{"_id":"61673140e88d1735ed3becb6","slug":"case-of-moving-corpses-seven-killers-will-remain-in-jail-till-their-last-breath-bareilly-news-bly462745022","type":"story","status":"publish","title_hn":"चलती लाशों वाला केस... अंतिम सांस तक जेल में रहेंगे सात हत्यारे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चलती लाशों वाला केस... अंतिम सांस तक जेल में रहेंगे सात हत्यारे
सार
बरेली और बदायूं की पुलिस के तीन बार दो लाशों को एक-दूसरे की सीमा में फेंकने की वजह से चर्चित हुआ था दोहरा हत्याकांड
विज्ञापन
demo photo
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
इफको कॉलोनी के जुगेंद्र और साढ़ूू के बेटे दिनेश की 24 सितंबर 2008 को हुई थी हत्या
विज्ञापन
अदालत ने 13 साल बाद सुनाया फैसला, हत्यारों पर 15-15 हजार का जुर्माना भी किया
बरेली। आंवला में 13 साल पहले हुए दोहरे हत्याकांड में अदालत ने सात लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई। इफको कॉलोनी में रहने वाले जुगेंद्र सिंह और उसके साढ़ूू के बेटे दिनेश की हत्या इसलिए काफी चर्चा में रही थी क्योंकि रिपोर्ट दर्ज करने से बचने के लिए बरेली और बदायूं की पुलिस ने उनकी लाशों को तीन बार एक-दूसरे की सीमा में फेंका था। इसी वजह से यह केस चलती लाशों वाले केस के तौर पर चर्चित हुआ था।
जुगेंद्र का हत्यारोपी आराम सिंह 24 सितंबर 2008 को उसे घर से बुलाकर ले गया था। उसके साथ मुकेश, धर्मवीर, धर्मपाल, भगवान दास, रघुवीर सिंह और रामऔतार भी थे। जुगेंद्र और आराम सिंह की पुरानी रंजिश थी। आराम सिंह फैसला करने के बहाने उसे बुलाकर ले गया था। जुगेंद्र के साथ उसके साढ़ूू का बेटा दिनेश भी गया था। उसी रात अलीगंज इलाके में जुगेंद्र और दिनेश को गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई। इसके बाद तीन दिन तक बरेली और बदायूं की पुलिस के बीच लाशों को एक-दूसरे की सीमा में फेंकने का खेल चलता रहा था।
विज्ञापन
जुगेंद्र की पत्नी कमला देवी इस बीच अपने रिश्तेदारों के साथ उसकी तलाश करती रही। अगले दिन पता चला कि दो लाशें अलीगंज रोड पर एक मंदिर के पास देखी गई हैं। कमला अपने रिश्तेदारों के साथ वहां पहुंचीं तो मिट्टी पर खून के धब्बे और कारतूस का खोखा तो पड़ा मिला लेकिन लाशें गायब थीं।
विज्ञापन
विज्ञापन
दो दिन बाद 26 सितंबर को बदायूं के बिसौली थाना क्षेत्र में दोनों लाशें बरामद हुईं। तीसरी बार लाशें यहां लाकर फेंकी गई थीं। तत्कालीन इंस्पेक्टर बिसौली अचल यादव ने एसएसपी रहे प्रकाश डी को सूचना देकर छानबीन की तो पता चला कि बरेली पुलिस ने लाशों को बदायूं की सीमा में फेंका है। एसएसपी के आदेश पर बिसौली पुलिस ने लाशों का बदायूं में ही पोस्टमार्टम कराया और शून्य क्राइम नंबर पर रिपोर्ट दर्ज कर ली। इसके बाद मामला तत्कालीन डीआईजी तक पहुंचा। चूंकि हत्या के साक्ष्य मिल चुके थे लिहाजा डीआईजी के आदेश पर दोहरे हत्याकांड का यह केस बरेली के आंवला थाने को ट्रांसफर किया गया।
