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Bareilly News: स्वास्थ्य सेवा के लिए बनते जा रहे भवन, पर स्टाफ की किल्लत
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बरेली। स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर उपकेंद्र, हेल्थ यूनिट, क्रिटिकल केयर का निर्माण हो रहा है, लेकिन स्टाफ के अभाव में जरूरतमंदों को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है। इधर, 15वें वित्त से कई और स्वास्थ्य उपकेंद्रों का निर्माण होना है। जहां स्टाफ का संकट मंडराने की संभावना है।
मानव संसाधन के अभाव में आठ वर्ष बाद भी तीन सौ बेड अस्पताल का पूरी क्षमता के साथ संचालन नहीं हो सका। आधी अधूरी सेवाओं के साथ ओपीडी चलाई जा रही है। लैब में जांच के नाम पर किट हैं और नमूनों की जांच उत्प्रेरक के अभाव में नहीं हो पा रही। कंपलीट ब्लड काउंट मशीन और डिजिटल एक्सरे मशीन खराब पड़ी है। 33 वेंटिलेटर समेत करोड़ाें के उपकरण धूल फांक रहे हैं। बीते वर्षों में जिले में करीब चार सौ हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर बनाए गए। अब तक 360 ही संचालित हो सके। शेष के लिए स्टाफ और उपकरण की व्यवस्था नहीं हो सकी।
जिला अस्पताल में क्रिटिकल केयर यूनिट की तर्ज पर ट्रामा विंग का निर्माण कार्य पूरा हुए करीब साल भर बीत चुका है। छह माह पहले हस्तांतरण की कवायद भी हो चुकी है। पर मानव संसाधन के अभाव में अब तक इस ट्रामा विंग का संचालन नहीं हो सका।
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15 निर्माणाधीन, 25 और केंद्र निर्माण का प्रस्ताव
गांव और मजरों तक स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए करीब दो दर्जन और उपकेंद्र बनाया जाना प्रस्तावित है। शासन ने जिलाधिकारी और सीएमओ को पत्र भेजकर स्थान तय कर सूची भेजने के लिए कहा है। उपकेंद्रों का निर्माण वहां होगा जहां बीते 15 वर्षों में आबादी बढ़ी हो। इन उपकेंद्रों पर कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर तैनात होंगे।
आधे भी नहीं हैं स्वास्थ्य केंद्र पर विशेषज्ञ स्टाफ
सीएचसी, पीएचसी, यूपीएचसी समेत 71 स्वास्थ्य केंद्रों में से करीब 80 फीसदी केंद्रों पर स्वीकृत के सापेक्ष विशेषज्ञ चिकित्सक और स्टाफ तैनात नहीं हैं। नियमानुसार सीएचसी पर एक फिजिशिन, डेंटिस्ट, नेत्र रोग विशेषज्ञ, गायनेकोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट, ऑप्टोमेट्रिस्ट की तैनाती जरूरी है। वहीं, स्टाफ नर्स, एएनएम, सहायक आदि स्टाफ के स्वीकृत पद है, लेकिन 260 के सापेक्ष 126 ही विशेषज्ञ स्टाफ की तैनाती है।
वर्जन
जहां आबादी बढ़ी है वहां स्वास्थ्य उपकेंद्र निर्माण के लिए जल्द प्रस्ताव भेजा जाएगा। चिकित्सक और स्टाफ के रिक्त पदों पर तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजा जा रहा है। सीमित संसाधन में बेहतर सेवाएं देने का प्रयास है। - डॉ. विश्राम सिंह, सीएमओ
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मानव संसाधन के अभाव में आठ वर्ष बाद भी तीन सौ बेड अस्पताल का पूरी क्षमता के साथ संचालन नहीं हो सका। आधी अधूरी सेवाओं के साथ ओपीडी चलाई जा रही है। लैब में जांच के नाम पर किट हैं और नमूनों की जांच उत्प्रेरक के अभाव में नहीं हो पा रही। कंपलीट ब्लड काउंट मशीन और डिजिटल एक्सरे मशीन खराब पड़ी है। 33 वेंटिलेटर समेत करोड़ाें के उपकरण धूल फांक रहे हैं। बीते वर्षों में जिले में करीब चार सौ हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर बनाए गए। अब तक 360 ही संचालित हो सके। शेष के लिए स्टाफ और उपकरण की व्यवस्था नहीं हो सकी।
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जिला अस्पताल में क्रिटिकल केयर यूनिट की तर्ज पर ट्रामा विंग का निर्माण कार्य पूरा हुए करीब साल भर बीत चुका है। छह माह पहले हस्तांतरण की कवायद भी हो चुकी है। पर मानव संसाधन के अभाव में अब तक इस ट्रामा विंग का संचालन नहीं हो सका।
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15 निर्माणाधीन, 25 और केंद्र निर्माण का प्रस्ताव
गांव और मजरों तक स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए करीब दो दर्जन और उपकेंद्र बनाया जाना प्रस्तावित है। शासन ने जिलाधिकारी और सीएमओ को पत्र भेजकर स्थान तय कर सूची भेजने के लिए कहा है। उपकेंद्रों का निर्माण वहां होगा जहां बीते 15 वर्षों में आबादी बढ़ी हो। इन उपकेंद्रों पर कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर तैनात होंगे।
आधे भी नहीं हैं स्वास्थ्य केंद्र पर विशेषज्ञ स्टाफ
सीएचसी, पीएचसी, यूपीएचसी समेत 71 स्वास्थ्य केंद्रों में से करीब 80 फीसदी केंद्रों पर स्वीकृत के सापेक्ष विशेषज्ञ चिकित्सक और स्टाफ तैनात नहीं हैं। नियमानुसार सीएचसी पर एक फिजिशिन, डेंटिस्ट, नेत्र रोग विशेषज्ञ, गायनेकोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट, ऑप्टोमेट्रिस्ट की तैनाती जरूरी है। वहीं, स्टाफ नर्स, एएनएम, सहायक आदि स्टाफ के स्वीकृत पद है, लेकिन 260 के सापेक्ष 126 ही विशेषज्ञ स्टाफ की तैनाती है।
वर्जन
जहां आबादी बढ़ी है वहां स्वास्थ्य उपकेंद्र निर्माण के लिए जल्द प्रस्ताव भेजा जाएगा। चिकित्सक और स्टाफ के रिक्त पदों पर तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजा जा रहा है। सीमित संसाधन में बेहतर सेवाएं देने का प्रयास है। - डॉ. विश्राम सिंह, सीएमओ