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अव्यवस्था : रैन बसेरा बना लॉन्ड्री, टिनशेड में तीमारदार
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बरेली। महिला अस्पताल में मरीजों के तीमारदार के लिए रैन बसेरा बनाया गया। ताकि वह रात गुजार सकें, लेकिन यहां पर लॉन्ड्री संचालित की जा रही है। दूसरे तल पर बने कक्ष में ताला लगा हुआ है। इमरजेंसी के पास टीन शेड में एक कूलर के भरोसे फर्श और तख्त पर तीमारदार दिन-रात गुजार रहे हैं।
महिला चिकित्सालय में दो तल का रैन बसेरा करीब छह वर्ष पूर्व बना था। ताकि गर्भवती के भर्ती होने से लेकर प्रसव के बाद डिस्चार्ज होने तक करीब पांच से सात दिन तक वे ठहर सकें। हालांकि, इस रैन बसेरे का पता तीमारदारों को नहीं बताया जाता। परिसर में एक जगह रैन बसेरे तक पहुंचने के लिए पर्चा चस्पा किया गया है। जो आसानी से नजर नहीं आता। वहीं, रैन बसेरा में लॉन्ड्री कर्मचारी डॉक्टरों के एप्रेन, भर्ती होने वाली गर्भवतियों को दिए जा रहे चादर, ऑपरेशन एप्रेन, कंबल, तकिए का कवर आदि धोने के बाद सुखा रहे हैं। जिन्हें इस्त्री के बाद यहीं रखा जाता है। ब्यूरो
टूटे दरवाजे, पड़ी शराब की बोतलें
अमर उजाला की टीम ने रैन बसेरे का जायजा लिया तो ग्राउंड फ्लोर के हॉल में दीवारों में कीलें ठोंककर तार खींचकर कपड़े सुखाए जा रहे थे। बेड पर सूखे हुए कपड़े रखे थे। एक कर्मी कपड़े इस्त्री कर रहा था। शौचालय के दरवाजे, कमोड, टूटे मिले। सीढ़ी पर धूल की पर्त जमी थी। शराब की बोतलें पड़ी हुई थीं। दूसरे तल पर बने कक्ष में ताला था। इसमें लगी जंग बता रही थी कि वर्षों से यहां का ताला खुला ही नहीं।
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तीमारदार बोले- गर्म पानी के लिए देने पड़ते है रुपये
टीन शेड में बैठे बहेड़ी, बिथरी, भोजीपुरा, आंवला से आए तीमारदारों का आरोप था कि अस्पताला में गर्म पानी की व्यवस्था नहीं है। कैंटीन से गर्म पानी लेने पर 50 रुपये देने पड़ते हैं। प्रसव के बाद तीन से पांच हजार रुपये बधाई मांगते हैं। इन्कार पर सहयोग नहीं करते।
सफाई : रैन बसेरा नहीं जाते तीमारदार
इसलिए लॉन्ड्री वाले कर रहे प्रयोग
सीएमएस डॉ. त्रिभुवन प्रसाद के मुताबिक रैन बसेरे में सभी सुविधाएं हैं, लेकिन तीमारदार जाना नहीं चाहते। खाली पड़े भवन का उपयोग लॉन्ड्री वाले करने लगे हैं। अगर किसी तीमारदार को रैन बसेरा जाना है तो वह इमरजेंसी में बता दें। वह वहां पहुंचा देंगे। शौचालय आदि टूटे हैं तो उन्हें ठीक करा दिया जाएगा। वसूली की शिकायत मिलने पर कार्रवाई हो रही है।
रुपये होते तो सरकारी अस्पताल क्यों आते
- बेटी का बड़ा ऑपरेशन हुआ है। छह दिन से टीन शेड में ठहरे हैं। ठहरने का कमरा भी है, ये किसी ने नहीं बताया। - लालता प्रसाद, खेतौसा भोजीपुरा
- बेटे का जन्म हुआ तो स्टाफ रुपये मांगने लगा। जितना वे मांग रहे थे, उतने नहीं दिए तो नाराज हो गए। क्या कर सकते हैं। - रामदेवी, भोजीपुरा
- रैन बसेरा कहां है ये नहीं पता। बेटे जन्म के बाद पांच हजार रुपये मांगे। अगर रुपये होते तो सरकारी अस्पताल क्यों आते। - यशपाल, पडोली, भुता
- अस्पताल में इलाज अच्छा है, लेकिन हर काम के रुपये मांगते हैं। पानी गर्म कराओ तो भी रुपये दो। रैन बसेरा यहां है कहां। - सोनू, राई नेवादा, बहेड़ी
