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बुजुर्गों ने बदल दी कॉलोनी की सूरत

Sun, 16 Oct 2016 01:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली Updated Sun, 16 Oct 2016 01:32 AM IST
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Changed the face of the old colony
पार्क में खेलते बच्चे। - फोटो : बरेली, अमर उजाला
मौलानगर की चाणक्यपुरी कॉलोनी में मात्र 40 मकान हैं। छोटी सी ये कॉलोनी 37 साल पहले बसी थी। उसी समय बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) बना था। बीडीए ने पहली कॉलोनी यही स्वीकृत की थी। कॉलोनी में ज्यादातर रिटायर्ड शिक्षक या फिर व्यवसायिक परिवार रहते हैं। बुजुर्गों ने अपनी मेहनत से ऊबड़खाबड़ जमीन पर खूबसूरत पार्क बनाकर सड़कें भी चमका दीं। हर घर के सामने सफाई के साथ हरे  पेड़ कॉलोनी की खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं।
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कॉलोनी में दो गेट हैं। इनमें सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। रात में गार्ड भी रहता है। पार्क से लेकर घरों में कूड़ेदान रखे हैं। इनमें कूड़ा भरकर बाहर ले जाने के इंतजाम कॉलोनी के बाशिंदों ने खुद ही कर रखे हैं। कॉलोनी के बीचोबीच में पार्क में बच्चों के झूले हैं। स्ट्रीट लाइट और स्कूल की सुविधा भी है। घरों के सामने सफाई के इंतजाम कॉलोनी की सोसायटी कराती है। रिटायर्ड बुजुर्गों की मेहनत का ही नतीजा है कि दशक भर पहले ऊबड़खाबड़ मानी जाने वाली कॉलोनी की सूरत अब बदल गई है। 
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ये काम अभी बाकी हैं
सीवर, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, पार्क में बाउंड्रीवाल और फव्वारा, सोलर लाइट आदि।  

क्या कहते हैं बाशिंदे
हम कॉलोनी में कुछ नया करने की कोशिश रहती है। जैसे हम अपने घर को सजाते संवारते हैं। उसी तरह कॉलोनी की सड़कों की सफाई से लेकर हर चीज दुरुस्त करते हैं। 
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- विजय किशोर जौहरी, रिटायर्ड प्रिंसिपल 
सड़क,सफाई और पेड़-पौधे लगाने के काम तो सब मिलकर कर लेते हैं, लेकिन  सीवर, सोलर लाइट, बाउंड्रीवाल जैसे काम नहीं हो पाते। नगर निगम में  स्वीकृत भी करा लो तो भी काम होता नहीं। 
- डॉ. वेद प्रकाश खंडेलवाल, रिटायर्ड शिक्षक बरेली कालेज
छोटी सी कॉलोनी है। हम सब मिलकर इसे आइडियल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। नगर निगम से मदद भी मिलती है, लेकिन उतनी नहीं मिलती जितनी कि मिलनी चाहिए। फिर भी हम सब लगे हुए हैं। 

- उत्तम कुमार, व्यवसायी 
कॉलोनी में जितने भी परिवार रहते हैं, वह सब अपना हक समझकर मुझे किसी भी काम के लिए फोन करते हैं तो हमें अपना काम छोड़कर कॉलोनी का काम सबसे पहले कराना पड़ता है। 
- विकास शर्मा, पार्षद, मौलानगर    
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