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बड़ा बाईपास- केंद्रीय मंत्री और डीएम की पैरवी का भी नहीं पड़ा कोई असर
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बरेली। बड़ा बाईपास के लिए भूमि देने वाले करीब छह सौ किसानों को मुआवजा देने के लिए केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार और डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह की पैरवी का कोई असर नहीं हुआ है। एनएचएआई हेडक्वार्टर से अब तक इस मामले को लेकर कोई सहमति नहीं जताई गई है, जबकि मार्च में संतोष गंगवार ने केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मिलकर इस मामले को उठाया था। उधर, किसानों की लड़ाई लड़ रहे हरिनंदन सिंह ने शुक्रवार को डीएम से मिलकर फिर से इस मामले में शासन में बातचीत करने को कहा है।
एनएचएआई ने दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर बड़ा बाईपास बनाने के लिए रजऊ परसरपुर से परसाखेड़ा तक 33 गांवों के करीब 2400 किसानों की भूमि का अधिग्रहण किया था। अधिग्रहण के रेट को लेकर तमाम किसानों और एनएचएआई के अफसरों के बीच सहमति नहीं बन सकी। लिहाजा 2013 में केवल 1800 किसान ही जमीन का मुआवजा लेने का तैयार हुए। उस वक्त इन्हें वर्ष 2008-09 के सर्किल रेट के आधार पर भुगतान किया गया। बाकी छह सौ किसानों ने मुआवजा की दर को लेकर आंदोलन छेड़ दिया। इस बीच असंतुष्ट किसानों और एनएचएआई के अफसरों के बीच प्रशासन ने दखल देते हुए समझौता कराने की कोशिश भी की, लेकिन इसका अब तक कोई समझौता नहीं हो सका है। मार्च में डीएम ने इस मामले को लेकर यह रिपोर्ट भेजी थी कि पहले 18 सौ किसानों को 55 करोड़ मुआवजा का भुगतान किया गया है। बाकी किसानों की मांग के अनुसार करीब 90 करोड़ का भुगतान होना है। शासन की सिफारिश के बाद इस मामले में एनएचएआई मुख्यालय को निर्णय लेना है, लेकिन इसमें अब तक कोई फैसला नहीं लिया जा सका है।
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एनएचएआई ने दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर बड़ा बाईपास बनाने के लिए रजऊ परसरपुर से परसाखेड़ा तक 33 गांवों के करीब 2400 किसानों की भूमि का अधिग्रहण किया था। अधिग्रहण के रेट को लेकर तमाम किसानों और एनएचएआई के अफसरों के बीच सहमति नहीं बन सकी। लिहाजा 2013 में केवल 1800 किसान ही जमीन का मुआवजा लेने का तैयार हुए। उस वक्त इन्हें वर्ष 2008-09 के सर्किल रेट के आधार पर भुगतान किया गया। बाकी छह सौ किसानों ने मुआवजा की दर को लेकर आंदोलन छेड़ दिया। इस बीच असंतुष्ट किसानों और एनएचएआई के अफसरों के बीच प्रशासन ने दखल देते हुए समझौता कराने की कोशिश भी की, लेकिन इसका अब तक कोई समझौता नहीं हो सका है। मार्च में डीएम ने इस मामले को लेकर यह रिपोर्ट भेजी थी कि पहले 18 सौ किसानों को 55 करोड़ मुआवजा का भुगतान किया गया है। बाकी किसानों की मांग के अनुसार करीब 90 करोड़ का भुगतान होना है। शासन की सिफारिश के बाद इस मामले में एनएचएआई मुख्यालय को निर्णय लेना है, लेकिन इसमें अब तक कोई फैसला नहीं लिया जा सका है।
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