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कैंट के प्रत्याशी रहे राजेंद्र गुप्ता ने भी बसपा छोड़ी
बरेली।
Updated Tue, 16 May 2017 01:52 AM IST
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Cantt's candidate Rajendra Gupta also left the BSP
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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नसीमुद्दीन सिद्दीकी काफी कोशिश के बाद भी बसपा में अपनी कुर्सी बचा नहीं पाए तो उनके समर्थकों और उनके द्वारा बसपा में लाए गए लोगों ने बसपा से नाता तोड़ना शुरू कर दिया है। रविवार को पार्टी से निष्कासन की घोषणा के कुछ देर पहले ही नसीमुद्दीन के खास सिपहसालार और पार्टी के लिए धन संग्रह करने में अहम भूमिका निभाने वाले जोनल कोआर्डिनेटर ब्रह्मस्वरूप सागर ने मायावती पर तमाम आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ने की घोषणा की। सोमवार को ब्रह्मस्वरूप की मौजूदगी में कैंट से प्रत्याशी रहे व्यापारी नेता राजेंद्र गुप्ता ने भी अपने साथियों के साथ बसपा से इस्तीफा दे दिया।
सोमवार शाम प्रांतीय महामंत्री और कैंट से बसपा प्रत्याशी रहे राजेंद्र गुप्ता ने भी समर्थकों के साथ पार्टी छोड़ दी है। विधायक का चुनाव लड़ने के लिए बहुत कम समय के लिए बसपा में रहे राजेंद्र गुप्ता ने प्रेसवार्ता में कहा कि बसपा में आने से पहले वे समझते थे कि यह पार्टी गरीब, दलित और शोषित वर्ग के लिए काम करती है। प्रत्याशी बनने के बाद पता चला कि पार्टी में कितनी गंदगी है, सिर्फ पैसा ही पार्टी का संविधान और ईमान है। पार्टी जिस उद्देश्य के लिए बनी थी वह अब भटक चुकी है। कार्यकर्ता और पदाधिकारी अब बेइज्जत किए जा रहे हैं। जनता ने सबक सिखा दिया लेकिन हाईकमान इससे सीखना नहीं चाहता है और आज भी नोट-नोट हो रहा है। इस मौके पर ब्रह्म स्वरूप सागर ने कहा है कि पार्टी की गलत नीतियों के खिलाफ बरेली मंडल में बसपा छोड़ने का सिलसिला जारी रहेगा। उल्लेखनीय है कि मीडिया में वायरल हुए आडियो में मायावती जिन मंडलों का जिक्र कर रही हैं उनमें बरेली भी शामिल है जिसका सही हिसाब नहीं पहुंचा है। नसीमुद्दीन से भी कहा गया था कि वह बरेली मेरठ, सहारनपुर और मुरादाबाद मंडल के पदाधिकारियों के साथ हाजिर हों और चंदे की किताबों का हिसाब दें।
ये भी अब बसपाई नहीं रहे
हाल ही में गठित महानगर इकाई उपाध्यक्ष सरदार इंद्रजीत सिंह, सेंथल शहर अध्यक्ष अमहर आब्दी, शहर भाईचारा अध्यक्ष नादिर खां, भोजीपुरा विधानसभा क्षेत्र महासचिव संजीव गंगवार, पूर्व मंडल अध्यक्ष ठाकुर महाराज सिंह, मुकेश कश्यप, अंशुमान पटेल, शकील खां, विशाल गौतम, राजेंद्र कुमार, हेतराम सागर व्यापारी नेता विपिन कोहली, पारस गुप्ता, मोहसिन आलम, जुगल सुखानी, गुलशन सब्बरवाल, महेश कन्नोजिया, हर्ष गुप्ता, राजेश जसोरिया, दर्शन लाल भाटिया, मनमोहन सब्बरवाल आदि ने भी इस्तीफे दिए हैं। उधर, रविवार को पार्टी छोड़ने वाले जयपाल सिंह और गंगाराम मौर्य ने फिर से वापसी कर ली है, यह जानकारी जिलाध्यक्ष नरेंद्र सागर ने दी है।
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कभी कुद इस खेल में शामिल रहे नेता अब नए नए खुलासे कर रहे हैं। पार्टी के एक नेता ने बताया कि मायावती फोन पर जिन किताबों की जिक्र कर रही हैं वह किताब नहीं पुराने नोटों की गड्डियां थी। एक किताब मतलब एक लाख के पुराने नोट। नसीमुद्दीन के पास जितने मंडलों की जिम्मेदारी थी वहां हिसाब में सबसे ज्यादा गड़बड़ी मिली। ये माना गया कि नसीमुद्दीन और उनकी टीम के लोगों ने टिकट वितरण, नोट बदली और रैलियों के खर्च का रकम का बड़ा हिस्सा अपने पास ही रख लिया। इनमें से कुछ लोगों ने जो संपत्ति खरीदी उसकी जानकारी मायावती तक पहुंची तो उन्होंने सख्ती की। कई जगह चुनाव हार जाने के बाद प्रत्याशियों ने पैसा ही नहीं दिया इस वजह से पार्टी में बिखराव की नौबत आ गई।
