Modi 3.0 : जानिए कौन हैं बीएल वर्मा, जिन्हें मोदी सरकार में लगातार दूसरी बार बनाया गया मंत्री
लोकसभा चुनाव 2024 में भले ही भाजपा बदायूं सीट हार गई हो, लेकिन दिल्ली में जिले का दबदबा कायम रहेगा। बदायूं के उझानी के रहने वाले बीएल वर्मा को मोदी कैबिनेट में लगातार दूसरी बार मंत्री बनाया गया है।
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केंद्रीय मंत्रिमंडल में बदायूं के बीएल वर्मा राज्य मंत्री बनाए गए हैं, इससे उनका राजनीतिक कद और बढ़ गया है। केंद्रीय सहकारिता राज्यमंत्री रहते हुए सत्ता और संगठन में समन्वय के साथ काम करने की वजह से उनका भाग्य चमका है। जुलाई 2021 में मंत्री बनने के बाद समर्पण भाव से जुटे रहे। उन्होंने सत्ता और संगठन से जुड़े काम किए।
पिछड़ों में खासकर लोधे-राजपूत समुदाय में अपनी पकड़ साबित कर देने वाले बीएल वर्मा ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत स्व. कल्याण सिंह के सानिध्य में की। लोधे-राजपूत बहुल इलाकों में उनका कद बढ़ा तो पार्टी ने उन्हें सबसे पहले संगठन में ब्रज प्रांत के क्षेत्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी।
इसके बाद सत्ता और संगठन का काम करते हुए उन्होंने प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के कई राज्यों में पार्टी और सरकार से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर खुद को साबित कर दिया कि जिम्मेदारी जो भी मिलेगी, उसे पूरा कर देंगे।
भाजपा के सबसे बड़े रणनीतिकार अमित शाह के सहकारिता मंत्रालय में उन्हें राज्यमंत्री बनाया गया तो वह उनकी उम्मीदों पर भी खरे उतरे। पूर्वोत्तर के राज्यों में खासकर विकास की योजनाओं के क्रियान्वयन से लेकर उनकी निगरानी में भी बीएल वर्मा का अहम रोल रहा।
बताते हैं कि पिछले कार्यकाल में राज्यमंत्री के रूप में बीएल वर्मा ने भाजपा के सहकार से समृद्धि की ओर अभियान को मजबूती प्रदान की थी। चर्चा तो उनके नाम की उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनाए जाने की भी चली थी, लेकिन उन्हें फिर से मंत्रिमंडल में स्थान मिलना यह भी साबित कर रहा है कि उन्होंने सत्ता और संगठन को वरीयता प्रदान की। पार्टी नेतृत्व इस तथ्य से बखूबी वाकिफ है।
जन्म 07 अगस्त-1961, जन्मस्थान- ज्योरा पारवाला, उझानी।
भारतीय जीवन निगम से बतौर व्यवसायिक अभिकर्ता शुरूआत।
1980 में युवा मोर्चा के कार्यकर्ता बने।
1984 में भाजपा युवा मोर्चा के जिला महामंत्री, फिर प्रदेश मंत्री।
1987 में पूर्व मुख्यमंत्री स्व. कल्याण सिंह को राजनीतिक गुरु बनाया।
1989 में भाजपा पंचायती राज प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष, बाद में प्रदेश स्तर पर चमके।
1999 में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के साथ भाजपा से दूर हो गए।
2009 में कल्याण सिंह की राष्ट्रीय क्रांति पार्टी में प्रदेश अध्यक्ष का पदभार मिला।
2013 में कल्याण सिंह के साथ भाजपा में घर वापसी हुई।
2016 में भाजपा के बृज क्षेत्र के अध्यक्ष फिर प्रदेश उपाध्यक्ष बने।
2018 में यूपी सिडको के अध्यक्ष (दर्जा राज्यमंत्री) का पदभार मिला। भाजपा के अब तक तीन बार स्टार प्रचारक भी बने।
2020 में भाजपा ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा में भेजा।
नरेंद्र मोदी- 02 सरकार में 08 जुलाई-21 को सहकारिता एवं पूर्वोत्तर विकास विभाग में राज्यमंत्री बने।
विधानसभा चुनाव में पूरे प्रदेश में किया था प्रचार
बीएल वर्मा ने वर्ष- 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी के स्टार प्रचारक होने के नाते पूरे प्रदेश में चुनावी सभाओं को संबोधित किया था। लोधे-राजपूत बहुल सीटों पर उनका स्ट्राइक रेट बेहतरीन रहा। मध्य प्रदेश विधानसभा के चुनाव में वह प्रचार करने गए थे। पिछड़े समुदाय के मतदाताओं की अधिकता वाली सीटों पर उन्होंने पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने का काम किया था। तेलंगाना में भी प्रचार को पहुंचे थे।
एटा से राजवीर सिंह जीतते तो भी चमकते बीएल वर्मा
लोकसभा चुनाव में एटा सीट से पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह की हार को लेकर राजनीतिक स्तर पर कयासबाजी का दौर शुरू हो गया था। इसके विपरीत, पार्टी नीतियों के जानकार बताते हैं कि राजवीर सिंह अगर जीत भी जाते तो भी भाजपा एक ही परिवार के दो सदस्यों को एक साथ सत्ता सुख प्रदान नहीं करती। राजवीर सिंह के बेटे संदीप सिंह प्रदेश सरकार में मंत्री हैं तो उन्हें केंद्र में मंत्री पद कैसे नसीब हो पाता। इस हालात में बीएल वर्मा का दावा शुरू से ही मजबूत रहा।