बरेली जिला अस्पताल प्रकरण: खूब गिड़गिड़ाए, किसी ने नहीं सुनी तो पत्नी को ठेले पर घर ले गए रामगोपाल
बरेली के जिला अस्पताल में बीमार पत्नी को इलाज और एंबुलेंस न मिलने का आरोप लगाने वाले रामगोपाल ने स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में पत्नी की दुर्गति देखी नहीं गई, इसलिए वह पत्नी को ठेले पर ले गए थे। उनका वीडियो वायरल हुआ तो स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के आदेश पर प्रकरण की जांच की जा रही है।
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मैंने सुना था कि जिला अस्पताल में बेहतर इलाज होता है, लेकिन वहां कोई पूछने वाला नहीं। कम से कम ये तो देखते कि बीमार महिला दर्द से छटपटा रही है, दवा दे दें। नर्स से मिन्नतें कीं पर उसने भी अनसुना कर दिया। थक हारकर पत्नी को घर ले आया। ये बातें बरेली के जिला अस्पताल की इमरजेंसी से पत्नी को ठेले पर घर लेकर आए रामगोपाल ने कहीं। उन्होंने बताया कि पत्नी अनारा देवी को सुबह जब चोट लगी तो वह काम पर थे। पड़ोसियों ने सरकारी एंबुलेंस बुलाकर अस्पताल भेजा था।
दोपहर 12 बजे वह अस्पताल पहुंचे तो पत्नी भर्ती थीं। पत्नी ने डॉक्टर की ओर से मिली दवा दिखाते हुए कहा कि भोजन के बाद खाएंगी। रामगोपाल पत्नी को ढांढस बंधाकर फिर काम पर चले गए। शाम चार बजे फिर अस्पताल पहुंचे तब तक अनारा ने दवा नहीं ली थी। पूछने पर रोने लगीं।
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नर्स से पूछा तो कोई जवाब नहीं दिया। इस हाल में उसे मरने के लिए नहीं छोड़ सकता था, इसलिए घर ले आया। वह सप्ताहभर से घर पर ही हैं। शौच भी बिस्तर पर हो रहा है। जिला अस्पताल में पत्नी की जो दुर्गति हुई, वह बर्दाश्त के बाहर थी। अगर पत्नी को तड़पकर ही मरना है तो घर पर मरे। अस्पताल में नहीं मरने दूंगा।
अनारा देवी का कहना है कि बेटा अलग रहता है, इसलिए खुद ही खाना बनाना पड़ता है। सुबह से अन्न का दाना पेट में नहीं था। अगर खाली पेट दवा खा लेती तो तबीयत और बिगड़ सकती थी। सरकारी अस्पताल में भोजन मुफ्त मिलता है, लेकिन भर्ती होने के बावजूद कोई पूछने तक नहीं आया। चोट का दर्द बढ़ता जा रहा था। जब पति आए तो उन्हें जानकारी दी। फिर वह उन्हें घर ले आए।
आयुष्मान कार्ड के बावजूद करना पड़ता है नकद भुगतान
रामगोपाल ने बताया कि पत्नी का आयुष्मान कार्ड भी है। घर पहुंचने के बाद निजी अस्पताल में इलाज कराने की सोची तो लोगों ने बताया कि पहले नकद रुपये देने पड़ते हैं। उसके बाद कार्ड लगाकर इलाज करते हैं। घर में सौ रुपये भी नहीं हैं, कहां से देते।
निदेशक ने रामगोपाल समेत डॉक्टर, नर्स व अन्य स्टाफ के दर्ज किए बयान
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के आदेश पर प्रकरण की जांच के लिए स्वास्थ्य महानिदेशालय से निदेश (पैरामेडिकल) डॉ. मंजू अग्रवाल शुक्रवार को जिला अस्पातल पहुंचीं। एडी एसआईसी डॉ. आरसी दीक्षित से बीते पांच दिनों में एडी हेल्थ, एडीएम सिटी की ओर से कई गई जांच संबंधी जानकारी ली। इसके बाद नौ मई को इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर, पैरामेडिकल और अन्य स्टाफ से पूछताछ की।
एंबुलेंस प्रभारी से संपर्क कर रामगोपाल को कार्यालय बुलाया। उनके बयान दर्ज किए और इलाज का भरोसा देकर घर भेज दिया। रामगोपाल ने सोमवार को पत्नी को भर्ती कराने पर सहमित जताई। एडी एसआईसी के मुताबिक निदेशक ने सभी के बयान दर्ज किए। जांच रिपोर्ट शासन को सौंपेंगी।