रात की गश्त के बहाने होती थी लाशों की ढुलाई, दरोगा हुआ था सस्पेंड
जुगेंद्र और दिनेश की लाशों को फेंकने का सिलसिला तीन दिन चला। सबसे पहले लाशें अलीगंज रोड पर मंदिर के पास पड़ी होने की बात सामने आई। रात में आंवला पुलिस को लाशों को पता चला जिसके बाद तड़के चार बजे लाशों को उठाकर बदायूं के बगरैन चौकी क्षेत्र में फेंक दिया गया। बदायूं पुलिस को जब पता चला कि लाशों को यहां लाकर फेंका गया है तो उसने भी रात में गश्त के दौरान उन्हें उठाकर दोबारा आंवला क्षेत्र में फेंक दिया। तीसरी रात आंवला पुलिस ने फिर दोनों लाशों को बिसौली क्षेत्र में फेंक दिया। छानबीन में लाशों को घसीटे जाने के निशानों के पास जीप के पहियों के निशान भी मिले थे। यह मामला लाशों के चलने के तौर पर चर्चित हुआ था। बदायूं के तत्कालीन एसएसपी प्रकाश डी ने लाशों को फेंकने के मामले में सारे तथ्य इकट्ठे कराकर अपनी रिपोर्ट डीआईजी को भेजी थी जिसके बाद इस मामले में जांच हुई और थाना आंवला के दरोगा डीके शर्मा को निलंबित कर दिया गया।
जुगेंद्र को मारी थी 13 और दिनेश को 14 गोलियां
दोनों शवों के पोस्टमार्टम से पता चला कि हमलावरों ने जुगेंद्र को 13 और दिनेश को 14 गोलियां मारी थीं। कुछ गोलियां दोनों के शरीर में भी फंसी मिली जबकि ज्यादातर पार निकल गईं थीं। दरअसल जुगेंद्र आपराधिक प्रवृति का था। उस पर भी हत्या और हत्या के प्रयास समेत सात-आठ मुकदमे चल रहे थे। हमलावर जानते थे कि अगर वह बच गया तो उन्हें नहीं छोड़ेगा। इसलिए वे उसे तब तक गोली मारते रहे जब तक उसकी मौत नहीं हो गई।
हत्या के डर से गांव छोड़कर इफ्को कॉलोनी में रहने आया था जुगेंद्र
जुगेंद्र की पत्नी कमला देवी ने रिपोर्ट लिखाई थी कि जुगेंद्र के गांव बिसौली (बदायूं) के पृथ्वीपुर में 2007 में रामप्रकाश की हत्या हो गई थी जिसमें जुगेंद्र जेल गया था। रामप्रकाश के घरवाले और उनका भांजा रघुवीर बदला लेने की फिराक में थे। इसी कारण जुगेंद्र परिवार को लेकर आंवला की इफको कॉलोनी में किराए के मकान आकर रहने लगा। 24 सितंबर 2008 को शाम करीब पांच बजे आराम सिंह और उसके साथ आए लोग फैसले के बहाने उसे बुला ले गए।
कमला के मुताबिक आराम सिंह के पास उसकी लाइसेंसी रायफल भी थी। उस समय कमला के साथ उसका भांजा दिनेश, भाई आत्माराम और मकान मालिक मदनलाल शर्मा घर पर थे। आराम सिंह की गाड़ी में जुगेंद्र के साथ दिनेश भी बैठ गया। रात तक दोनों नहीं लौटे तो कमला ने उनके मोबाइल पर कॉल की लेकिन फोन भी बंद मिले। दूसरे दिन उनका कुछ पता नहीं चला। 25 सितंबर को कमला ने थाना आंवला मेें तहरीर दी लेकिन रिपोर्ट नही लिखी गई। 26 सितंबर 2008 को अखबारों में छपी खबर से कमला को पता चला कि अलीगंज रोड पर आम के बाग में दो लाशें पड़ी हैं। वहां पहुंची तो खून और कारतूस के खोखे पडे़ थे। कुछ लोगों ने बताया कि दो लाशें कल तक यहां पड़ी थीं। अभियोजन की ओर से 13 गवाह पेश किए गए। अपर सत्र न्यायाधीश उत्कर्ष यादव ने अभियुक्त आराम सिंह, मुकेश, धर्मवीर, धर्मपाल, भगवान दास, रघुवर सिंह और रामऔतार को जुगेंद्र तथा दिनेश की हत्या का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। सभी पर 15-15 हजार रुपये का जुर्माना भी किया।
