{"_id":"5d8bc48a8ebc3e015105be74","slug":"bareilly-college-bareilly-news-bly3776087142","type":"story","status":"publish","title_hn":"बरेली कॉलेज- संगोष्ठी के राजनीतिकरण पर विवाद, धक्के मारकर निकाले गए सछास पदाधिकारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बरेली कॉलेज- संगोष्ठी के राजनीतिकरण पर विवाद, धक्के मारकर निकाले गए सछास पदाधिकारी
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बरेली। बरेली कॉलेज सभागार में बुधवार को सैन्य अध्ययन विभाग की ओर से अनुच्छेद 370 हटाने को लेकर हुई संगोष्ठी में कॉलेज प्रशासन, भाजपा और समाजवादी छात्रसभा के पदाधिकारी आमने-सामने आ गए। सछास पदाधिकारी संगोष्ठी आयोजकों पर कॉलेज के कार्यक्रम को राजनीतिक बनाने कर आरोप लगाते हुए सेमिनार हॉल में घुस गए। वहां भाजपा नेताओं से उनकी धक्कामुक्की होने लगी तो भाजपाइयों ने सछास पदाधिकारियों को धक्के देकर सेमिनार हॉल से निकाल दिया। संगोष्ठी के अध्यक्ष और कॉलेज के प्राचार्य ने हंगामा कर रहे कॉलेज की ब्लैक लिस्ट में दर्ज छात्रों के खिलाफ डीएम से शिकायत कर थाना बारादरी में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
बुधवार को बरेली कॉलेज सभागार में आयोजित संगोष्ठी के मुख्य अतिथि और मुख्य वक्ता संघ के प्रचारक शिवप्रकाश और विशिष्ट अतिथि नगर विधायक डॉ. अरुण कुमार थे। साथ ही भाजपा के जिलाध्यक्ष रविंद्र सिंह राठौर समेत तमाम पदाधिकारी भी कार्यक्रम में मौजूद थे। दोपहर करीब दो बजे कार्यक्रम के समापन के दौरान सछास के शिवप्रताप यादव, हृदेश यादव, मुकेश, मधुनेश, वैभव गंगवार, विशाल अग्रवाल आदि पहुंचे और संगोष्ठी के आयोजन पर सवाल उठाया। छात्रनेताओं का आरोप है कि कॉलेज के कार्यक्रम में सिर्फ एक पार्टी के ही लोग शामिल हुए। उन्होंने सिर्फ अनुच्छेद 370 के लागू होने पर तारीफ की, जबकि नियमानुसार अन्य पार्टियों के लोगों को भी आमंत्रित किया जाना था। साथ ही मुख्य वक्ता किसी संवैधानिक पद पर नहीं हैं, ऐसे में कॉलेज के कार्यक्रम में एक राजनीतिक दल के नेता को मुख्य वक्ता बनाया गया, जो गलत है। संगोष्ठी आयोजन का ब्रोशर छपता है और छात्रों का रजिस्ट्रेशन कराया जाता है, इस नियम का पालन भी नहीं हुआ। ऐसे में कॉलेज की गरिमा, अनुशासन, नियम कायदे को ताक पर रखकर एक विशेष पार्टी के गुणगान के लिए कार्यक्र म हुआ।
छात्रनेताओं ने कॉलेज प्रशासन पर एक पार्टी का कार्यक्रम बताते हुए भाजपा नेताओं और वक्ताओं को बुलाने पर विरोध करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। इस पर दोनों पक्षों में जमकर धक्का मुक्की हुई। हंगामा बढ़ते देख मौके पर पुलिस फोर्स भी पहुंच गई लेकिन तब तक भाजपाइयों ने सछास कार्यकर्ताओं को धक्के देकर सेमिनार हॉल से बाहर निकाल दिया। बाहर भी खासा हंगामा हुआ लेकिन कॉलेज प्रशासन और पुलिस ने जैसे तैसे मामला रफादफा कर दिया। इस दौरान उप प्राचार्य डॉ. पूर्णिमा अनिल, सैन्य अध्ययन विभाग के एचओडी डॉ. एमपी सिंह, रूटा सचिव डॉ. स्वदेश सिंह, डॉ. संजीव सक्सेना, डॉ. अनुराग मोहन, डॉ. आलोक खरे आदि मौजूद रहे। चीफ प्रॉक्टर डॉ. वंदना शर्मा इस दौरान विश्वविद्यालय में बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक में गई थीं।
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सभागार का बंद था दरवाजा
छात्रनेताओं का आरोप है कि संगोष्ठी के दौरान सभागार का मुख्य दरवाजा बंद था, उस पर कुंडी लगा दी गई थी। नियमानुसार संगोष्ठी के दौरान दरवाजा खुला होना चाहिए था ताकि कॉलेज के अन्य छात्र भी उसमें शामिल हो सकें। इस संबंध में आयोजकों का कहना है कि सभागार की सभी सीटें भर गई थीं और कई छात्र खड़े भी थे। भीड़ अधिक होेने से कार्यक्रम प्रभावित न हो इसलिए सभागार का दरवाजा बंद किया गया था।