बसपा में जोड़ ---
अंबेडकर छात्र सभा ने प्रदेश
उपाध्यक्ष ने त्यागपत्र दिया
बरेली। बहुजन समाज पार्टी की छात्र इकाई अंबेडकर छात्र सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष रजत मिश्रा ने अपने 32 साथियों के साथ बहुजन समाज पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया है। उन्होंने त्यागपत्र की प्रति बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व जिलाध्यक्ष को भेजी है।
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सोमवार शाम प्रांतीय महामंत्री और कैंट से बसपा प्रत्याशी रहे राजेंद्र गुप्ता ने भी समर्थकों के साथ पार्टी छोड़ दी है। विधायक का चुनाव लड़ने के लिए बहुत कम समय के लिए बसपा में रहे राजेंद्र गुप्ता ने प्रेसवार्ता में कहा कि बसपा में आने से पहले वे समझते थे कि यह पार्टी गरीब, दलित और शोषित वर्ग के लिए काम करती है। प्रत्याशी बनने के बाद पता चला कि पार्टी में कितनी गंदगी है, सिर्फ पैसा ही पार्टी का संविधान और ईमान है। पार्टी जिस उद्देश्य के लिए बनी थी वह अब भटक चुकी है। कार्यकर्ता और पदाधिकारी अब बेइज्जत किए जा रहे हैं। जनता ने सबक सिखा दिया लेकिन हाईकमान इससे सीखना नहीं चाहता है और आज भी नोट-नोट हो रहा है। इस मौके पर ब्रह्म स्वरूप सागर ने कहा है कि पार्टी की गलत नीतियों के खिलाफ बरेली मंडल में बसपा छोड़ने का सिलसिला जारी रहेगा। उल्लेखनीय है कि मीडिया में वायरल हुए आडियो में मायावती जिन मंडलों का जिक्र कर रही हैं उनमें बरेली भी शामिल है जिसका सही हिसाब नहीं पहुंचा है। नसीमुद्दीन से भी कहा गया था कि वह बरेली मेरठ, सहारनपुर और मुरादाबाद मंडल के पदाधिकारियों के साथ हाजिर हों और चंदे की किताबों का हिसाब दें।
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ये भी अब बसपाई नहीं रहे
हाल ही में गठित महानगर इकाई उपाध्यक्ष सरदार इंद्रजीत सिंह, सेंथल शहर अध्यक्ष अमहर आब्दी, शहर भाईचारा अध्यक्ष नादिर खां, भोजीपुरा विधानसभा क्षेत्र महासचिव संजीव गंगवार, पूर्व मंडल अध्यक्ष ठाकुर महाराज सिंह, मुकेश कश्यप, अंशुमान पटेल, शकील खां, विशाल गौतम, राजेंद्र कुमार, हेतराम सागर व्यापारी नेता विपिन कोहली, पारस गुप्ता, मोहसिन आलम, जुगल सुखानी, गुलशन सब्बरवाल, महेश कन्नोजिया, हर्ष गुप्ता, राजेश जसोरिया, दर्शन लाल भाटिया, मनमोहन सब्बरवाल आदि ने भी इस्तीफे दिए हैं। उधर, रविवार को पार्टी छोड़ने वाले जयपाल सिंह और गंगाराम मौर्य ने फिर से वापसी कर ली है, यह जानकारी जिलाध्यक्ष नरेंद्र सागर ने दी है।
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कभी कुद इस खेल में शामिल रहे नेता अब नए नए खुलासे कर रहे हैं। पार्टी के एक नेता ने बताया कि मायावती फोन पर जिन किताबों की जिक्र कर रही हैं वह किताब नहीं पुराने नोटों की गड्डियां थी। एक किताब मतलब एक लाख के पुराने नोट। नसीमुद्दीन के पास जितने मंडलों की जिम्मेदारी थी वहां हिसाब में सबसे ज्यादा गड़बड़ी मिली। ये माना गया कि नसीमुद्दीन और उनकी टीम के लोगों ने टिकट वितरण, नोट बदली और रैलियों के खर्च का रकम का बड़ा हिस्सा अपने पास ही रख लिया। इनमें से कुछ लोगों ने जो संपत्ति खरीदी उसकी जानकारी मायावती तक पहुंची तो उन्होंने सख्ती की। कई जगह चुनाव हार जाने के बाद प्रत्याशियों ने पैसा ही नहीं दिया इस वजह से पार्टी में बिखराव की नौबत आ गई।
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अंबेडकर छात्र सभा ने प्रदेश
उपाध्यक्ष ने त्यागपत्र दिया
बरेली। बहुजन समाज पार्टी की छात्र इकाई अंबेडकर छात्र सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष रजत मिश्रा ने अपने 32 साथियों के साथ बहुजन समाज पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया है। उन्होंने त्यागपत्र की प्रति बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व जिलाध्यक्ष को भेजी है।