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सर्दी बढ़ने के साथ ही गाय-भैंस में बढ़ रहा निमोनिया का खतरा

Fri, 11 Dec 2020 01:40 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 11 Dec 2020 01:40 AM IST
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As the winter progresses, the risk of pneumonia in cow and buffalo increases.
आईवीआरआई - फोटो : सोशल नेटवर्क

ठंड में कई पशुओं को छोटी जगह में रखने से घुड़का बीमारी भी फैल रही

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बरेली। सर्दी बढ़ने के साथ ही गाय-भैंस में निमोनिया के साथ संक्रमण का खतरा भी बढ़ रहा है। इसके अलावा इन दिनों ये पशु घुड़का बीमारी से भी ग्रसित हो रहे हैं। इस बीमारी से पशुओं के गले में तकलीफ होने के साथ सांस लेने में दिक्कत पैदा होती है। इसका सही से इलाज न हो पाने पर पशुओं की मौत तक हो जाती है। भारतीय पशु चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के वैज्ञानिक इन बीमारियों के बढ़ने से चिंतित है। उनका कहना है कि पशुपालक थोड़ा ध्यान दें तो वे अपने पशुओं को इन बीमारियों से बचा सकते हैं।
आईवीआरआई के महामारी नियंत्रण विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. भोजराज सिंह का कहना है कि सर्दी के दिनों में पशुपालक गाय-भैंस व दूसरे जानवरों को बचाने के लिए पशुशाला में घासफूस और पुआल फैला देते हैं। यह उपाय ठीक है मगर इसमें दिक्कत यह आती है कि पशुपालक बहुत समय तक घासफूस व पुआल बदलते नहीं है। जबकि पशु उसे गीला और गंदा करता रहता है। जबकि सर्दी में गीली घासफूस और पुआल से जानवर को निमोनिया होने का खतरा रहता है। साथ ही डायरिया की बीमारी भी बढ़ जाती है। डॉ. भोजराज का कहना है कि पशुओं को इस बीमारी से बचाने के लिए पशुशाला में जल्द से जल्द घासफूस और पुआल को बदलते रहना चाहिए।
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सर्दी में गाय-भैंस में संक्रमण का खतरा भी बना रहता है। उनका कहना है कि सर्दी में पशुशाला में एक साथ कई जानवर रखे जाते हैं। उन्हें ताजी हवा या धूप भी नहीं मिलती। सांस के साथ उनकी बीमारियों से दूसरे जानवर भी संक्रमित होते चले जाते हैं। इससे बड़ी संख्या में पशु घुड़का बीमारी का शिकार हो जाते हैं। इस बीमारी में उनके गले में सूजन आ जाती है, सही से सांस नहीं ले पाते। समय से इलाज न होने पर पशुओं की मौत भी हो जाती है। यह समस्या तब और बढ़ती है जब कई पशुओं को छोटी जगह में एक साथ बांध दिया जाता है। इस समय पशुओं में किलनी और पेट मेें कीड़े की बीमारी भी फैल रही है। इससे पशु चारा खाना छोड़ देता है। इस कारण वह लगातार कमजोर होता चला जाता है।
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कुत्तों में पार्वो वायरस का खतरा

आईवीआरआई में पशु शल्य चिकित्सा विभाग के अध्यक्ष डॉ. अमरपाल का कहना है कि सर्दी बढ़ने के साथ ही कुत्तों में पार्वो वायरस फैलने लगता है। इस वायरस से ग्रसित होने वाले कुत्तों में चकत्ते पड़ने के साथ ही दाने पड़ने लगते हैं। उनका कहना है कि इस बीमारी से ग्रसित होने के बाद कुत्तों के मुंह से खून आना शुरू हो जाता है। इससे बचाव के लिए ढाई से छह महीने तक कुत्तों में इसकी नियमित वैक्सीन लगानी चाहिए।
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