{"_id":"65342f643595bf8ae90e6998","slug":"banking-facilities-extended-to-villages-by-becoming-bc-sakhi-bareilly-news-c-4-noi1138-272407-2023-10-22","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Bareilly News: नौकरी ठुकराई... नैंसी ने बीसी सखी बनकर गांव तक पहुंचाईं बैंकिंग सुविधाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bareilly News: नौकरी ठुकराई... नैंसी ने बीसी सखी बनकर गांव तक पहुंचाईं बैंकिंग सुविधाएं
Sun, 22 Oct 2023 12:20 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Sun, 22 Oct 2023 12:20 PM IST
सार
नैंसी ने एमएससी की पढ़ाई करने के बाद कहीं नौकरी या प्लेसमेंट के बजाय अपने ही गांव में बीसी सखी की सुविधाएं देने का फैसला किया। पिछले दो वर्षों से वह यह काम कर रही हैं।
विज्ञापन
बीसी सखी नैंसी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नए युवा पढ़ लिखकर जब अपने गांव-परिवेश के लिए कुछ करते हैं तब ही देश आगे बढ़ता है। यहां रहकर गांव के लिए कुछ करके जो सुकून और प्यार मुझे मिल सकता था वह कहीं और संभव नहीं था। यह कहना है बरेली के भोजीपुरा के चौपारा झनोवी ग्राम पंचायत की बीसी सखी नैंसी प्रजापति का।
विज्ञापन
नैंसी ने एमएससी की पढ़ाई करने के बाद कहीं नौकरी या प्लेसमेंट के बजाय अपने ही गांव में बीसी सखी की सुविधाएं देने का फैसला किया। पिछले दो वर्षों से वह यह काम कर रही हैं। इसके जरिए वह अब तक करीब तीन हजार ग्रामीणों को बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ चुकी हैं। उनका कहना है कि कोई भी ग्रामीण किसी भी समय मदद के लिए मेरे पास आ सकता है।
विज्ञापन
कैसे आया विचार
गांव वालों को बैंकिंग संबंधी कार्यों के लिए पांच किलोमीटर दूर जाना पड़ता था। इस वजह से बहुत सारी ग्रामीण महिलाएं बैंकिंग सुविधाओं से कोसों दूर थीं। घर के काम और अन्य कारणों से उन्हें यह मौका नहीं मिल पाता था। पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने गांव के लिए कुछ करने का फैसला किया। इसके लिए मैंने इसका प्रशिक्षण लेकर अपना काम शुरू किया। इन प्रयासों से ग्रामीणों को अपने ही गांव में बैंक मिल गया और मुझे एक बेहतर काम जो मुझे संतुष्टि भी दे रहा है। पिछले दो सालों से बतौर बीसी सखी चौपारा झनोवी में रहकर ही काम कर रही हूं। ग्राम पंचायत पर शिविर लगाकर लोगों को बैंक व सरकार की योजनाओं के बारे में भी बताती हूं।
विज्ञापन
क्या आईं चुनौतियां
जहां तक बात चुनौतियों की है तो मैं यह कह सकती हूं कि मेरा सफर बहुत कठिन नहीं रहा। पढ़ाई पूरी करने के बाद मेरे पास प्लेसमेंट के बेहतर मौके थे, उन्हें ठुकराने पर दोस्तों ने सलाह दी कि मौका रोज-रोज दरवाजा नहीं खटखटाता। मैंने तय किया कि मुझे अपने लिए मौका खुद बनाना चाहिए। प्रयास किया तो सफलता मिली। परिवार और गांव के लोगों का बहुत सहयोग मिला। अपने इसी काम के बदौलत मैं बेहतर मुकाम पर हूं।
जहां तक बात चुनौतियों की है तो मैं यह कह सकती हूं कि मेरा सफर बहुत कठिन नहीं रहा। पढ़ाई पूरी करने के बाद मेरे पास प्लेसमेंट के बेहतर मौके थे, उन्हें ठुकराने पर दोस्तों ने सलाह दी कि मौका रोज-रोज दरवाजा नहीं खटखटाता। मैंने तय किया कि मुझे अपने लिए मौका खुद बनाना चाहिए। प्रयास किया तो सफलता मिली। परिवार और गांव के लोगों का बहुत सहयोग मिला। अपने इसी काम के बदौलत मैं बेहतर मुकाम पर हूं।