विज्ञापन
अदालत ने 13 साल बाद सुनाया फैसला, हत्यारों पर 15-15 हजार का जुर्माना भी किया बरेली। आंवला में 13 साल पहले हुए दोहरे हत्याकांड में अदालत ने सात लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई। इफको कॉलोनी में रहने वाले जुगेंद्र सिंह और उसके साढ़ूू के बेटे दिनेश की हत्या इसलिए काफी चर्चा में रही थी क्योंकि रिपोर्ट दर्ज करने से बचने के लिए बरेली और बदायूं की पुलिस ने उनकी लाशों को तीन बार एक-दूसरे की सीमा में फेंका था। इसी वजह से यह केस चलती लाशों वाले केस के तौर पर चर्चित हुआ था।
जुगेंद्र का हत्यारोपी आराम सिंह 24 सितंबर 2008 को उसे घर से बुलाकर ले गया था। उसके साथ मुकेश, धर्मवीर, धर्मपाल, भगवान दास, रघुवीर सिंह और रामऔतार भी थे। जुगेंद्र और आराम सिंह की पुरानी रंजिश थी। आराम सिंह फैसला करने के बहाने उसे बुलाकर ले गया था। जुगेंद्र के साथ उसके साढ़ूू का बेटा दिनेश भी गया था। उसी रात अलीगंज इलाके में जुगेंद्र और दिनेश को गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई। इसके बाद तीन दिन तक बरेली और बदायूं की पुलिस के बीच लाशों को एक-दूसरे की सीमा में फेंकने का खेल चलता रहा था।
विज्ञापन
जुगेंद्र की पत्नी कमला देवी इस बीच अपने रिश्तेदारों के साथ उसकी तलाश करती रही। अगले दिन पता चला कि दो लाशें अलीगंज रोड पर एक मंदिर के पास देखी गई हैं। कमला अपने रिश्तेदारों के साथ वहां पहुंचीं तो मिट्टी पर खून के धब्बे और कारतूस का खोखा तो पड़ा मिला लेकिन लाशें गायब थीं।
विज्ञापन
दो दिन बाद 26 सितंबर को बदायूं के बिसौली थाना क्षेत्र में दोनों लाशें बरामद हुईं। तीसरी बार लाशें यहां लाकर फेंकी गई थीं। तत्कालीन इंस्पेक्टर बिसौली अचल यादव ने एसएसपी रहे प्रकाश डी को सूचना देकर छानबीन की तो पता चला कि बरेली पुलिस ने लाशों को बदायूं की सीमा में फेंका है। एसएसपी के आदेश पर बिसौली पुलिस ने लाशों का बदायूं में ही पोस्टमार्टम कराया और शून्य क्राइम नंबर पर रिपोर्ट दर्ज कर ली। इसके बाद मामला तत्कालीन डीआईजी तक पहुंचा। चूंकि हत्या के साक्ष्य मिल चुके थे लिहाजा डीआईजी के आदेश पर दोहरे हत्याकांड का यह केस बरेली के आंवला थाने को ट्रांसफर किया गया।
रात की गश्त के बहाने होती थी लाशों की ढुलाई, दरोगा हुआ था सस्पेंड
