{"_id":"59ef98234f1c1bc8678b778f","slug":"chhath-s-apna-market","type":"story","status":"publish","title_hn":"छठ का है ‘अपना’ बाजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छठ का है ‘अपना’ बाजार
बरेली।
Updated Wed, 25 Oct 2017 01:14 AM IST
विज्ञापन
गेहूं िपपिसवाते लाोग
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
छठ का बाजार शुद्धता और पवित्रता के विश्वास पर टिका है। यही कारण है कि छठ पूजन की सामग्री सिर्फ पूर्वांचल के ही दुकानदारों से खरीदी जाती है। गेहूं खरीदने से लेकर उसकी पिसाई कराने तक के लिए छठ करने वालों की पसंद पूर्वांचल के ही लोग हैं। हालांकि दिलचस्प बात यह है कि यह अनाज देवचरा मंडी से खरीदकर लाया जाता है।
ठेकुआ, खरना और छठ का भोज बनाने के लिए लोग न्यूनतम पांच से दस किलो गेहूं और तीन से पांच किलो चावल खरीदते ही हैं। छठ पर यह मांग पूरी करने के लिए स्थानीय दुकानदार देवचरा मंडी से अनाज खरीदकर इसे इज्जतनगर की न्यू मॉडल कॉलोनी के बाजार में बेच रहे हैं। इसके अलावा शहर में बीआई बाजार, शहामतगंज आदि बाजारों में भी छठ के लिए गेहूं, चावल बेचा जा रहा है। नहाय खाय के लिए फलों की भी खरीदारी हुई। न्यू माडर्न रेलवे कॉलोनी, एयरफोर्स, डिफेंस कॉलोनी, डोरा मोड, चौपुला रेलवे कॉलोनी आदि इलाकों की फलों की दुकानों पर खूब भीड़ रही। चौपुला रोड पर दुकानदार रमेश श्रीवास्तव का कहना था कि छठ पूजन के लिए फल भी उन्हीं दुकानों से खरीदे जाते हैं जहां विश्वास जमा हुआ होता है। सूप, डलिया के दुकानदार विकास यह सामान बिहार से खरीदकर लाते हैं, जो खुद भी छपरा के रहने वाले हैं। खरना बनाने के लिए गन्ने का रस, घाट पर पूजन के लिए गन्ने की खरीद भी शुरू हो गई है।
गेहूं पिसाई के लिए कुछ खास चक्कियां
पूर्वांचल के होने के कारण कई आटा चक्की मालिकों की शहर भर में पहचान बन गई है। डिफेंस कॉलोनी के सामने विश्वकर्मा की चक्की और न्यू मॉडल कॉलोनी में एसपी सिंह की चक्की के बारे में शहर में रह रहे पूर्वांचल और बिहार के ज्यादातर लोगों को जानकारी है। दोनों ही चक्कियों पर नहाय खाय के दिन से अगले तीन दिन तक छठ में प्रयोग होने वाला गेहूं ही पीसा जाता है। विश्वकर्मा चक्की पर तो पीलीभीत तक के लोग अपना गेहूं लाकर पिसवाते हैं।
ठेकुआ, खरना और छठ का भोज बनाने के लिए लोग न्यूनतम पांच से दस किलो गेहूं और तीन से पांच किलो चावल खरीदते ही हैं। छठ पर यह मांग पूरी करने के लिए स्थानीय दुकानदार देवचरा मंडी से अनाज खरीदकर इसे इज्जतनगर की न्यू मॉडल कॉलोनी के बाजार में बेच रहे हैं। इसके अलावा शहर में बीआई बाजार, शहामतगंज आदि बाजारों में भी छठ के लिए गेहूं, चावल बेचा जा रहा है। नहाय खाय के लिए फलों की भी खरीदारी हुई। न्यू माडर्न रेलवे कॉलोनी, एयरफोर्स, डिफेंस कॉलोनी, डोरा मोड, चौपुला रेलवे कॉलोनी आदि इलाकों की फलों की दुकानों पर खूब भीड़ रही। चौपुला रोड पर दुकानदार रमेश श्रीवास्तव का कहना था कि छठ पूजन के लिए फल भी उन्हीं दुकानों से खरीदे जाते हैं जहां विश्वास जमा हुआ होता है। सूप, डलिया के दुकानदार विकास यह सामान बिहार से खरीदकर लाते हैं, जो खुद भी छपरा के रहने वाले हैं। खरना बनाने के लिए गन्ने का रस, घाट पर पूजन के लिए गन्ने की खरीद भी शुरू हो गई है।
विज्ञापन
गेहूं पिसाई के लिए कुछ खास चक्कियां
पूर्वांचल के होने के कारण कई आटा चक्की मालिकों की शहर भर में पहचान बन गई है। डिफेंस कॉलोनी के सामने विश्वकर्मा की चक्की और न्यू मॉडल कॉलोनी में एसपी सिंह की चक्की के बारे में शहर में रह रहे पूर्वांचल और बिहार के ज्यादातर लोगों को जानकारी है। दोनों ही चक्कियों पर नहाय खाय के दिन से अगले तीन दिन तक छठ में प्रयोग होने वाला गेहूं ही पीसा जाता है। विश्वकर्मा चक्की पर तो पीलीभीत तक के लोग अपना गेहूं लाकर पिसवाते हैं।
विज्ञापन