बरेली-सीतापुर फोरलेनः निर्माण की इस गति पर तो कछुआ भी शरमा जाए

बरेली।   Updated Sat, 06 May 2017 01:19 AM IST
Bareilly-Sitapur Forelane: At this speed of construction, the tortoise can be ashamed too
Bareilly-Sitapur Forelane: At this speed of construction, the tortoise can be ashamed too - फोटो : google
तय समय से चार साल लेट चल रहे बरेली-सीतापुर फोरलेन निर्माण में देरी से आम जनता की दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रही। बरेली से शाहजहांपुर होते हुए सीतापुर तक फोरलेन कदम-कदम पर फेल है। फतेहगंज पश्चिमी से लेकर कटरा, तिलहर, शाहजहांपुर में बरेली मोड़, हरदोई बाईपास, लखीमपुर खीरी में गोमती और शारदा नदी, महोली बाईपास के अलावा सीतापुर बाईपास पर हर घंटे में जाम लगने चिलचिलाती धूप से यात्रियों को परेशान होना पड़ रहा है। निर्माण की धीमी गति पर तो यात्री खफा होने लगे हैं। उनके मुंह से यही निकलता है कि एनएचएआई की इस तेजी पर तो कछुआ भी शरमा जाए। 
 ओवरलोडिंग और अवैध खनन बंद होने से कच्ची सामग्री महंगी होने का बहाना बनाकर कार्यदायी संस्था एरा इन्फ्रा लि. ने लंबे समय से काम ठप कर रखा था। दोबारा काम शुरू कराने के लिए 26 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हस्तक्षेप करना पड़ा। पीएम ने वीडियो कांफ्रें सिंग के माध्यम से यूपी के चीफ सेक्रेटरी को अवरोध दूर कराने के निर्देश दिए। इसके बाद शासन ने बरेली और लखनऊ के कमिश्नरों की संयुक्त मीटिंग बुलाकर अतिक्रमण, पेड़ कटान और बिजली की लाइन  शिफ्ट करने की समस्याएं हल कराने की बात कही। एनएचएआई की सुस्ती के चलते बरेली से शाहजहांपुर तक रोडवेज का सफर ढाई से तीन घंटे तक हो चुका है जबकि सामान्य स्थितियों में रोडवेज बसें 1.30 घंटे में पहुंचा देती हैं। यही हाल शाहजहांपुर से सीतापुर तक है। 156 किलोमीटर फोरलेन मार्ग 30 अप्रैल 2010 को स्वीकृत किया गया था। एग्रीमेंट के अनुसार 1951 करोड़ का ये प्रोजेक्ट 910 दिन में वर्ष 2013 तक पूरा होना था। फतेहगंज पूर्वी, तिलहर, शाहजहांपुर में फ्लाईओवर बनने के चलते जाम की समस्या विकराल है। लखीमपुर खीरी में गोमती नदी और शारदा कैनाल, सीतापुर बाई पास और महोली में भी वाहनों को रोजाना दो से ढाई घंटे तक जाम से जूझना पड़ रहा है। फोरलेन निर्माण में आने वाली अतिक्रमण, बिजली, टेलीफोन लाइनें शिफ्ट करने, पेड़ काटने समेत आने वाली अन्य रुकावटें अभी बरकरार हैं। कभी नोटबंदी तो कभी अन्य वजहों दो साल से ज्यादा समय तक फोरलेन का काम रुका रहा। पीडब्ल्यूडी मंत्री नितिन गडकरी ने 2016 में वीडियो कांफ्रेसिंग में ये मामला संज्ञान में आने के बाद काम शुरू कराया था। प्रोजेक्ट में देरी के जिम्मेदार एनएचएआई इंजीनियर और ठेकेदार फर्म के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। 

तीन माह में शिफ्ट होंगे बिजली टावर
बरेली लखनऊ फोरलेन निर्माण कार्य में बिजली लाइनें कई स्थानों पर निर्माण कार्य में रुकावट पैदा कर रही हैं। अब फरीदपुर स्थित पांच किलोमीटर लंबे बाईपास पर दस टावर बाधा बने हुए हैं। बिजली विभाग ने इन्हें शिफ्ट करने के लिए टेंडर मांगे हैं जो 11 मई को खुलेंगे। अधिशासी अभियंता (पारेषण) तुलसी राम ने बताया कि टेंडर होने के बाद कम से कम तीन माह में दस टावर शिफ्ट होंगे।

 प्रधानमंत्री की वीडियो कांफ्रेसिंग के बाद लखनऊ और बरेली के कमिश्नरों की मीटिंग हो चुकी है। खनन पर रोक हटने के बाद काम में तेजी लाई गई है। दिसंबर 2017 तक फोरलेन पूरा करने का लक्ष्य है। काम में और तेजी लाई जाएगी- वरुणचारी, उप प्रबंधक तकनीकी एनएचएआई   
 
बरेली-सीतापुर फोरलेन का काम लेट चल रहा है। कंपनी ने एक साल से ज्यादा टाइम पहले ही खो दिया। हम प्रोजेक्ट की लगातार मानीटरिंग कर रहे हैं। 15 से 20 दिन के अंदर काम में प्रोग्रेस दिखाई देगी-  पीवी जगनमोहन, कमिश्नर बरेली 

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