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Bareilly News: पालकी पर सवार होकर शहर भ्रमण पर निकलते हैं बाबा महाकाल

Mon, 14 Jul 2025 02:21 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 14 Jul 2025 02:21 AM IST
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Baba Mahakal goes on a city tour riding on a palanquin
बरेली। सावन की शिवरात्रि पर बाबा महाकाल पालकी पर सवार होकर शहर का भ्रमण करेंगे। दस वर्ष पहले इसकी शुरुआत हुई थी। अब यह पालकी यात्रा भव्य स्वरूप ले चुकी है। इस बार 22 जुलाई को यात्रा निकला जाएगी। अब हजारों की संख्या में श्रद्धालु महाकाल के दर्शन के लिए उमड़ते हैं। वह दंडवत होकर बाबा को प्रणाम करते हैं।
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बाबा महाकाल पालकी शोभायात्रा समिति के अध्यक्ष ब्रजवासी लाल अग्रवाल ने बताया कि पालकी यात्रा की शुरुआत वर्ष 2014 में की गई थी। पहली बार इसमें कुछ ही लोग शामिल हुए थे, लेकिन हर वर्ष श्रद्धालु इससे जुड़ते गए। अब हर साल रंग-बिरंगी झांकियां, ढोल-नगाड़ों की थाप यात्रा को भव्य स्वरूप प्रदान करते हैं। स्थानीय निवासियों के साथ ही दूर-दराज से भी भक्त बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए बरेली आते हैं।
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पालकी को धारण करने के लिए पहनते हैं नंदी वेश
बाबा महाकाल की पालकी को हर कोई अपने कंधे पर धारण नहीं कर सकता। इसको धारण करने के लिए नंदी वेश अनिवार्य होता है। समिति के सदस्य अनुराग अग्रवाल बताते हैं कि पालकी उठाने वाले नंदियों को सफेद धोती व अंगवस्त्र दिए जाते हैं। वह शिवरात्रि के दिन फलाहारी व्रत रखते हैं। इसके बाद मंदिर में वैदिक मंत्रोचारण के साथ पूजन कराया जाता है। उनको जनेऊ पहनाकर शरीर पर भस्म लगाई जाती है। उनको पूरे रास्ते नंगे पैर चलना होता है। पालकी यात्रा में अलग-अगल टोलियों में करीब 100 से अधिक नंदी शामिल रहते हैं जो बारी-बारी से पालकी को अपने कंधों पर धारण करते हैं।
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चांदी की है बाबा महाकाल की प्रतिमा
पालकी में बाबा महाकाल प्रमिता चांदी की होती है। पालकी को फूलों व लाइटों से भव्य तरीके से सजाया जाता है। पालकी से पहले भक्त रोड पर झाड़ू लगाते हुए चलते हैं। बाबा के स्वागत के लिए रंगोली बनाई जाती है। इसके बाद महिलाओं की टोली भजन गाती है। बड़ा ढोल, डीजे, बैंड आदि साथ चलते हैं। सबसे पीछे बाबा की पालकी निकलती है। पालकी यात्रा के स्वागत के लिए लोग रोड के किनारे टेंट लगाते हैं।

यहां से निकलती है बाबा की पालकीपालकी श्यामगंज स्थित सेठ गिरधारी लाल मंदिर से साहू गोपीनाथ, मठ की चौकी, शिवाजी मार्ग, बांस मंडी, पुराना रोडवेज, नॉवल्टी चौराहा, चौकी चौराहा, बरेली काॅलेज, कालीबाड़ी होते हुए वापस मंदिर पहुंचकर विश्राम करती है। मंदिर में पालकी पहुंचने के बाद बाबा महाकाल की भव्य आरती की जाती है। इसके बाद भक्तों को प्रसाद वितरित किया जाता है। संवाद
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