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Bareilly News: दृढ़ संकल्प से तोड़ीं बाधाएं, लिख रहीं कामयाबी की कहानी
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अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस : समाज की रूढ़िवादी सोच और शारीरिक बाधाओं को आड़े नहीं आने दे रहीं बेटियां
बरेली। बालिकाएं आज हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और दृढ़ संकल्प से बाधाओं को तोड़ रही हैं। समाज की रूढ़िवादी सोच को चुनौती देकर ये नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। इनके संघर्ष की कहानी दूसरी लड़कियों के लिए भी प्रेरणास्रोत हैं।
दृष्टिबाधित ममता बनीं प्रेरणा
आलमपुर जाफराबाद की रहने वाली ममता दृष्टिबाधित हैं। उन्होंने अपनी इस कमी को बाधा नहीं दिया। दृष्टिबाधित होने के बाद भी वह पढ़ाई कर रही हैं। ममता ने बताया कि उनके पिता नहीं है। मां खेतों में मजदूरी करती हैं। घर से एक किलोमीटर दूर स्थित स्कूल वह रोजाना अकेले ही जाती हैं। ममता ने बताया कि उनका मानना है कि शिक्षा ही हमारी स्थिति बदलने के लिए सबसे बड़ा हथियार है।
खेलों में नाम कमा रहीं अंजलि
कर्मचारी नगर की रहने वाली अंजलि मौर्य चुनाैतियों से लड़कर खेलों में नाम कमा रही हैं। एथलेटिक्स में राज्य स्तर की प्रतियोगिता की तैयारियों में जुटीं अंजलि ने बताया कि पिता रीढ़ में चोट के कारण चलने में असमर्थ हैं। इसलिए वह पिता के काम में हाथ बंटाने के बाद ही खेलों के अभ्यास के लिए समय निकाल पाती हैं।
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बुरी घटना नहीं डिगा पाई हौसला
आलमपुर जाफराबाद के पथरा गांव की रहने वाली संतोष जब आठवीं में थी, तो एक शोहदे ने उन्हें परेशान करने की कोशिश की। डरने की जगह संतोष ने उसे मुंहतोड़ जवाब दिया। हालांकि, इस घटना को लेकर रूढ़िवादी सोच वाले ग्रामीणों ने संतोष का साथ देने की जगह उल्टा उनके ऊपर ही ताने कसे। इस वजह से उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हुई। हालांकि, संतोष ने हिम्मत नहीं हारी। शिक्षकों के प्रोत्साहन पर दोबारा से पढ़ाई शुरू की। अब वह अपने गांव की उन चुनिंदा लड़कियों में शामिल हैं, जिन्होंने स्नातक किया है। संवाद
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बरेली। बालिकाएं आज हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और दृढ़ संकल्प से बाधाओं को तोड़ रही हैं। समाज की रूढ़िवादी सोच को चुनौती देकर ये नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। इनके संघर्ष की कहानी दूसरी लड़कियों के लिए भी प्रेरणास्रोत हैं।
दृष्टिबाधित ममता बनीं प्रेरणा
आलमपुर जाफराबाद की रहने वाली ममता दृष्टिबाधित हैं। उन्होंने अपनी इस कमी को बाधा नहीं दिया। दृष्टिबाधित होने के बाद भी वह पढ़ाई कर रही हैं। ममता ने बताया कि उनके पिता नहीं है। मां खेतों में मजदूरी करती हैं। घर से एक किलोमीटर दूर स्थित स्कूल वह रोजाना अकेले ही जाती हैं। ममता ने बताया कि उनका मानना है कि शिक्षा ही हमारी स्थिति बदलने के लिए सबसे बड़ा हथियार है।
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खेलों में नाम कमा रहीं अंजलि
कर्मचारी नगर की रहने वाली अंजलि मौर्य चुनाैतियों से लड़कर खेलों में नाम कमा रही हैं। एथलेटिक्स में राज्य स्तर की प्रतियोगिता की तैयारियों में जुटीं अंजलि ने बताया कि पिता रीढ़ में चोट के कारण चलने में असमर्थ हैं। इसलिए वह पिता के काम में हाथ बंटाने के बाद ही खेलों के अभ्यास के लिए समय निकाल पाती हैं।
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बुरी घटना नहीं डिगा पाई हौसला
आलमपुर जाफराबाद के पथरा गांव की रहने वाली संतोष जब आठवीं में थी, तो एक शोहदे ने उन्हें परेशान करने की कोशिश की। डरने की जगह संतोष ने उसे मुंहतोड़ जवाब दिया। हालांकि, इस घटना को लेकर रूढ़िवादी सोच वाले ग्रामीणों ने संतोष का साथ देने की जगह उल्टा उनके ऊपर ही ताने कसे। इस वजह से उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हुई। हालांकि, संतोष ने हिम्मत नहीं हारी। शिक्षकों के प्रोत्साहन पर दोबारा से पढ़ाई शुरू की। अब वह अपने गांव की उन चुनिंदा लड़कियों में शामिल हैं, जिन्होंने स्नातक किया है। संवाद