बरेली: दावों और हालातों के बीच उलझा 20 मौतों का सच, क्योंकि हर मौत पर सरकारी मोहर जरूरी होती है
निजी लैब की जांच में संक्रमित निकले लोगों को भी सरकारी रिपोर्ट में बताया गया निगेटिव, लगातार मौतों से दहशतजदा गांव के लोग अजब से असमंजस में भी उलझे....
विस्तार
बमुश्किल 15 दिन के अंदर ताबड़तोड़ ढंग से 20 से ज्यादा मौतें होने के बावजूद जब तक सरकारी अमला जांच करने नहीं पहुंचा था, तब तक क्यारा गांव में सिर्फ दहशत थी लेकिन अब जब कोरोना से मौतें होने की बात साफ तौर पर खारिज की जा चुकी है, गांव के दहशत के माहौल में गुस्से भरा असमंजस और शामिल हो गया है।
सरकारी जांच में कई लोग ऐसे भी निगेटिव बताए गए हैं जिन्हें प्राइवेट लैब की जांच में पॉजिटिव बताया गया है। दोनों रिपोर्ट भी एक-दो दिन के फर्क पर आई हैं। इसके बाद गांव वाले खुलकर यह आरोप लगा रहे हैं कि सरकारी मशीनरी कोरोना से हुई मौतों को छिपाने की कोशिश कर रही है।
क्यारा शहर से सटा गांव है जहां ब्लॉक मुख्यालय होने के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी है। इसके बावजूद तमाम लोगों में बुखार और सांस लेने में दिक्कत के साथ 15 दिन पहले यहां मौतों का सिलसिला शुरू हुआ तो अब तक थमने में नहीं आया है। लक्षणों के आधार पर माना गया कि ये सारी कोरोना की वजह से हुई हैं। इस बीच गांव के लोग इलाज कराने सरकारी अस्पताल पहुंचते रहे लेकिन वहां उन्हें न दवा मिली न जांच की सुविधा।
आठ मई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आने से एक दिन पहले गांव के एक व्यक्ति ने उन्हें ट्वीट कर गांव में एक-एक दिन में पांच-छह मौतें होने की जानकारी देकर जांच न कराए जाने की शिकायत की तो यहां टीम भेजकर लोगों की एंटीजन जांच कराई गई लेकिन इस जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने एलान कर दिया कि गांव में कोरोना संक्रमितों की संख्या इक्का-दुक्का तक ही है। स्वास्थ्य विभाग ने इसके साथ गांव में एक भी मौत कोरोना से होने से इनकार कर दिया।
विरोधाभास: न कोरोना से मौत होना माना न निजी लैब की रिपोर्ट को चुनौती दी
क्यारा गांव के अनिल कुमार की मौत हो चुकी है लेकिन उनकी मृत्यु से पहले तक सरकारी जांच रिपोर्ट ने उनके परिवार को काफी असमंजस में रखा। बुखार, सांस लेने में दिक्कत और खांसी जैसे कोरोना के कई लक्षण अनिल में थे लेकिन 18 अप्रैल को आई सरकारी लैब की आरटीपीसीआर रिपोर्ट में उन्हें निगेटिव बताया गया। इलाज के बीच ही परिवार वालों ने 21 अप्रैल को लाल पैथ लैब से उनकी जांच कराई तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इस बीच उनकी हालत इतनी बिगड़ गई कि उन्हें बचाया नहीं जा सका।
इसी तरह गांव के अंकित कुमार सिंह को भी सरकारी जांच में निगेटिव बताया गया लेकिन उन्होंने थायरोकेयर लैब से जांच कराई तो उनकी रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई। रोहित कुमार सिंह की एंटीजन रिपोर्ट निगेटिव थी और आरटीपीसीआर पॉजिटिव। गांव के तमाम और लोगों के लिए भी सरकारी रिपोर्ट ने इसी तरह का असमंजस पैदा किया। कई की मौत भी हो गई। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने फिर भी इनकी मौत को कोरोना से होना नहीं माना। न उन निजी लैब की रिपोर्ट को चुनौती दी जिन्होंने इन लोगों को पॉजिटिव बताया था।
हद... अस्पतालों में भर्ती मरीजों की रिपोर्ट भी बता दी निगेटिव
पूर्व प्रधान सर्वेश्वर पाल सिंह का कहना है कि पहले तो गांव में मरीजों की जांच ही नहीं की जा रही थी। गांव वालों ने आवाज उठाई तब तो कहीं प्रशासन ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एंटीजन जांच किट उपलब्ध कराईं। पहले दिन 40 संदिग्ध मरीजों की जांच हुई तो एंटीजन किट ने उन्हें निगेटिव बता दिया जबकि इनमें कई की हालत गंभीर थी। बाद में शहर में इलाज के दौरान इन्हीं में से कुछ की मौत भी हो गई।
असमंजस की स्थिति में उन्होंने सिमरा की इंदिरा, रोहित और पड़ेरा की आफ्ता समेत कई ऐसे लोगों के टेस्ट भी सरकारी अस्पताल में कराए जो पहले से संक्रमित थे और जिनका इलाज शहर के अस्पतालों में चल रहा था। हद यह थी कि जांच में इन्हें भी निगेटिव बता दिया गया। उनके बेटे अंकित की रिपोर्ट भी निगेटिव बताई गई जिसकी वजह से उसकी जान पर बन आई। बमुश्किल उसे बचाया जा सका।
जिन्हें निगेटिव बताया, उन्हें भी कोविड की दवाएं
सरकारी मशीनरी ने गांव में जांच करने के बाद बुखार और खांसी जैसे लक्षणों से पीड़ित जिन लोगों को निगेटिव बताया है, उन्हें भी कोविड की दवाएं बांटी हैं। इससे सवाल उठ रहा है कि अगर कोई कोविड से पीड़ित नहीं है तो उसे कोरोना मरीजों को दी जाने वाली दवाएं क्यों दी जा रही हैं। हालांकि इस पर अफसरों का तर्क है कि ऐसा एहतियातन किया गया है। बता दें कि शहर के कई निजी अस्पतालों में अब भी गांव के तमाम लोगों का कोरोना का इलाज चल रहा है। शनिवार को गांव पहुंची अमर उजाला की टीम को लोगों ने बताया कि अब भी गांव के लगभग हर घर में कोई न कोई बुखार से तप रहा है। सरकारी अमला माने या न माने, वे लोग इसे कोरोना ही मान रहे हैं। क्योंकि कोरोना मानकर इलाज नहीं कराएंगे तो जान भी नहीं बचेगी।
हाल ही में ये मौतें और
गांव निवासी शिक्षामित्र अनिल सिंह, अमरेंद्र, उमा देवी, जितेंद्र सिंह, नरेश, कृष्णपाल कश्यप, पंडित रामसेवक, बुधपाल, राम रहीम, मुन्नी देवी, कस्तूरी जाटव, रमनपाल की पत्नी आदि की मौत हो चुकी है।
नए प्रधान बोले- सैनिटाइजेशन करा रहे हैं
गांव के नए प्रधान कृष्णपाल का कहना है कि उनकी जानकारी के मुताबिक मरने वाले अधिकांश लोग बुजुर्ग हैं। मौत की वजह स्वाभाविक भी हो सकती है। अभी उन्होंने शपथ नहीं ली है और न ही ग्राम पंचायत को कोई बजट जारी हुआ है। फिर भी क्यारा व उसके मजरों में स्प्रे के लिए निजी तौर पर करीब अस्सी किलो दवा मंगाई है। इससे सैनिटाइजेशन करा रहे हैं।