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Bareilly News: लखनऊ की रियल एस्टेट कंपनी से जुड़े डिजिटल अरेस्ट मामले के तार, निदेशक समेत तीन गिरफ्तार

Mon, 14 Jul 2025 08:28 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 14 Jul 2025 08:28 AM IST
सार

आईवीआरआई के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक को डिजिटल अरेस्ट कर 1.29 करोड़ की ठगी के मामले में पुलिस ने तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक आरोपी रियल स्टेट कंपनी का निदेशक है। उसके खाते में सबसे अधिक रकम ट्रांसफर की गई थी। 

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Bareilly Digital arrest case linked to real estate company three arrested including director
डिजिटल अरेस्ट मामले के आरोपी - फोटो : पुलिस विभाग

विस्तार

बरेली में आईवीआरआई के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक शुकदेव नंदी को डिजिटल अरेस्ट कर 1.29 करोड़ की साइबर मामले में लखनऊ की रियल एस्टेट सेक्टर की कंपनी के निदेशक सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से दो आरोपी लखनऊ के और एक बरेली का निवासी है। पुलिस को तीन मोबाइल, आधारकार्ड, पैनकार्ड और क्रिप्टो वॉलेट मिला है।

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एसपी क्राइम मनीष कुमार सोनकर ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट मामले में जेल भेजे गए ठगों से मिली जानकारी व खातों की जांच के आधार पर साइबर क्राइम थाना पुलिस ने लखनऊ एसटीएफ की मदद से बड़ी कार्रवाई की है। लखनऊ के थाना पीजीआई निवासी रियल एस्टेट सेक्टर की कंपनी के निदेशक सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी प्रदीप कुमार सिंह, थाना वजीरगंज निवासी महफूज और बरेली के थाना बारादरी निवासी अमान को गिरफ्तार किया है। 
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वैज्ञानिक से ठगी के दौरान 1.10 करोड़ रुपये प्रदीप कुमार की कंपनी के खाते में डाली गई। उस कंपनी के खाते से 121208 रुपये अमान खान के खाते में व 100076 रुपये महफूज के खाते में ट्रांसफर कराए गए। तीनों ठगों को सीजेएम कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है।

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प्रदीप की कंपनी के खाते में गई सबसे बड़ी रकम
साइबर थाना पुलिस के मुताबिक लखनऊ के थाना पीजीआई के 146 सेक्टर 6 सी गोपालकुंज निवासी प्रदीप कुमार सिंह प्रॉपर्टी का काम करता है। उसकी कंपनी श्री नरायनी इन्फ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड लखनऊ के खाते में ठगी की सबसे बड़ी रकम 1.10 करोड़ ट्रांसफर की गई थी। यह कंपनी का चालू खाता था। दरअसल बचत खाते में बड़ी रकम अचानक पहुंचने पर बैंक प्रबंधन को शक हो जाता है और ऐसे खाताधारक नजर में आ जाते हैं। इसलिए साइबर ठग बड़ी रकम ट्रांसफर करने के लिए फर्म या कंपनी के चालू खातों का इस्तेमाल करते हैं। 

इसके बदले फर्म के मालिकों को ठगी की रकम में हिस्सा दिया जाता है। वैज्ञानिक के मामले में भी ऐसा ही हुआ। प्रदीप के खाते से रकम क्रिप्टो करेंसी में बदलकर विदेश व देश के अलग हिस्सों में बैठे साथियों के क्रिप्टो वॉलेट में भेज दी गई। ठगों ने इसके लिए बाइनेंस एक्सचेंज के खाते का इस्तेमाल किया। प्रदीप ने ठगी के लिए बोगस फर्म बनाई या सच में वह रियल स्टेट का काम कर रही थी, इसकी जांच की जा रही है। प्रदीप की फर्म से एक महिला समेत अन्य लोग भी जुड़े हैं, उनकी भी जांच की जा रही है।

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