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Bareilly News: अनदेखी से बदहाल हुआ बरेली कॉलेज का वनस्पति उद्यान
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बरेली। बरेली कॉलेज का ऐतिहासिक वनस्पति उद्यान रख-रखाव के अभाव में जंगल में तब्दील हो रहा है। ऐसे में विद्यार्थी भी यहां आने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। महाविद्यालय में माली न होने की बात कहकर जिम्मेदार भी पल्ला झाड़ ले रहे हैं।
परिसर में विभाग के साथ ही वर्ष 1948 में वनस्पति उद्यान स्थापित किया गया था। इसमें विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगे हुए हैं। विद्यार्थी यहां विषय से संबंधित जानकारी प्राप्त करने आते थे। उद्यान में बैठकर पढ़ाई भी करते थे, शिक्षक भी यहां कक्षाएं लगाया करते थे।
बाद में छात्राओं के लिए छात्रावास बनाया गया, जिससे इसका क्षेत्रफल कम हो गया। वर्तमान में रख-रखाव के अभाव से उद्यान में अव्यवस्थाएं फैली हुई है। जगह-जगह घास और झाड़ियां उग आई हैं। नया सत्र शुरू होने के बाद भी विद्यार्थी इसका लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।
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मियावाकी पद्धति से उगाए गए पौधे
वनस्पति उद्यान में अशोक, रुद्राक्ष, चंदन समेत तमाम प्रजाति के पेड़-पौधे लगे हुए हैं। इसके अतिरिक्त दो वर्ष पूर्व उद्यान में वन विभाग की ओर से मियावाकी पद्धति से छोटा सा गार्डन बनाया गया। इसमें औषधीय व फलदार पौधे लगाए गए हैं। ये पांच से सात साल में विकसित हो जाते हैं।
रख-रखाव के लिए नहीं है माली
परिसर में अव्यवस्थाओं की यह स्थिति है कि संस्थान के पास माली तक नहीं है, जिससे ऐतिहासिक उद्यान का रख-रखाव कराया जा सके। कुछ माह पहले परिसर में नई सीवर लाइन डाली गई। छात्रावास का रास्ता उद्यान से होने के चलते खोदाई से कई पौधे नष्ट हो गए। संवाद
ऐतिहासिक वनस्पति उद्यान को व्यवस्थित कराया जाएगा। वर्तमान में माली नहीं होने से दिक्कतें आ रही हैं। बरसात के बाद उद्यान का रख-रखाव कराया जाएगा। - प्रो. आलोक खरे, प्रभारी, वनस्पति विज्ञान विभाग
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परिसर में विभाग के साथ ही वर्ष 1948 में वनस्पति उद्यान स्थापित किया गया था। इसमें विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगे हुए हैं। विद्यार्थी यहां विषय से संबंधित जानकारी प्राप्त करने आते थे। उद्यान में बैठकर पढ़ाई भी करते थे, शिक्षक भी यहां कक्षाएं लगाया करते थे।
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बाद में छात्राओं के लिए छात्रावास बनाया गया, जिससे इसका क्षेत्रफल कम हो गया। वर्तमान में रख-रखाव के अभाव से उद्यान में अव्यवस्थाएं फैली हुई है। जगह-जगह घास और झाड़ियां उग आई हैं। नया सत्र शुरू होने के बाद भी विद्यार्थी इसका लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।
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मियावाकी पद्धति से उगाए गए पौधे
वनस्पति उद्यान में अशोक, रुद्राक्ष, चंदन समेत तमाम प्रजाति के पेड़-पौधे लगे हुए हैं। इसके अतिरिक्त दो वर्ष पूर्व उद्यान में वन विभाग की ओर से मियावाकी पद्धति से छोटा सा गार्डन बनाया गया। इसमें औषधीय व फलदार पौधे लगाए गए हैं। ये पांच से सात साल में विकसित हो जाते हैं।
रख-रखाव के लिए नहीं है माली
परिसर में अव्यवस्थाओं की यह स्थिति है कि संस्थान के पास माली तक नहीं है, जिससे ऐतिहासिक उद्यान का रख-रखाव कराया जा सके। कुछ माह पहले परिसर में नई सीवर लाइन डाली गई। छात्रावास का रास्ता उद्यान से होने के चलते खोदाई से कई पौधे नष्ट हो गए। संवाद
ऐतिहासिक वनस्पति उद्यान को व्यवस्थित कराया जाएगा। वर्तमान में माली नहीं होने से दिक्कतें आ रही हैं। बरसात के बाद उद्यान का रख-रखाव कराया जाएगा। - प्रो. आलोक खरे, प्रभारी, वनस्पति विज्ञान विभाग