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छठ पूजाः डूबते सूर्य को दिया अर्घ्य, आज उगते सूर्य की होगी उपासना
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छठ पूजा करने जातीं महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
महिलाओं ने घुटने तक पानी में खड़े होकर दिया सूर्य को जल
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बरेली। महापर्व छठ के तीसरे दिन व्रती महिलाओं ने घुटनों तक पानी में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। इस दौरान छठ के गीत गाकर महिलाओं ने आराधना की। शनिवार सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इसी के साथ सूर्योपासना का ये महापर्व संपन्न हो जाएगा।
यूनिवर्सिटी कैंपस में सूर्यास्त से पहले परंपरागत रूप से अर्घ्य अर्पित किया गया। व्रती निहारिका ने बताया कि शनिवार सुबह वह लोग यहीं मंदिर प्रांगण में इकठ्ठा होंगे। हाथों में फल रखकर भगवान सूर्य का स्मरण करेंगे। उदय होने के साथ ही सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया जाएगा। ऐसी मान्यता है कि डूबते और उगते हुए सूर्य का पूजन करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। व्रती किरण ने बताया कि चौथे दिन यानि शनिवार को व्रती वहीं पुन: वहीं इकट्ठा होंगे जहां शाम को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया था। सूर्य भगवान को जल चढ़ाने के बाद व्रती कच्चे दूध का शरबत पीकर और प्रसाद खाकर व्रत पूर्ण करेंगी। छठ पूजा समिति सदस्य देवेंद्र कुमार ने बताया कि धर्म से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, शाम के दौरान सूर्य अपनी पत्नी प्रत्यूषा के साथ रहते हैं। ऐसे में छठ पूजा में शाम के समय सूर्य की अंतिम किरण प्रत्यूषा को अर्घ्य देकर उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। ऐसी मान्यता है कि व्रतधारी महिलाओं को इससे दोहरा लाभ मिलता है। वहीं, छठ पूजा के दौरान सामाजिक दूरी का पालन नहीं हो सका। छोटे से कुंड में कई महिलाओं ने एक साथ अर्घ्य दिया। व्यवस्थापक देवेंद्र कुमार ने बताया कि जितना संभव हो सका एहतियात बरती गई।
यूनिवर्सिटी कैंपस में सूर्यास्त से पहले परंपरागत रूप से अर्घ्य अर्पित किया गया। व्रती निहारिका ने बताया कि शनिवार सुबह वह लोग यहीं मंदिर प्रांगण में इकठ्ठा होंगे। हाथों में फल रखकर भगवान सूर्य का स्मरण करेंगे। उदय होने के साथ ही सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया जाएगा। ऐसी मान्यता है कि डूबते और उगते हुए सूर्य का पूजन करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। व्रती किरण ने बताया कि चौथे दिन यानि शनिवार को व्रती वहीं पुन: वहीं इकट्ठा होंगे जहां शाम को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया था। सूर्य भगवान को जल चढ़ाने के बाद व्रती कच्चे दूध का शरबत पीकर और प्रसाद खाकर व्रत पूर्ण करेंगी। छठ पूजा समिति सदस्य देवेंद्र कुमार ने बताया कि धर्म से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, शाम के दौरान सूर्य अपनी पत्नी प्रत्यूषा के साथ रहते हैं। ऐसे में छठ पूजा में शाम के समय सूर्य की अंतिम किरण प्रत्यूषा को अर्घ्य देकर उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। ऐसी मान्यता है कि व्रतधारी महिलाओं को इससे दोहरा लाभ मिलता है। वहीं, छठ पूजा के दौरान सामाजिक दूरी का पालन नहीं हो सका। छोटे से कुंड में कई महिलाओं ने एक साथ अर्घ्य दिया। व्यवस्थापक देवेंद्र कुमार ने बताया कि जितना संभव हो सका एहतियात बरती गई।
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