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विधानसभा चुनावः भाजपा से निराश चेहरों को नए रास्तों की तलाश
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बरेली। जिले की सभी नौ सीटों पर टिकट घोषित होने के बाद भाजपा में भारी उथल-पुथल का दौर शुरू हो गया है। बिथरी, नवाबगंज और कैंट से शुरू हुए विरोध के सुर अब भोजीपुरा, मीरगंज और फरीदपुर तक पहुंच गए हैं। छह सीटों पर घोषित प्रत्याशियों को लेकर मची भारी हलचल के बीच कुछ सीटों पर दावेदारों ने नए रास्तों की भी तलाश शुरू कर दी है। इससे एक-दो दिन में भाजपा से कुछ विधानसभा क्षेत्रों में कुछ प्रभावशाली चेहरों के अलग होने की आशंका बढ़ गई है।
पहले चरण में भाजपा ने जिले की सात सीटों पर प्रत्याशी घोषित किए थे। इस सूची में बिथरी चैनपुर में विधायक राजेश मिश्रा पप्पू भरतौल और कैंट में विधायक राजेश अग्रवाल का टिकट काट दिया गया था। इनमें बिथरी सीट पर भाजपा के फैसले का भारी विरोध अब तक जारी है। इसके अलावा नवाबगंज में दिवंगत विधायक केसर सिंह गंगवार के बेटे विशाल गंगवार ने टिकट पर दावेदारी ठोक रखी थी, लेकिन उन्हें भी टिकट नहीं मिला। उनके समर्थक भी उन पर चुनाव लड़ने का दबाव बना रहे हैं। मीरगंज में भी यही स्थिति है।
भाजपा में शुरू हुआ यह विरोध भोजीपुरा और बहेड़ी में टिकट घोषित होने के बाद और बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर भाजपा के समर्थक प्रत्याशियों का खुला विरोध कर रहे हैं। पार्टी में कद्दावर माने जाने वाले जो लोग किसी न किसी सीट से टिकट पर दावा कर रहे थे, वे भी खुलकर निराशा जता रहे हैं। सोशल मीडिया पर लगातार प्रतिक्रियाओं के अलावा दावेदारों और उनके समर्थकों की बैठकों का दौर भी शुरू हो गया है। इस उथल-पुथल की वजह से एक-दो दिन में भाजपा से कुछ चेहरों के अलग होने की आशंका जताई जा रही है।
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पहले चरण में भाजपा ने जिले की सात सीटों पर प्रत्याशी घोषित किए थे। इस सूची में बिथरी चैनपुर में विधायक राजेश मिश्रा पप्पू भरतौल और कैंट में विधायक राजेश अग्रवाल का टिकट काट दिया गया था। इनमें बिथरी सीट पर भाजपा के फैसले का भारी विरोध अब तक जारी है। इसके अलावा नवाबगंज में दिवंगत विधायक केसर सिंह गंगवार के बेटे विशाल गंगवार ने टिकट पर दावेदारी ठोक रखी थी, लेकिन उन्हें भी टिकट नहीं मिला। उनके समर्थक भी उन पर चुनाव लड़ने का दबाव बना रहे हैं। मीरगंज में भी यही स्थिति है।
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भाजपा में शुरू हुआ यह विरोध भोजीपुरा और बहेड़ी में टिकट घोषित होने के बाद और बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर भाजपा के समर्थक प्रत्याशियों का खुला विरोध कर रहे हैं। पार्टी में कद्दावर माने जाने वाले जो लोग किसी न किसी सीट से टिकट पर दावा कर रहे थे, वे भी खुलकर निराशा जता रहे हैं। सोशल मीडिया पर लगातार प्रतिक्रियाओं के अलावा दावेदारों और उनके समर्थकों की बैठकों का दौर भी शुरू हो गया है। इस उथल-पुथल की वजह से एक-दो दिन में भाजपा से कुछ चेहरों के अलग होने की आशंका जताई जा रही है।
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