{"_id":"6a7a271b823804aff90c4a5f","slug":"arv-stocks-run-out-affected-individuals-left-making-repeated-rounds-bareilly-news-c-4-bly1015-943396-2026-08-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bareilly News: एआरवी का स्टॉक खत्म, चक्कर काटते रहे पीड़ित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bareilly News: एआरवी का स्टॉक खत्म, चक्कर काटते रहे पीड़ित
विज्ञापन
बरेली। तीन सौ बेड अस्पताल में एंटी रैबीज वैक्सीन (एआरवी) का स्टॉक खत्म हो गया है। ऐसे में सोमवार को वैक्सीन लगवाने पहुंचे लोग चक्कर काटने के लिए विवश रहे। उनको वहां से जिला अस्पताल भेजा गया। कुछ लोगों ने इमरजेंसी में पहुंचकर वैक्सीन लगवाई, जबकि ज्यादातर लोगों ने निजी अस्पतालों का रुख किया।
तीन सौ बेड अस्पताल के फार्मासिस्ट ऋषभ के मुताबिक, शनिवार को ही वैक्सीन की कुछ ही डोज बची थीं। आधे दिन की ओपीडी के बाद मांगपत्र बनाकर एडी हेल्थ कार्यालय स्थित ड्रग स्टोर को भेज दिया गया था। सोमवार को वैक्सीन नहीं मिली। संपर्क करने पर बताया गया कि मेडिकल कॉरपोरेशन से ही आपूर्ति नहीं हो सकी है। ऐसी स्थिति में कुत्ते, बंदर आदि के हमले में जख्मी लोगों को जिला अस्पताल रेफर करने के लिए कहा गया।
मंगलवार को भी वैक्सीन उपलब्ध हो पाना मुश्किल है। बताया कि जिला अस्पताल में वैक्सीन की आपूर्ति न होने पर स्थानीय खरीद भी हो सकती है। एआरवी क्लीनिक प्रभारी डॉ. फैजल के मुताबिक, प्रतिदिन करीब तीन सौ लोगों को एआरवी लगती है। रविवार को अवकाश की वजह से सोमवार को वैक्सीन लगवाने वालों की संख्या 400 से ज्यादा होती है। इसमें करीब सौ लोग पहली, जबकि अन्य दूसरी, तीसरी, चौथी डोज लगवाने आते हैं।
विज्ञापन
घबराएं नहीं... 48 घंटे में भी लगा सकते हैं एआरवी
जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. प्रशांत रंजन के मुताबिक, गर्दन, गाल, सिर, कान पर पशु काट लें तो 24 घंटे के भीतर एआरवी के साथ सीरम लगवाना जरूरी होता है। अगर गर्दन से नीचे पशु ने काटा है तो 48 घंटे में भी एआरवी लगवाई जा सकती है। कमर से नीचे काट ले तो समय सीमा और बढ़ सकती है। गहरे जख्म की स्थिति में एआरवी समेत सीरम लगता है। खरोंच से कोई जख्म न होने पर एआरवी की जरूरत कम होती है।
विज्ञापन
तीन सौ बेड अस्पताल के फार्मासिस्ट ऋषभ के मुताबिक, शनिवार को ही वैक्सीन की कुछ ही डोज बची थीं। आधे दिन की ओपीडी के बाद मांगपत्र बनाकर एडी हेल्थ कार्यालय स्थित ड्रग स्टोर को भेज दिया गया था। सोमवार को वैक्सीन नहीं मिली। संपर्क करने पर बताया गया कि मेडिकल कॉरपोरेशन से ही आपूर्ति नहीं हो सकी है। ऐसी स्थिति में कुत्ते, बंदर आदि के हमले में जख्मी लोगों को जिला अस्पताल रेफर करने के लिए कहा गया।
विज्ञापन
मंगलवार को भी वैक्सीन उपलब्ध हो पाना मुश्किल है। बताया कि जिला अस्पताल में वैक्सीन की आपूर्ति न होने पर स्थानीय खरीद भी हो सकती है। एआरवी क्लीनिक प्रभारी डॉ. फैजल के मुताबिक, प्रतिदिन करीब तीन सौ लोगों को एआरवी लगती है। रविवार को अवकाश की वजह से सोमवार को वैक्सीन लगवाने वालों की संख्या 400 से ज्यादा होती है। इसमें करीब सौ लोग पहली, जबकि अन्य दूसरी, तीसरी, चौथी डोज लगवाने आते हैं।
विज्ञापन
घबराएं नहीं... 48 घंटे में भी लगा सकते हैं एआरवी
जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. प्रशांत रंजन के मुताबिक, गर्दन, गाल, सिर, कान पर पशु काट लें तो 24 घंटे के भीतर एआरवी के साथ सीरम लगवाना जरूरी होता है। अगर गर्दन से नीचे पशु ने काटा है तो 48 घंटे में भी एआरवी लगवाई जा सकती है। कमर से नीचे काट ले तो समय सीमा और बढ़ सकती है। गहरे जख्म की स्थिति में एआरवी समेत सीरम लगता है। खरोंच से कोई जख्म न होने पर एआरवी की जरूरत कम होती है।