-सुथरा रखें।
- बच्चों को साफ कपड़े पहनाएं।
- बच्चों का नियमित टीकाकरण अनिवार्य है।
- खुले में रखे कटे फल, बासी भोजन न करें।
- पानी को उबालकर पिएं।
- मौसमी फल, सब्जियां और पौष्टिक आहार लें।
- देर रात में बुखार होने पर पैरासिटामॉल ले सकते हैं।
- बारिश में भीगने के बाद कपड़े बदलें। गीले कपड़ों में ज्यादा देर न रहें।