मुरादाबाद मदरसा प्रकरण: 'छात्रा से कौमार्य प्रमाणपत्र मांगना गलत', बरेलवी उलमा ने बताया घिनौनी हरकत
मुरादाबाद के मदरसे की घटना पर बरेलवी उलमा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मदरसे में छात्रा से कौमार्य प्रमाणपत्र मांगना निहायत ही गलत और समाज के लिए घिनौनी हरकत है।
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मुरादाबाद के मदरसे में 13 वर्षीय छात्रा से कौमार्य प्रमाणपत्र मांगे जाने को बरेलवी उलमा ने गलत करार दिया है। तीन तलाक के खिलाफ लड़ने वाली निदा खान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि मुरादाबाद के मदरसे में छात्रा से कौमार्य प्रमाणपत्र मांगा जाना निहायत ही घिनौनी हरकत है। मदरसे हमेशा सांप्रदायिक सोच रखने वालों के निशाने पर रहते हैं। इस तरह की परिस्थितियों में जवाब देना मुश्किल हो जाता है।
राहे सुलूक के अध्यक्ष मौलाना मुजाहिद हुसैन निजामी ने कहा कि मुरादाबाद के मदरसा शिक्षक ने पूरी मदरसा बिरादरी को शर्मिंदा कर दिया है। मदरसा संचालकों को यह ध्यान देना होगा कि जिस व्यक्ति की नियुक्ति कर रहे हैं, वह किस नजरिये का है। मदरसों में बड़े सुधार की जरूरत है।
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जमात रजा-ए-मुस्तफा के महासचिव फरमान हसन खान ने कहा कि मदरसों में कौमार्य प्रमाणपत्र मांगना बिल्कुल अनुचित है। इस तरह की हरकतें सरकार के नारी सशक्तिकरण के प्रयासों को कमजोर करती हैं। मदरसे सिर्फ़ धार्मिक शिक्षा के केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक मूल्यों को संवारने के संस्थान हैं। इन हरकतों से न तो शिक्षा का स्तर सुधरेगा, न ही नारी सशक्तिकरण को बल मिलेगा।
निदा ने मदरसा संचालकों पर उठाए सवाल
आला हजरत हेल्पिंग सोसाइटी की अध्यक्ष निदा खान ने कहा कि ऐसे मौलाना अपना मानसिक स्तर दिखाते हैं और बताते हैं कि वे महिलाओं को किस नजरिये से देखते हैं। ऐसे लोग समाज के लिए खतरनाक हो सकते हैं। यही लोग हमारे समाज के दुश्मन बनते हैं। इनकी वजह से हमारी बहन-बेटियां सुरक्षित महसूस नहीं करतीं।
उन्होंने कहा कि जहां लड़कियां चांद पर पहुंच रही हैं, वहीं ऐसे लोग महिलाओं को एक गुलाम से ज्यादा कुछ नहीं समझते। ये लोग औरतों की गरिमा को कोई अहमियत नहीं देते और अपनी घटिया सोच को पूरी सोसाइटी पर थोपने की कोशिश करते हैं। इनके सम्मानित पदों पर बैठे होने की वजह से लोग खामोश रहते हैं।