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अश्चे बोछोर आबार होवे.. पुकारकर किया मां का विसर्जन

Sat, 16 Oct 2021 01:33 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 16 Oct 2021 01:33 AM IST
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Asche Bochor Aabar Hove.. Immersion of the mother by calling
बरेली में रामगंगा के तट पर विसर्जन के लिए रखी प्रतिमाएं।

दुर्गा पूजा कमेटियों में खेला सिंदूर वरण, गीत गाकर अगले साल मां को किया आमंत्रित
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पंडाल से कुछ दूर तक शोभायात्रा निकालकर रामगंगा नदी में प्रतिमाओं का किया विसर्जन

बरेली। शारदीय नवरात्र की दशमी पर बरेली के सजे दुर्गा पूजा पंडाल में मां को भावभीनी विदाई दी गई। बंगाली समाज की महिलाओं ने सिंदूर वरण खेला। फिर धूमधाम से मां को विदा किया। देर शाम रामगंगा में भक्तों ने भावपूर्ण गीत गाकर और जयकारा लगाकर प्रतिमा का विसर्जन किया।
शुक्रवार को विजयदशमी के पावन पर्व और नवरात्रि की दशमी पर मां महिषासुर मर्दिनी का धूमधाम से पूजन किया गया। सजे हुए पंडाल में महिलाओं ने एक दूसरे को सिंदूर लगाकर मां दुर्गा का वरण किया और आशीर्वाद लिया। मां दुर्गा को सिंदूर लगाते हुए महिलाएं काफी भावुक दिखीं। विदाई के इस पल में ढाक की धुन पर उत्साह और उमंग का वातावरण दिखाई दिया। बंगाली लोक प्रचलित गीत अश्चे बोछोर आबार होवे.. गाकर मां से अगले साल फिर आने की कामना की गई। साथ ही मां से घर और परिवार में सुख और समृद्धि की कामना की गई। कई महिलाएं सेल्फी लेते, मां दुर्गा की प्रतिमा के साथ इस पल को कैमरे में कैद करते हुए दिखाई दी।
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सिंदूर वरण कर रही महिलाओं ने बताया कि सिंदूर खेलने की रस्म के पीछे मान्यता है कि जिस तरह पूर्ण श्रृंगार कर बेटी को विदा किया जाता है। उसी तरह मां दुर्गा को भी ससुराल विदा किया जाता है। वह शिवजी के पास चली जाती हैं। इस दौरान पंडाल में मां की गोद भराई कर पान व मिठाई खिलाने की परंपरा है। सुहागिन महिलाएं मां को सिंदूर लगाकर एक-दूसरे को सिंदूर लगाती है। सिंदूर को सुहाग का प्रतीक माना जाता है और ऐसी मान्यता है इससे पति की उम्र लंबी होती है।
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शोभायात्रा निकालकर मां को किया विदा

दुर्गा पूजा कमेटियों की ओर से सुबह सिंदूर खेलने समेत अन्य पारंपरिक रीति रिवाज निभाकर मां को विदा किया गया। दोपहर तीन बजे के बाद पंडालों में सजाई मां की प्रतिमाओं समेत अन्य देवियों की प्रतिमा वाहनों के जरिए रामगंगा रवाना हुई। बंगाली समाज के लोगों ने ढोल पर नृत्य कर और सिंदूर एक दूसरे को लगाकर मां को कुछ दूर तक शोभायात्रा निकाली। रामगंगा पर पारंपरिक तरीके से मां को विसर्जन किया गया। इस दौरान मौजूद सभी लोग भावपूर्ण दिखाई दिए।
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