फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Bronchitis: Patients are losing their breath while coughing

ब्रोंकाइटिस : खांसते-खांसते मरीजों का फूल रहा दम

Thu, 19 Dec 2024 02:53 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 19 Dec 2024 02:53 AM IST
विज्ञापन
Bronchitis: Patients are losing their breath while coughing
बरेली। सर्दियों में नजला, खांसी समेत बुखार होने पर बगैर चिकित्सकीय परामर्श दवा का सेवन कर रहे लोगों का दम फूल रहा है। ब्रोंकाइटिस की पुष्टि के साथ अस्थमा के भी लक्षण मिल रहे हैं। चिकित्सकों के मुताबिक जिन मरीजों की स्थिति गंभीर है, उन्हें भर्ती करना पड़ रहा है।
विज्ञापन

जिला अस्पताल चेस्ट फिजिशियन अजय मोहन अग्रवाल के मुताबिक ठंड और प्रदूषण के चलते बच्चे और बुजुर्ग सर्वाधिक प्रभावित हैं। ओपीडी में सांस फूलने की समस्या लेकर मरीज पहुंच रहे हैं। प्रतिदिन आठ से दस मरीजों की जांच में माइल्ड ब्रोंकाइटिस यानी श्वसन नलिकाओं में सूजन मिल रही है। इस समस्या का शुरुआत में ही अगर प्रभावी इलाज न हो तो यह क्रोनिक होने पर श्वासनलिका को अवरुद्ध कर दम घोंटने लगता है। ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा शरीर में न पहुंचने से भ्रम, उलझन, चिड़चिड़ापन, बीपी आदि कई शारीरिक समस्याएं होने लगती है।
विज्ञापन


लिहाजा, माइल्ड स्थिति से निजात के लिए नेबुलाइजर, एंटीबॉयोटिक्स दवा ही इलाज है। जिन मरीजों में अस्थमा के लक्षण हैं या सीने में बलगम जमा है, उन्हें एक से दो दिन भर्ती करना पड़ रहा है। आगे समस्या न हो इसलिए स्वस्थ हुए मरीजों को एहतियात का सुझाव दिया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


ठंड से एलर्जी वाले मरीज भी पहुंच रहे ओपीडी
चेस्ट फिजिशियन डॉ. पुनीत अग्रवाल के मुताबिक बताया कि सामान्य दिनों के सापेक्ष ठंड बढ़ने पर अब करीब 20 फीसदी मरीज बढ़े हैं। ओपीडी में सीओपीडी, ब्रोंकाइटिस के साथ एलर्जी वाले मरीज भी पहुंच रहे हैं। बताया कि कई लोगों को ठंड से एलर्जी होती है। उन्हें ठंड की शुरुआत से ही सूखी खांसी और आंखों से पानी निकलने की समस्या होने लगती है। दवा से कुछ दिन बाद राहत के बाद फिर समस्या शुरू होती है।


कोहरा और हवा में प्रदूषण के कण बना रहे बीमार
चिकित्सकों के मुताबिक कोहरा हाेने के दौरान सांस लेने पर धूल और प्रदूषण के कण फेफड़ों में प्रवेश करते हैं। जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है या एलर्जिक होते हैं, वे तेजी से चपेट में आ जाते हैं। शुरुआत जुकाम से होती है। समय पर इलाज न हो तो यह कण फेफड़ों में बलगम बनाने लगते हैं। श्वसन नलिका में सूजन से खांसी शुरू होती है। ऐसे में अगर बुखार होने लगे तो सतर्क होने की जरूरत है।

बचाव के उपाय
- कोहरा, धुंध होने पर मास्क जरूर लगाएं।
- गर्म कपड़ों से हाथ, पैर, कान को ढ़कें।
- रात में यात्रा न करें। मौसमी फल, सब्जी खाएं।
- अंगीठी, ब्लोअर चलाएं पर वेंटीलेशन जरूर रखें।
- भोर और शाम को घर से न निकलें। गुनगुना पानी पीएं।
- तबियत बिगड़ने पर चिकित्सक से परामर्श लें।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed