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सपा सरकार में बढ़ीं योगेंद्र की मुश्किलें, घोषित हुआ फरार
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बदायूं। बसपा सरकार में विधायक रहा योगेंद्र का समय सपा सरकार के आते ही खराब होने लगा। उसने बीमारी का हवाला देकर बचाव की कोशिश की पर उन्हें बदायूं पुलिस ने नोएडा से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
प्रदेश में 2012 के चुनाव से पहले तक बसपा की सरकार थी। योगेंद्र सागर बिल्सी सुरक्षित सीट से विधायक था। ऐसे में मामला दर्ज होने के बाद भी पुलिस उस पर हाथ डालने से कतराती रही। अप्रैल 2011 में योगेंद्र सागर के खिलाफ कुर्की वारंट भी जारी किया गया। 2012 में सपा की सरकार बनने के साथ ही योगेंद्र सागर की मुश्किलें बढ़ने लगीं। अगस्त 2012 में उसको फरार घोषित कर दिया गया। सितंबर 2012 में उसका बैंक खाता सील करने के साथ वाहन, प्लॉट आदि कुर्क कर दिए गए। उस समय सागर पश्चिम बंगाल समेत दूसरे प्रदेशों में छिपकर वक्त गुजारता रहा। दबाव बढ़ने पर अप्रैल 2014 में योगेंद्र सागर नोएडा के निजी अस्पताल में भर्ती हो गया। बदायूं पुलिस वहां से उन्हें गिरफ्तार कर लाई। सागर ने बीमारी की बात बताकर अस्पताल जाने की इच्छा जताई पर उन्हें जेल भेजा गया। हालांकि बाद में जेल प्रशासन ने लखनऊ में भर्ती कराकर इलाज कराया।
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तब पुलिस बोली- दूसरे समुदाय के युवक संग गई छात्रा
योगेंद्र सागर के विधायक रहते पुलिस कभी उन पर कार्रवाई न कर सकी। दबाव में रिपोर्ट लिखी भी गई तो बिल्सी पुलिस ने उच्चाधिकारियों को लिखित में जानकारी दी कि पीड़िता का विधायक व उनके साथियों ने अपहरण नहीं किया, बल्कि दूसरे समुदाय के युवक संग चली गई है। इस मामले में पीड़ित परिवार की आपत्ति व जोरदार पैरवी के बाद पुलिस को बैकफुट पर आकर सही विवेचना करनी पड़ी। संवाद
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प्रदेश में 2012 के चुनाव से पहले तक बसपा की सरकार थी। योगेंद्र सागर बिल्सी सुरक्षित सीट से विधायक था। ऐसे में मामला दर्ज होने के बाद भी पुलिस उस पर हाथ डालने से कतराती रही। अप्रैल 2011 में योगेंद्र सागर के खिलाफ कुर्की वारंट भी जारी किया गया। 2012 में सपा की सरकार बनने के साथ ही योगेंद्र सागर की मुश्किलें बढ़ने लगीं। अगस्त 2012 में उसको फरार घोषित कर दिया गया। सितंबर 2012 में उसका बैंक खाता सील करने के साथ वाहन, प्लॉट आदि कुर्क कर दिए गए। उस समय सागर पश्चिम बंगाल समेत दूसरे प्रदेशों में छिपकर वक्त गुजारता रहा। दबाव बढ़ने पर अप्रैल 2014 में योगेंद्र सागर नोएडा के निजी अस्पताल में भर्ती हो गया। बदायूं पुलिस वहां से उन्हें गिरफ्तार कर लाई। सागर ने बीमारी की बात बताकर अस्पताल जाने की इच्छा जताई पर उन्हें जेल भेजा गया। हालांकि बाद में जेल प्रशासन ने लखनऊ में भर्ती कराकर इलाज कराया।
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तब पुलिस बोली- दूसरे समुदाय के युवक संग गई छात्रा
योगेंद्र सागर के विधायक रहते पुलिस कभी उन पर कार्रवाई न कर सकी। दबाव में रिपोर्ट लिखी भी गई तो बिल्सी पुलिस ने उच्चाधिकारियों को लिखित में जानकारी दी कि पीड़िता का विधायक व उनके साथियों ने अपहरण नहीं किया, बल्कि दूसरे समुदाय के युवक संग चली गई है। इस मामले में पीड़ित परिवार की आपत्ति व जोरदार पैरवी के बाद पुलिस को बैकफुट पर आकर सही विवेचना करनी पड़ी। संवाद
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