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जिंदा जले 8 बराती: सूनी आंखों में दर्द का सैलाब...सन्नाटे को चीर रहीं चीखें, सलमा बोली-मेरे शौहर अभी जिंदा हैं
Tue, 12 Dec 2023 11:56 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 12 Dec 2023 11:56 AM IST
सार
Bareilly Car Fire Accident: बरेली में हुए दर्दनाक हादसे की वजह तकनीकी जांच में सामने आई है। टायर फटने से कार डिवाइडर पार कर डंपर से भिड़ गई। डीजल टैंक फटने से आग भड़क गई और आठ लोग कार के अंदर ही वह जिंदा जल गए।
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Bareilly Road Accident
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बरेली के भोजीपुरा में कार हादसे में सात लोगों की मौत के बाद जाम सावंत शुमाली गांव का माहौल मातमी बना हुआ है। ग्रामीणों के चेहरे उदास हैं और रोते-रोते आंखें बोझिल सी हो गई हैं। गांव की गलियां वीरान पड़ी हैं। मृतकों के घर से उठती चीखें रह-रहकर सन्नाटे को चीर रही हैं। अपनों को खोकर परिजनों की सूनी आंखों में दर्द का सैलाब उमड़ रहा है।
सोमवार को मृतक अय्यूब, बाबू, आसिफ, आलिम के तीजे (सोयम) की रस्म अदा की गई। उसके बाद फातेहा ख्वानी हुई और मृतकों के लिए मगफिरत की दुआ की गई। देर शाम तक रिश्तेदारों का आना-जाना लगा रहा। सभी ने एक साथ खिराज-ए-अकीदत पेश की। बाकी तीन लोगों की सोयम की रस्म मंगलवार को अदा की जाएगी।
कार चालक मितापुर जागीर निवासी फुरकान की सोयम की रस्म भी सोमवार को ही अदा की गई। दस हजार की आबादी वाले जाम गांव में मृतकों के घर आसपास होने की वजह से उसी गली में लोगों की आवाजाही ज्यादा है। बाकी गलियों में भी पहले की तरह चहल-पहल नहीं है। बस्ती के इन घरों में जब कोई मेहमान आता है, महिलाओं की चीख गूंज उठती है।
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बाकी गलियों में सन्नाटे के बीच बुजुर्ग चर्चा कर रहे थे कि आज तक गांव में इस तरह का कोई हादसा नहीं हुआ था, न ही इतने लोगों की एक साथ जान गई थी। बुजुर्ग कह रहे हैं कि गांव की खुशी को किसी की नजर लग गई। नौजवान अपने साथियों के संग बिताए दिनों को याद कर अफसोस जताते दिखे।
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सोमवार को मृतक अय्यूब, बाबू, आसिफ, आलिम के तीजे (सोयम) की रस्म अदा की गई। उसके बाद फातेहा ख्वानी हुई और मृतकों के लिए मगफिरत की दुआ की गई। देर शाम तक रिश्तेदारों का आना-जाना लगा रहा। सभी ने एक साथ खिराज-ए-अकीदत पेश की। बाकी तीन लोगों की सोयम की रस्म मंगलवार को अदा की जाएगी।
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कार चालक मितापुर जागीर निवासी फुरकान की सोयम की रस्म भी सोमवार को ही अदा की गई। दस हजार की आबादी वाले जाम गांव में मृतकों के घर आसपास होने की वजह से उसी गली में लोगों की आवाजाही ज्यादा है। बाकी गलियों में भी पहले की तरह चहल-पहल नहीं है। बस्ती के इन घरों में जब कोई मेहमान आता है, महिलाओं की चीख गूंज उठती है।
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बाकी गलियों में सन्नाटे के बीच बुजुर्ग चर्चा कर रहे थे कि आज तक गांव में इस तरह का कोई हादसा नहीं हुआ था, न ही इतने लोगों की एक साथ जान गई थी। बुजुर्ग कह रहे हैं कि गांव की खुशी को किसी की नजर लग गई। नौजवान अपने साथियों के संग बिताए दिनों को याद कर अफसोस जताते दिखे।
फोटो दिखाकर कह रहीं सलमा, उसके शौहर जिंदा हैं
20 दिन पहले ही आरिफ की जिंदगी में आई उसकी बीवी सलमा तीसरे दिन भी शौहर की मौत की बात कबूलने को तैयार नहीं हैं। परिवार की महिलाओं का कहना है कि गांव से जब उवैस की बरात जा रही थी तो सजकर तैयार हुए आरिफ ने अपने भाई महफूज से कहा था कि अपने मोबाइल से एक फोटो खींच दे।
20 दिन पहले ही आरिफ की जिंदगी में आई उसकी बीवी सलमा तीसरे दिन भी शौहर की मौत की बात कबूलने को तैयार नहीं हैं। परिवार की महिलाओं का कहना है कि गांव से जब उवैस की बरात जा रही थी तो सजकर तैयार हुए आरिफ ने अपने भाई महफूज से कहा था कि अपने मोबाइल से एक फोटो खींच दे।
इस फोटो को महफूज उसे भेज भी नहीं पाया था। उसी फोटो को दिखाकर सलमा दूसरी महिलाओं से कह रही हैं कि उसके शौहर अभी जिंदा हैं। हालांकि परिवार वाले आरिफ की अंगूठी दिखाते हुए समझा रहे हैं कि वो अब इस दुनिया में नहीं रहे पर सलमा मानने को तैयार नहीं हैं।