- करीब दो साल से लॉन्ड्री चला रहे हैं। कोई भी परिजन रैन बसेरा नहीं आया। खाली है तो प्रयोग कर रहे हैं। ये सभी को पता है। - मनी, लॉन्ड्री संचालक
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महिला चिकित्सालय में दो तल का रैन बसेरा करीब छह वर्ष पूर्व बना था। ताकि गर्भवती के भर्ती होने से लेकर प्रसव के बाद डिस्चार्ज होने तक करीब पांच से सात दिन तक वे ठहर सकें। हालांकि, इस रैन बसेरे का पता तीमारदारों को नहीं बताया जाता। परिसर में एक जगह रैन बसेरे तक पहुंचने के लिए पर्चा चस्पा किया गया है। जो आसानी से नजर नहीं आता। वहीं, रैन बसेरा में लॉन्ड्री कर्मचारी डॉक्टरों के एप्रेन, भर्ती होने वाली गर्भवतियों को दिए जा रहे चादर, ऑपरेशन एप्रेन, कंबल, तकिए का कवर आदि धोने के बाद सुखा रहे हैं। जिन्हें इस्त्री के बाद यहीं रखा जाता है। ब्यूरो
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टूटे दरवाजे, पड़ी शराब की बोतलें
अमर उजाला की टीम ने रैन बसेरे का जायजा लिया तो ग्राउंड फ्लोर के हॉल में दीवारों में कीलें ठोंककर तार खींचकर कपड़े सुखाए जा रहे थे। बेड पर सूखे हुए कपड़े रखे थे। एक कर्मी कपड़े इस्त्री कर रहा था। शौचालय के दरवाजे, कमोड, टूटे मिले। सीढ़ी पर धूल की पर्त जमी थी। शराब की बोतलें पड़ी हुई थीं। दूसरे तल पर बने कक्ष में ताला था। इसमें लगी जंग बता रही थी कि वर्षों से यहां का ताला खुला ही नहीं।
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तीमारदार बोले- गर्म पानी के लिए देने पड़ते है रुपये
टीन शेड में बैठे बहेड़ी, बिथरी, भोजीपुरा, आंवला से आए तीमारदारों का आरोप था कि अस्पताला में गर्म पानी की व्यवस्था नहीं है। कैंटीन से गर्म पानी लेने पर 50 रुपये देने पड़ते हैं। प्रसव के बाद तीन से पांच हजार रुपये बधाई मांगते हैं। इन्कार पर सहयोग नहीं करते।
सफाई : रैन बसेरा नहीं जाते तीमारदार
इसलिए लॉन्ड्री वाले कर रहे प्रयोग
सीएमएस डॉ. त्रिभुवन प्रसाद के मुताबिक रैन बसेरे में सभी सुविधाएं हैं, लेकिन तीमारदार जाना नहीं चाहते। खाली पड़े भवन का उपयोग लॉन्ड्री वाले करने लगे हैं। अगर किसी तीमारदार को रैन बसेरा जाना है तो वह इमरजेंसी में बता दें। वह वहां पहुंचा देंगे। शौचालय आदि टूटे हैं तो उन्हें ठीक करा दिया जाएगा। वसूली की शिकायत मिलने पर कार्रवाई हो रही है।
रुपये होते तो सरकारी अस्पताल क्यों आते
- बेटी का बड़ा ऑपरेशन हुआ है। छह दिन से टीन शेड में ठहरे हैं। ठहरने का कमरा भी है, ये किसी ने नहीं बताया। - लालता प्रसाद, खेतौसा भोजीपुरा
- बेटे का जन्म हुआ तो स्टाफ रुपये मांगने लगा। जितना वे मांग रहे थे, उतने नहीं दिए तो नाराज हो गए। क्या कर सकते हैं। - रामदेवी, भोजीपुरा
- रैन बसेरा कहां है ये नहीं पता। बेटे जन्म के बाद पांच हजार रुपये मांगे। अगर रुपये होते तो सरकारी अस्पताल क्यों आते। - यशपाल, पडोली, भुता
- अस्पताल में इलाज अच्छा है, लेकिन हर काम के रुपये मांगते हैं। पानी गर्म कराओ तो भी रुपये दो। रैन बसेरा यहां है कहां। - सोनू, राई नेवादा, बहेड़ी
- करीब दो साल से लॉन्ड्री चला रहे हैं। कोई भी परिजन रैन बसेरा नहीं आया। खाली है तो प्रयोग कर रहे हैं। ये सभी को पता है। - मनी, लॉन्ड्री संचालक