{"_id":"5a0762fa4f1c1bf3538bca51","slug":"bhavani-s-craving-kadhavar-s-foreign-departure","type":"story","status":"publish","title_hn":"भवानी की दीवानगी.. कद्दावर की विदेश रवानगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भवानी की दीवानगी.. कद्दावर की विदेश रवानगी
बरेली।
Updated Sun, 12 Nov 2017 02:22 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अबकी भाजपा खेमे में मेयर चुनाव का माहौल पहले जैसा नहीं है। रूठों, छूटों और ‘फूटों’ को सुलझाने के लिए शहर के दिग्गज नहीं, बाहरी हस्तियाें ने यहां डेरा जमाया हुआ है। ब्रज प्रांत के क्षेत्रीय मंत्री भवानी सिंह ने खुद चुनावी कमान संभाली है। वे सभी को बुलाकर बैठकें कर रहे हैं। किसी को दुलार, किसी को प्यार भरी दुत्कार तो कहीं-कहीं अनुशासनहीनता की फुसकार से माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इससे पार्टी, संगठन और संघ तक की फौज में भवानी सिंह को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं। इसी बीच खबरें हैं कि भाजपा के एक कद्दावर विदेश रवाना हो गए हैं।
कुल पंद्रह दिन में बरेली भाजपा में बदले पूरे माहौल को लेकर भी कानाफूसी तेज हुई है। अब तक की मेहनत-मशक्कत के बाद ऊपरी तौर पर तो अधिकतर रूठों ने जुदा दिखकर माहौल सुधरा दिखाया है, मगर फोटो खिंचवाकर अपनी मौजूदगी दिखाकर अधिकतर घर बैठ गए या फिर मजबूरी बताकर कैंप में जुटने का हवाला देकर दूसरों को भी घर बैठा दिया। गोपनीय बैठकें उन नेताओं के कार्यालयों नहीं किन्हीं अपरिचितों के घरों पर बुलायी जा रही हैं। अपनी गाड़ियों के बजाय दूसरों की गाड़ियों या दुपहियों से लोग वहां पहुंच रहे हैं। वहां बता रहे हैं कि परसों, कल और आज कौन सी हस्ती ने कहां बुलाकर क्या समझाया या ‘धमकाया’। खुद के अस्तित्व का सवाल भी इन रूठों को खाए जा रहा है कि कहीं बाहरी दिग्गज उनके खिलाफ ऊपर तक रिपोर्ट न भेज दें। इन्हीं सब को ध्यान में रखकर शादी-ब्याह या किसी पार्टी में संघ या संगठन वाले अपने साथियों को किनारे ले जाते हैं। पर्दे की ओट में खाना खाते-खाते अंदरखाने की पूरी राजनीति पर मंत्रणा हो जाती है। मौजूदा हालात में पार्टी के फैसले, स्थिति और खुद के भविष्य पर चिंता जताई जा रही है। हालांकि भाजपा प्रत्याशी की टीम सभी के साथ आने और चुनाव में जुटने से खुश दिखाई दे रही है। खुशी की बात भी है, क्योंकि कद्दावर नेताओं के चहेते, संघ से जुड़े डॉक्टर, व्यापारी, नेता समेत अधिकतर नेता अब प्रत्याशी के साथ उनके धार्मिक आयोजनों में भी भवानी की आरती उतारते दिखाई देने लगे हैं।
विज्ञापन
कुल पंद्रह दिन में बरेली भाजपा में बदले पूरे माहौल को लेकर भी कानाफूसी तेज हुई है। अब तक की मेहनत-मशक्कत के बाद ऊपरी तौर पर तो अधिकतर रूठों ने जुदा दिखकर माहौल सुधरा दिखाया है, मगर फोटो खिंचवाकर अपनी मौजूदगी दिखाकर अधिकतर घर बैठ गए या फिर मजबूरी बताकर कैंप में जुटने का हवाला देकर दूसरों को भी घर बैठा दिया। गोपनीय बैठकें उन नेताओं के कार्यालयों नहीं किन्हीं अपरिचितों के घरों पर बुलायी जा रही हैं। अपनी गाड़ियों के बजाय दूसरों की गाड़ियों या दुपहियों से लोग वहां पहुंच रहे हैं। वहां बता रहे हैं कि परसों, कल और आज कौन सी हस्ती ने कहां बुलाकर क्या समझाया या ‘धमकाया’। खुद के अस्तित्व का सवाल भी इन रूठों को खाए जा रहा है कि कहीं बाहरी दिग्गज उनके खिलाफ ऊपर तक रिपोर्ट न भेज दें। इन्हीं सब को ध्यान में रखकर शादी-ब्याह या किसी पार्टी में संघ या संगठन वाले अपने साथियों को किनारे ले जाते हैं। पर्दे की ओट में खाना खाते-खाते अंदरखाने की पूरी राजनीति पर मंत्रणा हो जाती है। मौजूदा हालात में पार्टी के फैसले, स्थिति और खुद के भविष्य पर चिंता जताई जा रही है। हालांकि भाजपा प्रत्याशी की टीम सभी के साथ आने और चुनाव में जुटने से खुश दिखाई दे रही है। खुशी की बात भी है, क्योंकि कद्दावर नेताओं के चहेते, संघ से जुड़े डॉक्टर, व्यापारी, नेता समेत अधिकतर नेता अब प्रत्याशी के साथ उनके धार्मिक आयोजनों में भी भवानी की आरती उतारते दिखाई देने लगे हैं।
विज्ञापन