जुगेंद्र और दिनेश की लाशों को फेंकने का सिलसिला तीन दिन चला। सबसे पहले लाशें अलीगंज रोड पर मंदिर के पास पड़ी होने की बात सामने आई। रात में आंवला पुलिस को लाशों को पता चला जिसके बाद तड़के चार बजे लाशों को उठाकर बदायूं के बगरैन चौकी क्षेत्र में फेंक दिया गया। बदायूं पुलिस को जब पता चला कि लाशों को यहां लाकर फेंका गया है तो उसने भी रात में गश्त के दौरान उन्हें उठाकर दोबारा आंवला क्षेत्र में फेंक दिया। तीसरी रात आंवला पुलिस ने फिर दोनों लाशों को बिसौली क्षेत्र में फेंक दिया। छानबीन में लाशों को घसीटे जाने के निशानों के पास जीप के पहियों के निशान भी मिले थे। यह मामला लाशों के चलने के तौर पर चर्चित हुआ था। बदायूं के तत्कालीन एसएसपी प्रकाश डी ने लाशों को फेंकने के मामले में सारे तथ्य इकट्ठे कराकर अपनी रिपोर्ट डीआईजी को भेजी थी जिसके बाद इस मामले में जांच हुई और थाना आंवला के दरोगा डीके शर्मा को निलंबित कर दिया गया।जुगेंद्र को मारी थी 13 और दिनेश को 14 गोलियां
दोनों शवों के पोस्टमार्टम से पता चला कि हमलावरों ने जुगेंद्र को 13 और दिनेश को 14 गोलियां मारी थीं। कुछ गोलियां दोनों के शरीर में भी फंसी मिली जबकि ज्यादातर पार निकल गईं थीं। दरअसल जुगेंद्र आपराधिक प्रवृति का था। उस पर भी हत्या और हत्या के प्रयास समेत सात-आठ मुकदमे चल रहे थे। हमलावर जानते थे कि अगर वह बच गया तो उन्हें नहीं छोड़ेगा। इसलिए वे उसे तब तक गोली मारते रहे जब तक उसकी मौत नहीं हो गई।हत्या के डर से गांव छोड़कर इफ्को कॉलोनी में रहने आया था जुगेंद्र
जुगेंद्र की पत्नी कमला देवी ने रिपोर्ट लिखाई थी कि जुगेंद्र के गांव बिसौली (बदायूं) के पृथ्वीपुर में 2007 में रामप्रकाश की हत्या हो गई थी जिसमें जुगेंद्र जेल गया था। रामप्रकाश के घरवाले और उनका भांजा रघुवीर बदला लेने की फिराक में थे। इसी कारण जुगेंद्र परिवार को लेकर आंवला की इफको कॉलोनी में किराए के मकान आकर रहने लगा। 24 सितंबर 2008 को शाम करीब पांच बजे आराम सिंह और उसके साथ आए लोग फैसले के बहाने उसे बुला ले गए।कमला के मुताबिक आराम सिंह के पास उसकी लाइसेंसी रायफल भी थी। उस समय कमला के साथ उसका भांजा दिनेश, भाई आत्माराम और मकान मालिक मदनलाल शर्मा घर पर थे। आराम सिंह की गाड़ी में जुगेंद्र के साथ दिनेश भी बैठ गया। रात तक दोनों नहीं लौटे तो कमला ने उनके मोबाइल पर कॉल की लेकिन फोन भी बंद मिले। दूसरे दिन उनका कुछ पता नहीं चला। 25 सितंबर को कमला ने थाना आंवला मेें तहरीर दी लेकिन रिपोर्ट नही लिखी गई। 26 सितंबर 2008 को अखबारों में छपी खबर से कमला को पता चला कि अलीगंज रोड पर आम के बाग में दो लाशें पड़ी हैं। वहां पहुंची तो खून और कारतूस के खोखे पडे़ थे। कुछ लोगों ने बताया कि दो लाशें कल तक यहां पड़ी थीं। अभियोजन की ओर से 13 गवाह पेश किए गए। अपर सत्र न्यायाधीश उत्कर्ष यादव ने अभियुक्त आराम सिंह, मुकेश, धर्मवीर, धर्मपाल, भगवान दास, रघुवर सिंह और रामऔतार को जुगेंद्र तथा दिनेश की हत्या का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। सभी पर 15-15 हजार रुपये का जुर्माना भी किया।