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बढ़ते मामलों से व्यापारी नेता परेशान, प्रशासन से कैसे कहें फिर से लागू हो पुरानी व्यवस्था
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बरेली में तेजी से बढ़ती संक्रमितों की संख्या के चलते नए हॉटस्पॉट बनाए जाने लगे हैं।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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बरेली। एक दिन पहले कोरोना के जोरदार विस्फोट के साथ संक्रमितों का रोज का औसत एकाएक तीन गुना बढ़ जाने के बाद पूरा शहर दहला हुआ है। बाजार, सरकारी विभागों और अस्पतालों से लेकर गली-मोहल्लों में हर दिन जिस तादाद में लोग संक्रमित हो रहे हैं, उससे अब व्यापारियों में भी साफ दहशत दिखाई दे रही है। हालात बिगड़ने के बाद उन व्यापारी नेताओं पर ही बाजार में फिर पुरानी व्यवस्था लागू कराने या फिर कुछ दिन के लिए पूरा लॉकडाउन कराने का दबाव पड़ना शुरू हो गया है जिन्होंने पिछले हफ्ते पूरा बाजार खुलवाने के लिए मुहिम चलाई थी और केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार से पैरवी कराकर जिला प्रशासन से इसकी अनुमति हासिल करने में कामयाब रहे थे।
दो दिन पहले तक कोरोना संक्रमित मिलने का हर रोज का औसत 40 से 50 के बीच था लेकिन बृहस्पतिवार को एक ही दिन में 170 संक्रमित मिलने के बाद पूरा शहर दहशत में आ गया। सबसे ज्यादा असर व्यापारियों पर दिखा क्योंकि सोमवार से पूरा बाजार खुलने के साथ ही शहर में बेतहाशा भीड़ उमड़नी शुरू हुई। इस बीच कई व्यापारियों के भी संक्रमित होने की खबरें आईं और श्यामगंज के एक युवा तेल कारोबारी की कोरोना से मौत भी हो गई। बढ़ते कोरोना के खतरे के बीच पूरा बाजार खोला जाए या नहीं, इस पर पहले से ही व्यापारियों में मतभेद थे लिहाजा कोरोना संक्रमण में तेजी आते ही पूरा बाजार खुलने की मुहिम चलाने वाले व्यापारी नेता उन व्यापारियों के निशाने पर आ गए हैं जो कोरोना से बचाव के लिए यह नहीं चाह रहे थे कि पूरा बाजार खोलकर भीड़भाड़ के साथ कोरोना संक्रमण फैलने की गुंजाइश और बढ़ाई जाए।
अब दुकानदारों में भारी बेचैनी का माहौल है। शुक्रवार को पूरे दिन सोशल मीडिया पर फिर पूरा लॉकडाउन लगाने की चर्चा जारी रही। लोगों ने कोरोना बढ़ते मामलों के लिए व्यापारी संगठनों और उनके नेताओं को भी बेहिचक दोषी ठहराया और यह तक आरोप लगाया कि राजनीति चमकाने के लिए पूरा बाजार खुलवाया गया और इस मामले में केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार का भी बेजा इस्तेमाल किया गया। दावे किए गए थे कि पूरा बाजार खुलने से भीड़ कम होगी लेकिन हालात इसके उलट हुए। बाजार में नियमों का पालन नहीं कराया गया इसीलिए कोरोना के मामले बढ़ गए। सोशल मीडिया पर केंद्रीय मंत्री को भी घेरा जा रहा है। कहा जा रहा है कि केंद्रीय मंत्री अगर इस मामले में हस्तक्षेप न करते तो शायद प्रशासन भी ऐसा जोखिम भरा फैसला नहीं लेता।
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दो दिन पहले तक कोरोना संक्रमित मिलने का हर रोज का औसत 40 से 50 के बीच था लेकिन बृहस्पतिवार को एक ही दिन में 170 संक्रमित मिलने के बाद पूरा शहर दहशत में आ गया। सबसे ज्यादा असर व्यापारियों पर दिखा क्योंकि सोमवार से पूरा बाजार खुलने के साथ ही शहर में बेतहाशा भीड़ उमड़नी शुरू हुई। इस बीच कई व्यापारियों के भी संक्रमित होने की खबरें आईं और श्यामगंज के एक युवा तेल कारोबारी की कोरोना से मौत भी हो गई। बढ़ते कोरोना के खतरे के बीच पूरा बाजार खोला जाए या नहीं, इस पर पहले से ही व्यापारियों में मतभेद थे लिहाजा कोरोना संक्रमण में तेजी आते ही पूरा बाजार खुलने की मुहिम चलाने वाले व्यापारी नेता उन व्यापारियों के निशाने पर आ गए हैं जो कोरोना से बचाव के लिए यह नहीं चाह रहे थे कि पूरा बाजार खोलकर भीड़भाड़ के साथ कोरोना संक्रमण फैलने की गुंजाइश और बढ़ाई जाए।
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अब दुकानदारों में भारी बेचैनी का माहौल है। शुक्रवार को पूरे दिन सोशल मीडिया पर फिर पूरा लॉकडाउन लगाने की चर्चा जारी रही। लोगों ने कोरोना बढ़ते मामलों के लिए व्यापारी संगठनों और उनके नेताओं को भी बेहिचक दोषी ठहराया और यह तक आरोप लगाया कि राजनीति चमकाने के लिए पूरा बाजार खुलवाया गया और इस मामले में केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार का भी बेजा इस्तेमाल किया गया। दावे किए गए थे कि पूरा बाजार खुलने से भीड़ कम होगी लेकिन हालात इसके उलट हुए। बाजार में नियमों का पालन नहीं कराया गया इसीलिए कोरोना के मामले बढ़ गए। सोशल मीडिया पर केंद्रीय मंत्री को भी घेरा जा रहा है। कहा जा रहा है कि केंद्रीय मंत्री अगर इस मामले में हस्तक्षेप न करते तो शायद प्रशासन भी ऐसा जोखिम भरा फैसला नहीं लेता।
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