जिन छात्रों ने संगोष्ठी में हंगामा किया वे कॉलेज के छात्र नहीं हैं। उनका नाम काली सूची में दर्ज है और सूची डीएम को सौंप दी गई है। हंगामा किसी की प्रेरणा से हुआ है। पहले भी संगोष्ठी में राजनीतिक दलों के नेता आते रहे हैं। उस दौरान किसी अन्य ने कोई हस्तक्षेप नहीं किया। इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
- डॉ. अजय शर्मा, प्राचार्य
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बुधवार को बरेली कॉलेज सभागार में आयोजित संगोष्ठी के मुख्य अतिथि और मुख्य वक्ता संघ के प्रचारक शिवप्रकाश और विशिष्ट अतिथि नगर विधायक डॉ. अरुण कुमार थे। साथ ही भाजपा के जिलाध्यक्ष रविंद्र सिंह राठौर समेत तमाम पदाधिकारी भी कार्यक्रम में मौजूद थे। दोपहर करीब दो बजे कार्यक्रम के समापन के दौरान सछास के शिवप्रताप यादव, हृदेश यादव, मुकेश, मधुनेश, वैभव गंगवार, विशाल अग्रवाल आदि पहुंचे और संगोष्ठी के आयोजन पर सवाल उठाया। छात्रनेताओं का आरोप है कि कॉलेज के कार्यक्रम में सिर्फ एक पार्टी के ही लोग शामिल हुए। उन्होंने सिर्फ अनुच्छेद 370 के लागू होने पर तारीफ की, जबकि नियमानुसार अन्य पार्टियों के लोगों को भी आमंत्रित किया जाना था। साथ ही मुख्य वक्ता किसी संवैधानिक पद पर नहीं हैं, ऐसे में कॉलेज के कार्यक्रम में एक राजनीतिक दल के नेता को मुख्य वक्ता बनाया गया, जो गलत है। संगोष्ठी आयोजन का ब्रोशर छपता है और छात्रों का रजिस्ट्रेशन कराया जाता है, इस नियम का पालन भी नहीं हुआ। ऐसे में कॉलेज की गरिमा, अनुशासन, नियम कायदे को ताक पर रखकर एक विशेष पार्टी के गुणगान के लिए कार्यक्र म हुआ।
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छात्रनेताओं ने कॉलेज प्रशासन पर एक पार्टी का कार्यक्रम बताते हुए भाजपा नेताओं और वक्ताओं को बुलाने पर विरोध करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। इस पर दोनों पक्षों में जमकर धक्का मुक्की हुई। हंगामा बढ़ते देख मौके पर पुलिस फोर्स भी पहुंच गई लेकिन तब तक भाजपाइयों ने सछास कार्यकर्ताओं को धक्के देकर सेमिनार हॉल से बाहर निकाल दिया। बाहर भी खासा हंगामा हुआ लेकिन कॉलेज प्रशासन और पुलिस ने जैसे तैसे मामला रफादफा कर दिया। इस दौरान उप प्राचार्य डॉ. पूर्णिमा अनिल, सैन्य अध्ययन विभाग के एचओडी डॉ. एमपी सिंह, रूटा सचिव डॉ. स्वदेश सिंह, डॉ. संजीव सक्सेना, डॉ. अनुराग मोहन, डॉ. आलोक खरे आदि मौजूद रहे। चीफ प्रॉक्टर डॉ. वंदना शर्मा इस दौरान विश्वविद्यालय में बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक में गई थीं।
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सभागार का बंद था दरवाजा
छात्रनेताओं का आरोप है कि संगोष्ठी के दौरान सभागार का मुख्य दरवाजा बंद था, उस पर कुंडी लगा दी गई थी। नियमानुसार संगोष्ठी के दौरान दरवाजा खुला होना चाहिए था ताकि कॉलेज के अन्य छात्र भी उसमें शामिल हो सकें। इस संबंध में आयोजकों का कहना है कि सभागार की सभी सीटें भर गई थीं और कई छात्र खड़े भी थे। भीड़ अधिक होेने से कार्यक्रम प्रभावित न हो इसलिए सभागार का दरवाजा बंद किया गया था।
जिन छात्रों ने संगोष्ठी में हंगामा किया वे कॉलेज के छात्र नहीं हैं। उनका नाम काली सूची में दर्ज है और सूची डीएम को सौंप दी गई है। हंगामा किसी की प्रेरणा से हुआ है। पहले भी संगोष्ठी में राजनीतिक दलों के नेता आते रहे हैं। उस दौरान किसी अन्य ने कोई हस्तक्षेप नहीं किया। इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
- डॉ. अजय शर्मा, प्राचार्य