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26 साल के राजनीति पर भारी पड़ गई जाति प्रमाणपत्र की लड़ाई

Sat, 21 Aug 2021 12:58 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 21 Aug 2021 12:58 AM IST
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Caste certificate battle overwhelms 26 years of politics
शहला ताहिर। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

1995 में पहली बार चुनाव लड़ने के साथ ही उठा था शहला के जाति प्रमाणपत्र पर सवाल

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बरेली (नवाबगंज)। शहला ताहिर के राजनीति में कदम रखने के साथ ही शुरू हुई जाति प्रमाण पत्र की लड़ाई में 26 साल बाद आखिर उन्हें मात मिली है। इस दौरान वह तीन बार नगर पालिका अध्यक्ष रहीं। एक बार 21 दिन के लिए जेल भी गईं। शहला ताहिर का दावा है कि वह लगातार विकास को लेकर प्रयासरत रहीं लेकिन उनके काम में लगातार अड़चनें लगाई गईं।
शहला ताहिर ने राजनीति की शुरुआत 1995 में नवाबगंज नगर पालिका से चुनाव लड़कर की थी। तब वह बसपा से नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव लड़ी थीं और भाजपा के रविंद्र सिंह राठौर को करीब 170 वोटों से हराया था। यह चुनाव उन्होंने पिछड़ी जाति के प्रमाणपत्र पर लड़ा था। उस दौरान तत्कालीन भाजपा सभासद झांझन लाल गंगवार ने उनकी जाति पर सवाल उठाते हुए प्रमाणपत्र को फर्जी बताकर शिकायत की थी। मगर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। इसके बाद वर्ष 2010 के चुनाव में भाजपा के रविंद्र सिंह राठौर ने बसपा से ही चुनाव लड़ीं शहला ताहिर को हरा दिया था।
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पूर्व पालिका अध्यक्ष पर एक ही दिन में दर्ज कराए थे 22 मुकदमे

बसपा से चुनाव हारने के बाद शहला ताहिर सपा में शामिल हो गईं और शिवपाल यादव की खास बन गईं। वर्ष 2012 में उन्होंने सपा से पालिका अध्यक्ष का चुनाव लड़ा और भाजपा के रविंद्र सिंह राठौर को 2500 से ज्यादा वोटों से हराया। मगर शहला ताहिर का यह कार्यकाल सबसे ज्यादा विवादित रहा। नगर पालिका की दुकानों को लेकर रविंद्र सिंह राठौर के खिलाफ एक ही दिन में 22 मुकदमे दर्ज कराए गए थे। हालांकि भाजपा सरकार आने के बाद इन मुकदमों में फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई।
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बवाल के बाद मिली जीत और जाना पड़ा जेल

वर्ष 2017 में नगर पालिका परिषद चुनाव में शहला ताहिर सपा के टिकट पर अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ीं और पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष रविंद्र सिंह राठौर के भाई नीरेंद्र सिंह राठौर की पत्नी प्रेमलता राठौर को करीब 150 वोटों से हराया था। यह पद चूंकि पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित था, सो शहला ने पिछड़ी जाति का प्रमाणपत्र लगाया। इस चुनाव में काफी हंगामा और बवाल हुआ था। एक पुराने मामले में वारंट होने के चलते शपथ ग्रहण के बाद विकास भवन से ही शहला ताहिर को जेल भेज दिया गया। इस दौरान वह 21 दिन तक जेल में रहीं। इसके साथ ही जाति प्रमाणपत्र का मामला फिर उठ गया और शासन से इस पर जांच शुरू हो गई।

बार-बार नोटिस देकर सुनवाई के लिए बुलाया गया पर अपना पक्ष रखने के लिए वह उपस्थित नहीं हुईं। जाति की पुष्टि के संबंध में कोई प्रमाण पत्र न मिलने से उसे निरस्त कर दिया गया है। इसकी सूचना निर्वाचन आयोग को दे दी है। नियमानुसार 30 दिन के भीतर वह अपना पक्ष प्रस्तुत कर सकती हैं। - नितीश कुमार, जिलाधिकारी

मैंने अपनी मां की जाति का प्रमाणपत्र दे दिया है। मोहल्ले के लोगों के हलफनामे समेत अन्य सारे सबूत भी दे दिए हैं। अब अधिकारी और विपक्ष के लोग ही साबित करें कि मैं उच्च जाति की हूं। सारे लोग जानते हैं कि ये सब मुझे परेशान करने के लिए किया जा रहा है। - शहला ताहिर, नगर पालिका अध्यक्ष

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