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बरेली: कुतुबे आलम के गुस्ल में इत्र, गुलाब, केवड़ा, संदल, जाफरान की खुशबू से महकी खानकाह
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गुस्ल की रस्म अदा करते अकीदतमंद।
- फोटो : अमर उजाला, बरेली
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बरेली। कुतुबे आलम नियाज बेनियाज हजरत शाह नियाज अहमद चिश्ती का इन दिनों खानकाह नियाजिया में 10 रोजा उर्स जारी है। शुक्रवार को गुस्ल शरीफ की रस्म अदा की गई। इसमें शिरकत करने के लिए जायरीन का हुजूम उमड़ पड़ा। बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुईं।
खानकाह का उर्स महल सुबह से ही जायरीन से भरा हुआ था। हर तरफ इत्र, गुलाब, केवड़ा, संदल, जाफरान की खुशबू महक रही थी। फज्र की नमाज के बाद कुरान ख्वानी शुरू हो गई। ठीक साढ़े नौ बजे साहिबे सज्जादा शाह मोहम्मद हसनैन उर्फ हसनी मियां, नायब सज्जादा अलहाज शाह मेहंदी मियां, मुंतजिम शब्बू मियां नियाजी, कमाल मियां नियाजी, अथर मियां नियाजी, जाहिद मियां नियाजी आदि खानकाह परिसर में दाखिल हुए। उनके साथ ख्वाजा गरीब नवाज दरगाह अजमेर, हजरत निजामुद्दीन औलिया दरगाह दिल्ली सहित हिंदुस्तान की तमाम खानकाहों के नुमाइंदे भी थे।
खानकाह के सभी बुजुर्गों की मजारों पर रिवायती अंदाज से गुस्ल दिया गया। चादर और गिलाफ नए बदले गए। गुस्ल की रस्म के दौरान जायरीन गुस्ल का पानी हासिल करने के लिए बेताब रहे। किसी ने बर्तन और बोतलें भरीं तो किसी ने रुमाल और हाथों में लेकर सर, माथे और सीने पर लगाया। इसके बाद खानकाही कव्वाल चौकियों और बाहर से आए कव्वालों ने खुसूसी कलाम पेश किए। साहिबे सज्जादा मसनद पर आए तो तमाम जायरीन ने दस्तबोसी कर उनसे दुआएं हासिल कीं। यहां से हसनी मियां कदीमी रिहाइशगाह पर गए।
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इमामुल मोहिब्बीन और सिराजुस्सालेकीन का कुल
उर्स की कड़ी में शाम को महफिले शमा सजाई गई। इस दौरान इमामुल मोहिब्बीन हजरत शाह मोहम्मद हसन सज्जाद उर्फ हसन मियां और हजरत सिराजुस्सालेकीन के कुल शरीफ की रस्म बारी बारी से अदा की गई। इसमें कव्वाल चौकियों ने हाजिरी देते हुए सूफियाना कलाम पेश किए। आखिर में फातेहा के बाद सज्जादा ने खुसूसी दुआ की और तबर्रुक तकसीम किया गया। हल्काए जिक्र के साथ पांचवें रोज की तकरीब पूरी हुई। लंगर देर रात तक जारी रहा।
बड़ा कुल शरीफ आज
कुतुबे आलम के उर्स में शनिवार को दिन में 2:10 बजे बड़ा कुल शरीफ होगा। इसके अलावा दिन में कोहाड़ापीर और पुराना शहर के मुन्ना खां की नीम के अलावा अन्य इलाकों से खानकाह पर जुलूस भी पहुंचेंगे। रात में खास दस्तरख्वान होगा। यह जानकारी मौलाना कासिम नियाजी ने दी।
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खानकाह का उर्स महल सुबह से ही जायरीन से भरा हुआ था। हर तरफ इत्र, गुलाब, केवड़ा, संदल, जाफरान की खुशबू महक रही थी। फज्र की नमाज के बाद कुरान ख्वानी शुरू हो गई। ठीक साढ़े नौ बजे साहिबे सज्जादा शाह मोहम्मद हसनैन उर्फ हसनी मियां, नायब सज्जादा अलहाज शाह मेहंदी मियां, मुंतजिम शब्बू मियां नियाजी, कमाल मियां नियाजी, अथर मियां नियाजी, जाहिद मियां नियाजी आदि खानकाह परिसर में दाखिल हुए। उनके साथ ख्वाजा गरीब नवाज दरगाह अजमेर, हजरत निजामुद्दीन औलिया दरगाह दिल्ली सहित हिंदुस्तान की तमाम खानकाहों के नुमाइंदे भी थे।
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खानकाह के सभी बुजुर्गों की मजारों पर रिवायती अंदाज से गुस्ल दिया गया। चादर और गिलाफ नए बदले गए। गुस्ल की रस्म के दौरान जायरीन गुस्ल का पानी हासिल करने के लिए बेताब रहे। किसी ने बर्तन और बोतलें भरीं तो किसी ने रुमाल और हाथों में लेकर सर, माथे और सीने पर लगाया। इसके बाद खानकाही कव्वाल चौकियों और बाहर से आए कव्वालों ने खुसूसी कलाम पेश किए। साहिबे सज्जादा मसनद पर आए तो तमाम जायरीन ने दस्तबोसी कर उनसे दुआएं हासिल कीं। यहां से हसनी मियां कदीमी रिहाइशगाह पर गए।
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इमामुल मोहिब्बीन और सिराजुस्सालेकीन का कुल
उर्स की कड़ी में शाम को महफिले शमा सजाई गई। इस दौरान इमामुल मोहिब्बीन हजरत शाह मोहम्मद हसन सज्जाद उर्फ हसन मियां और हजरत सिराजुस्सालेकीन के कुल शरीफ की रस्म बारी बारी से अदा की गई। इसमें कव्वाल चौकियों ने हाजिरी देते हुए सूफियाना कलाम पेश किए। आखिर में फातेहा के बाद सज्जादा ने खुसूसी दुआ की और तबर्रुक तकसीम किया गया। हल्काए जिक्र के साथ पांचवें रोज की तकरीब पूरी हुई। लंगर देर रात तक जारी रहा।
बड़ा कुल शरीफ आज
कुतुबे आलम के उर्स में शनिवार को दिन में 2:10 बजे बड़ा कुल शरीफ होगा। इसके अलावा दिन में कोहाड़ापीर और पुराना शहर के मुन्ना खां की नीम के अलावा अन्य इलाकों से खानकाह पर जुलूस भी पहुंचेंगे। रात में खास दस्तरख्वान होगा। यह जानकारी मौलाना कासिम नियाजी ने दी।